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रिपोर्टर: सर कल शिखर अग्रवाल के खिलाफ एसीबी ने मामला दर्ज कर लिया है… क्या कहेंगे?
जवाब: अरे कुछ नहीं हुआ। एसीबी भी इनकी है, मुख्यमंत्री जी के अधीन है, मुख्यमंत्री जी के ऊपर जो आरोप लगा है, उनकी अध्यक्षता में मीटिंग होके फैसला हुआ है इनके पक्ष के अंदर, कंपनी के पक्ष के अंदर। और मुख्यमंत्री जी के सबसे कोई नजदीक रहे अधिकारी, प्रिंसिपल सेक्रेटरी या एसीएस टू सीएम, तो यही अधिकारी जिनका नाम है शिखर अग्रवाल, वही रहे थे। जो किस्सा मैं सुना रहा हूं बार-बार, झगड़ा हुआ, थप्पड़बाजी हुई या क्या हुआ, वो तो या तो मुख्यमंत्री जी खुद बताएं, या जो शामिल थे उस वक्त में, उसमें ये अधिकारी भी साथ खड़े थे वहां पर, या जो श्रीवास्तव जी जो हमारे IG साहब बने हुए हैं, वो थे, या और कोई इनके परिवार के लोग थे जो भी थे, वो बता सकता है हकीकत तो, मैं कैसे बता सकता हूं?
घटना हुई है ये तो सिद्ध हो गया है, इनके खुद के लोग कहने लग गए हैं। अब वो व्यक्ति को चाहिए ईमानदारी से, देखिए देश भर में ईडी, इनकम टैक्स, सीबीआई ने जो भूमिका अदा करी है जिस रूप में, पूरा देश चिंतित है, आक्रोश भी है उनके अंदर। इतने बड़े केस के बाद में, आप 6 करोड़ में आप संपत्ति खरीद लो, 40 विला, कल मैंने सुना उनके परिवार ने (विक्रेता के), परिवार के किसी ने कहा है कि 15 लाख में ही देते हैं हम तो सब जगह। तो मैंने कहा हमारे कुछ लोग जाके मांगे उनसे 15 लाख के अंदर जो एक करोड़ के विला हैं। हमारे मुख्यमंत्री जी ने पत्रकारों को कहा है कि आप 75 लाख दीजिए, और आपको फ्लैट देंगे। तो पत्रकारों के लिए तो 75 लाख है, और शिखर अग्रवाल जी के लिए 15 लाख है।
और वही वापिस लीज पे देकर के वापिस पैसा वसूल कर लो, ऐसा सौदा तो हम सबको पसंद आएगा, अगर हम सबको आज़ादी मिले, पत्रकारों को, आम जनता को, तो कितने लोगों का भला होगा? ये स्कीम खाली क्या शिखर अग्रवाल के लिए बनाई गई है? मुख्यमंत्री जवाब दे इसका। खाली आपने उनको एपीओ कर दिया। और एपीओ कर दिया, आपने केस एसीबी में दर्ज कर लिया, बड़ी कृपा करी, कि आपने इमीडिएटली परमिशन दे दी। अब अगर एसीबी तक केस रहेगा, अगर ये नहीं जाएगा निष्पक्ष जांच तक नहीं जाएगा, एफआईआर दर्ज नहीं होगी, अभी तो पीई दर्ज हुई है खाली, कुछ नहीं हुआ है। अब वो जांच करेंगे केस बनता नहीं बनता। पूरे देश भर का मीडिया तो चिल्ला रहा है। पूरे देश भर के सब मीडिया के अंदर इसकी एक खबर बन गई है, और ये अभी तक पीई में लगे हुए हैं।
कब तो पीई से कन्वर्ट होगी एफआईआर, एफआईआर के बाद में किस प्रकार से आप बिहेव करोगे, कितना दबाव आएगा डीजी साहब के ऊपर। डीजी साहब तो दबे हुए हैं दबावों में। डीजी साहब जो एसीबी के हैं, बहुत भले आदमी हैं, इतने दब गए हैं वो ऊपर के दबाव से कि महेश जोशी के केस के अंदर आईओ ने कहा कि साहब केस नहीं बनता है, मैं अरेस्ट नहीं कर सकता, तो उन्होंने कहा कि मैं कुछ नहीं जानता, ऊपर से दबाव है। और वहां एक महिला अधिकारी है एडीजी एसीबी के अंदर, वो तो डीजी के भी ऊपर है वो। वो सुपर डीजी वही है। एक्चुअल में डीजी जो हैं, वो डी फैक्टो डीजी तो वो हैं। वो हुक्म चलाती हैं, अधिकारियों को देती हैं, डांटती हैं, फटकारती हैं, और केस बन जाते हैं।
जिसको टारगेट करना होता है, टारगेट करने के लिए ही मैं समझता हूं एडीजी जो महिला वो हैं, भद्र महिला हैं, उनको लगाया इसी काम के लिए है कि आप जिनको हम इशारा करें, डीजी साहब तो भले आदमी हैं, ये ज्यादा कह नहीं पाएंगे, इनकी नेचर बोलने की नहीं, ज्यादा डांटने की नेचर नहीं है, तुम वहां बैठो और रगड़ाई करो। तो आप सोच सकते हो रगड़ाई हो रही है लोगों की बेचारों की। निर्दोष लोग फंस रहे हैं। हम चाहते हैं दोषी को आप भले ही कितनी बड़ी सज़ा दो, हम गर्व महसूस करेंगे। दुर्भाग्य से ये डीजी साहब और वो डीजी साहब, दोनों एक ही मायने के हैं। दोनों भले हैं, अच्छे संपर्क हैं मेरे से तो। पहले भी थे, बन के आये तब भी हुए, आज भी मैं रखता हूं। वो अलग बात है।
पर जो उनकी भूमिका है दबाव में काम करने की, उससे उनको मुक्त होना चाहिए, ये मेरी अपील रहेगी, मार्मिक अपील है देश हित में, समाज के हित में। आपकी ये ड्यूटी है जिसके लिए आपने शपथ ली है आईपीएस बनने के बाद में, उस शपथ का निर्वहन करने के लिए आपको आगे आना चाहिए। चाहे वो एक्स वाई जेड कोई भी हो, बेईमानी करी है, करप्शन किया है, उसको सज़ा देनी मैक्सिमम सज़ा दिलाओ, हमें खुशी होगी। पर आईओ कह रहा है केस बनता नहीं, आप कह रहे हो मेरे ऊपर दबाव है मैं क्या करूं? और वास्तव में उसको जेल भेज देते हैं। एक बार अरेस्ट करने के बाद में फिर ज्यूडिशियरी आप देखते हो हालात, कितने ही लोग हमारे मुख्यमंत्री लेवल के लोग भी डेढ़-डेढ़ साल रह गए जेलों के अंदर इस देश के अंदर।
मंत्री लोग रह के आ गए, दिल्ली के अंदर भी, झारखंड के अंदर भी, आप बताइए इतिहास बना रहे हैं। और वो जब रह के आ गए हैं, उनके बाद में उनका क्या है 20 साल तक कुछ नहीं होगा। एक बार तो डेढ़-दो साल रह गए बेचारे। मुख्यमंत्री स्तर का लेवल का आदमी, मंत्री लेवल के आदमी अगर रह जाएं जेल के अंदर, क्या बचता है बताओ, क्या जिंदगी में बीतती है उनके ऊपर? अरेस्ट करके बिठा दीजिए। अरेस्ट करने केस बनते ही नहीं है, अगर आपकी मर्जी नहीं है, आप अरेस्ट करते ही नहीं हो। आप पीई दर्ज कर देते हो और काम चलता रहता है आपका। ये डेमोक्रेसी में उचित है क्या?
कल की रैली जो हो रही है उसमें मैं फिर आह्वान करना चाहूंगा, नौजवानों से विशेष रूप से, कि अपने खुद के साधन लगाने पड़ें लगाओ। कल की रैली में आपका दिल्ली में होना जरूरी है। एक मैसेज जाएगा कि देश की डेमोक्रेसी को बचाने के लिए आपकी भी भागीदारी कभी रही थी।
और कोई क्वेश्चन? मैं खड़ा हूं।
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