
राजस्थान हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, पैरवी भारत सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भारत व्यास ने की
www.daylifenews.in
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए आईवीएफ एवं सहायक प्रजनन तकनीक (ART) के माध्यम से संतान प्राप्ति के लिए निर्धारित आयु सीमा को चुनौती देने वाली चारों रिट याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
न्यायमूर्ति इन्द्रजीत सिंह एवं न्यायमूर्ति संदीप तनेजा की खंडपीठ ने 29 अक्टूबर 2026 को दिए अपने निर्णय में असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) अधिनियम, 2021 की धारा 21(जी) की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी। इस प्रावधान के अनुसार आईवीएफ उपचार के लिए महिलाओं की आयु 21 वर्ष से अधिक एवं 50 वर्ष से कम तथा पुरुषों की आयु 21 वर्ष से अधिक एवं 55 वर्ष से कम निर्धारित है।
याचिकाकर्ताओं ने इन आयु सीमाओं को मनमाना एवं संविधान के अनुच्छेद 14 तथा 21 के विरुद्ध बताते हुए चुनौती दी थी।
भारत सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अधिवक्ता भारत व्यास ने सशक्त एवं प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष तर्क प्रस्तुत किया कि संसद द्वारा निर्धारित आयु सीमाओं का उद्देश्य भावी संतान एवं माता के स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा बच्चे के समुचित पालन-पोषण को सुनिश्चित करना है। केवल व्यक्तिगत कठिनाई के आधार पर किसी वैधानिक प्रावधान को असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता।

खंडपीठ ने इन कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए स्पष्ट किया कि संतान प्राप्ति की इच्छा महत्वपूर्ण है, लेकिन बच्चे का सर्वोत्तम हित सर्वोपरि है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पति निर्धारित आयु सीमा पार कर चुका है, तब भी पात्र आयु की विवाहित महिला अपने पति की विधिसम्मत सहमति से दानदाता के शुक्राणुओं का उपयोग कर ART उपचार प्राप्त कर सकती है।
भारत सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल अधिवक्ता डॉ. विनय कांत सक्सेना ने बताया कि यह निर्णय सहायक प्रजनन तकनीक से संबंधित कानून की संवैधानिक स्थिति स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला है। इससे देशभर में आईवीएफ उपचार की आयु संबंधी कानूनी व्यवस्था को स्पष्टता मिलेगी। उन्होंने बताया कि न्यायालय ने व्यक्तिगत प्रजनन अधिकारों के साथ भावी संतान के स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं कल्याण के बीच संतुलन को महत्वपूर्ण माना है। यह निर्णय भविष्य में इस प्रकार के मामलों में महत्वपूर्ण न्यायिक मार्गदर्शन प्रदान करेगा। यह जानकारी स्टेंडिंग काउंसल, गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया के अधिवक्ता विनय कांत सक्सेना ने दी। (प्रेस नोट)