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किसी संत ने कहा है कि-“आप कितने भी दयावान, धर्मभीरू और सहृदय होने का दंभ भरें लेकिन जब ऊपर वाला आपका खाता चैक करेगा तो वह उस वक्त यह नहीं ख्याल करेगा कि आपने कितने तीर्थ किये या कितना दान-पुण्य किया, वह उस वक्त यह जरूर देखेगा कि आपने कितने रिश्तों का खून किया, कितने रिश्तों के साथ चालाकियां की और कितने अपनों को धोखा दिया, आपने कितनों का बुरा चाहा, बुरा ही नहीं चाहा, बुरा किया भी और अपने लोग जो अपने परिवार को छोड़कर आपके लिए ताजिंदगी खटते रहे, उनके साथ आपने क्या किया? इसलिए ध्यान रखो तंत्र-मंत्र, टोना-टोटका, किसी के बुरे के लिए की गयी आपकी पैशाचिक क्रियायें, स्वार्थी व अपमान जनक व्यवहार का एक-न-एक दिन हिसाब जरूर होगा। उस वक्त तुम्हें बचाने कौन आयेगा? इसलिए सद्कर्म करो, न बुरा चाहो,न बुरा करो, न चोरी करो और न किसी का अपमान करो। जहां तक हो प्रेम, सद्भाव, सहयोग और सामंजस्यपूर्ण आचरण करो, यही जीवन का सत्य और मर्म है।”
प्रस्तुति : आर.बी.मीणा