आँखें हैं अमूल्य, इनका ख्याल रखें : डॉ. महेंद्र श्रिया

विश्व दृष्टि दिवस
जाफर लोहानी
www.daylifenews.in
मनोहरपुर (जयपुर)। श्रिया नेत्र चिकित्सालय एंव प्रसूती केंद्र के निदेशक महेंद्र कुमार श्रीया ने कहा कि आज 8 अक्टूबर 2026 को पूरे विश्व में विश्व दृष्टि दिवस मनाया जा रहा है। हर साल अक्टूबर माह के दूसरे गुरुवार को मनाए जाने वाले इस दिवस का उद्देश्य आँखों की रोशनी के महत्व, नेत्र रोगों से बचाव और नेत्रदान के प्रति जनजागरूकता फैलाना है। इस बार 2026 में यह दिवस 8 अक्टूबर को ही पड़ रहा है, जो भारतीय वायु सेना दिवस के साथ एक संयोग भी है।
नेत्रदान – सबसे बड़ा दान
श्रिया नेत्र चिकित्सालय एंव प्रसूती केंद्र के निदेशक महेंद्र कुमार श्रीया ने कहा कि अभियान का मुख्य नारा रहा –
“नेत्रदान करें, दृष्टि दान करें, जीवन में उजाला लाएं।”

  • नेत्रदान एक अमूल्य दान है: मृत्यु के बाद दान किए गए एक व्यक्ति के दो नेत्र, दो दृष्टिहीन लोगों के अंधेरे जीवन में रोशनी भर सकते हैं।
  • कोई आयु सीमा नहीं: नेत्रदान के लिए कोई आयु सीमा नहीं होती। 10 साल के बच्चे से लेकर 90 साल के बुजुर्ग तक कोई भी व्यक्ति नेत्रदान कर सकता है। चश्मा लगाने वाले, डायबिटीज या हाई बीपी वाले व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकते हैं।
  • प्रक्रिया बेहद सरल: मृत्यु के 6 घंटे के भीतर नेत्र बैंक की टीम को सूचना देने पर वे घर आकर ही कॉर्निया निकाल ले जाते हैं। इसमें चेहरे पर कोई विकृति नहीं आती।
  • एक संकल्प रोशनी ला सकता है:
    आपका एक संकल्प किसी के जीवन में फिर से रंग भर सकता है।
    भारत में क्यों जरूरी है जागरूकता?
    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनिया भर में लगभग 285 मिलियन लोग दृष्टि बाधित हैं, जिनमें से 90% विकासशील देशों में रहते हैं। भारत में अकेले 12 मिलियन से अधिक लोग कॉर्निया अंधेपन से पीड़ित हैं, जबकि हर साल केवल 50 हजार के आसपास ही नेत्रदान हो पाते हैं। यह अंतर ही जागरूकता की सबसे बड़ी जरूरत को दर्शाता है।
    नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अंधेपन के 80 प्रतिशत मामलों को रोका जा सकता है, यदि समय पर जांच और उपचार हो जाए।
    कैसे रखें आँखों का ख्याल – विशेषज्ञों की 5 सलाह:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *