कांग्रेस रैली का विरोध कर भाजपा ने अपना चेहरा दिखाया : डोटासरा

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जयपुर। इण्डिया गठबंधन और कांग्रेस पार्टी द्वारा दिल्ली में वोट बचाओ- देश बचाओ रैली आयोजित की गई, उसका विरोध कर भाजपा ने अपने दोगले चेहरे को जनता के सामने उजागर करने का काम किया है। कांग्रेस पार्टी ने देश में आम आदमी के वोट की रक्षा के लिए देश का लोकतंत्र बचाने हेतु अभियान चलाया है, क्योंकि यदि वोट की ताकत चली गई तो कोई अधिकार शेष नहीं रहता है, इसके विरोध में भाजपा ने लोकतंत्र बचाओ और अराजकता हटाओ अभियान प्रारम्भ किया है, जिसमें सर्वप्रथम भाजपा के नेताओं से प्रश्न है कि कांग्रेस पार्टी द्वारा लोकतंत्र बचाओ-देश बचाओ रैली आयोजित की गई थी तो सभी भाजपा नेताओं ने व्यापारियों के नुकसान होने की बाद कही थी, अब मात्र दो दिन बाद त्यौहार है, छोटी दीपावली 2 दिन बाद है और भाजपा पूरे देश में रैलियां निकाल रही है, बाजार बंद करवाये जा रहे हैं, लोगों को परेशान किया जा रहा है, ट्रैफिक जाम कर व्यापारियों का नुकसान किया जा रहा है, मात्र कांग्रेस को कोसने के लिए यह कृत्य किया जा रहा है, केवल इसलिये कि भाजपा की चोरी पकड़ी गई और उससे बचने के लिए, पर्दा ढकने के लिए भाजपा रैलियां निकाल रही है। उक्त विचार राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने प्रदेश कांग्रेस वार रूम, जयपुर पर मीडिया को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये।
डोटासरा ने कहा कि सत्ता में बैठे लोग अपने गलत कार्यों को छुपाने के लिए, भ्रमित करने हेतु रेलियां निकाल रहे हैं, इससे गलत काम लोकतांत्रिक व्यवस्था में नहीं हो सकता, हास्यापद बात है कि केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव जयपुर में रैली करने आए, रामलीला मैदान में 2000 कुर्सियां लगाई गई, उनमें से आधी खाली रह गई, लोग सुनने नहीं पहुंचे क्योंकि भाजपा को जनसमर्थन नहीं मिल रहा है, जो लोग पहुंचे उन उनमें 500 भाजपा के कार्यकर्ता, 500 पुलिस प्रशासन के लोग और पत्रकार बंधु दिख रहे हैं। शहर के व्यापारी चिल्ला- चिल्ला कर कह रहे हैं कि दीपावली के दो दिन बाद रैली निकाल लेते, क्योंकि रैली के कारण ट्रैफिक डायवर्ट किया हुआ है, ग्राहक नहीं आ पा रहे हैं, बौनी भी नहीं हो रही है, ऐसा नुकसान भाजपा ने किया है, भाजपा की कथनी-करनी में फर्क है, यह झूठ और बेईमान लोग हैं, सत्ता के जोर पर जनता के जनादेश का अपमान करने का कार्य कर रहे हैं, 1 नवम्बर को जो रैली हो रही थी, उसे तो व्यापारियों के नुकसान वाली बता रहे थे, आज जयपुर के परकोटे के अन्दर के मुख्य बाजार बंद कर जो रैली निकाली, उसके लिए व्यापारियों की सहमति की बात कर रहे हैं, इससे बड़ा झूठ हो नहीं सकता।
श्री डोटासरा ने पूछा कि अराजकता हटाने की बात रैली के माध्यम से रख रहे हैं, यह अराजकता कहां से आई है, प्रदेश में भाजपा के कुशासन से हो रही अराजकता क्यों नजर नहीं आती। मुख्यमंत्री के गृह जिले भरतपुर में जहां से गृह राज्यमंत्री भी चुनकर आते हैं, भाजपा के ही नेता पूर्व विधायक की 80-90 लोगों ने नृशंस तरीके से हत्या कर दी, आज तक कुछ नहीं हुआ, क्या यह अराजकता नहीं है। उन्होंने कहा कि जयपुर से विधायक जो भाजपा का है, कह रहा है कि जयपुर की पुलिस जितनी निकम्मी और भ्रष्ट है ऐसी पुलिस पूरे हिंदुस्तान में नहीं है, यह अराजकता की निशानी नहीं है, प्रदेश की राजधानी में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट का सरेआम अपहरण करके ले जाना, यह अराजकता के निशानी है। भाजपा सरकार का ही मंत्री आरोप लगा रहा है कि रोजाना 8 करोड़ की अवैध बजरी खनन प्रदेश में हो रहा है, इन बजरी माफिया को रोकने के लिए जब पुलिस जाती है तो यह पुलिस कर्मियों और अधिकारियों पर गाड़ी चढ़ा कर मार रहे हैं, मारपीट कर रहे हैं, यह अराजकता नजर क्यों नहीं आ रही है। राजस्थान में एसआईआर चल रही थी तब भाजपा के एक बड़े नेता के यहां से मुख्यमंत्री कार्यालय को पेन ड्राइव दिया जाता है और समस्त भाजपा के विधायक और विधायक प्रत्याशी तथा भाजपा नेता कलेक्टर, एसडीएम के पास जाकर फर्जी तरीके से नाम काटने और जुड़वाने के लिए चले जाते हैं, एक-एक आदमी एक-एक क्षेत्र में 20000 से 25000 फॉर्म नाम काटने के लिए दे देता है, क्या यह अराजकता नहीं है। एसआईआर के नाम से देश में 13 करोड़ से ज्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटकर सरकार लूट ली, क्या यह अराजकता नहीं है, अपने वोट की रक्षा करना और संविधान के प्रावधानों की रक्षा करना लोकतंत्र की रक्षा करना कब से अराजकता हो गई, यह जवाब मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री को देना चाहिए। आज प्रदेश में जो हालात बने हैं कि 3 साल से पेपर लीक का नारा भाजपा नेता रलापते रहे हैं, उन्हें जवाब देना चाहिए कि नीट 2026 का पेपर लीक हुआ, 200 से ज्यादा लोग राजस्थान में हिरासत में लिए गए, किंतु यहां पुलिस में प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं कराई गई, इस पेपर लीक में भाजपा के कार्यकर्ता अपराधी के रूप में शामिल रहे, जो फर्जी डॉक्टर बना रहे हैं और केन्द्रीय मंत्री का इस्तीफा हो गया, लेकिन यहां की सरकार जवाब देने से बच रही है, अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। भाजपा के नेता बेवजह लोकसभा में नेता विपक्ष को आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में घसीट रहे हैं, जबकि वह केवल इतना कह रहे हैं कि हमारी बात सुनी जाए, जनता के मुद्दे पर बात सुनी जाए, संविधान द्वारा दी गई बोलने की आजादी को छीन ना जाए, यही उनकी मांग है, क्योंकि सबको अपनी आवाज उठाने, मुद्दे रखने और प्रोटेक्ट करने का अधिकार संविधान से मिला है, इस पर ताला ना लगाया जाए, यही मांग नेता विपक्ष श्री राहुल गांधी ने की है। भाजपा के नेता लोकसभा हमें बोलते नहीं देते, इनकम टैक्स का दुरुपयोग विपक्ष के नेताओं की आवाज दबाने के लिए कर रहे हैं, भाजपा का नेता भ्रष्टाचार करते पकड़ा जाए तो उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती, उसे ईमानदार बताया जाता है, कांग्रेस के आदमी पर आरोप ना हो तो भी ईडी और इनकम टैक्स की कार्रवाई करवा देते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि यह राइजिंग राजस्थान क्या है, मुख्यमंत्री बार-बार कहते हैं कि राजस्थान में 10 से 12 लाख करोड़ का इन्वेस्टमेंट आ गया, जवाब देना चाहिए कि वह कहां है, कितनी नौकरियां मिली, इसकी जानकारी देनी चाहिए, वास्तविकता तो यह है कि केवल चहेते बड़े उद्योगपतियों और नेताओं को कौडिय़ों के दाम जमीन देने का कार्य किया गया है और उनमें सिर्फ तारबंदी जमीन लेने वालों ने कराई ह,ै यदि इस राइजिंग राजस्थान का कच्चा चि_ा खुल गया, अब तक क्या हुआ है इसका रिकॉर्ड यदि सार्वजनिक कर दिया गया, विपक्ष को उपलब्ध करवाया गया तो निश्चित रूप से भाजपा के लोगों से जेल भर जाएगा। आज मुख्यमंत्री निम्न स्तरीय भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं कोई व्यक्ति यदि सही तथ्य सामने रखता है तो उसके ऊपर अनर्गल आरोप लगाना चालू कर देते हैं, डरने की भाषा में बात करते हैं, उन्हें यह समझना होगा कि यह कुर्सियां स्थाई नहीं होती है, पद आते-जाते रहते हैं, कल कोई और था और भविष्य में कोई और आएगा, अनुभव और अकल पद से नहीं मिलते, कहावत है बादाम खाने से अकल नहीं आती ठोकर खाने से आती है, मुख्यमंत्री को यह सोचना चाहिए कि केवल वह इस पद पर बैठ गये इसी से यह मान लिया जाए कि वही अकलमंद है, वह पूर्ण ईमानदार हैं, ऐसा सबको मान लेना चाहिए, यह बात किसी के गले नहीं उतरेगी। मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत के लिए जिस प्रकार की भाषा का उपयोग किया है वह निंदनीय ही नहीं एक अपराध है, इस भाषा से ऐसा प्रतीत होता है कि मुख्यमंत्री अपराध बोध से ग्रसित होकर अपराध से बचने के लिए अपने कृत्यों पर पर्दा डालने के लिए इस तरह के अनर्गल आरोप लगा रहे हैं, उन्हें अपने पद की गरिमा का कम से कम ध्यान रखना चाहिए, हमारे जन्म से पहले यदि किसी ने 6 महीने खाद-बीज की दुकान चलाई तो उनको लेकर आरोप लगाना आज केवल बौखलाहट का परिणाम है, जबकि मुख्यमंत्री खुद को किसान बताते हैं, लेकिन उनके चुनाव में दिए गए हलफनामे में उनके पास मात्र 350 वर्गगज जमीन है, उसका खसरा नंबर दर्ज कर स्वयं को किसान होने का हवाला देना कहां तक उचित है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रदेश में तीन बार मुख्यमंत्री रहे, तीन बार केंद्रीय मंत्री रहे, छ: बार के विधायक, उनके लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना, तू-तड़ाक भाषा का इस्तेमाल करना गलत है, इस तरह की भाषा से मुख्यमंत्री की विचारधारा पर प्रश्रचिन्ह लगता है। कांग्रेस के नेता महात्मा गांधी के अनुयाई हैं, उनकी परम्परा का अनुसरण करते हैं, अहिंसात्मक तरीके से संस्कारी भाषा का इस्तेमाल करते हैं और मुख्यमंत्री नाथूराम गोडसे की विचारधारा को मानने वाले हैं जो उनसे सवाल करें, उनकी नीतियों पर प्रश्न पूछे, वह उसका मुंह बंद करने की सोच के साथ आक्रमण करने का कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री आरपीएससी में मेंबर नियुक्त करने की बात कह रहे हैं, जिस प्रक्रिया से पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने नियुक्ति दी थी, क्या वर्तमान भाजपा सरकार ने कोई नई प्रक्रिया लागू की है, उस प्रक्रिया के अतिरिक्त कोई अन्य प्रक्रिया लागू हुई क्या, यह जवाब अब सरकार और मुख्यमंत्री को देना चाहिए, जो भ्रष्टाचार में लिप्त मिला, वह जेल गया, आज क्या भाजपा तमाम अधिकारी अथवा नियुक्तियां लाई डिटेक्टर टेस्ट करवाकर कर रही है, क्या यदि कोई गलत होगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी होती है। आज सरकार कोई गारंटी दे सकती है क्या उनके द्वारा कोई भी अधिकारी या मनोनीत विधायक या मनोनीत कर्मचारी अपराध नहीं करेगा। आज भी भाजपा से चुना गया विधायक रहा कंवरपाल जेल में है, खुद भाजपा की ही सरकार ने अपने मंत्री श्री किरोड़ी लाल मीणा के विभाग के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है, मुख्यमंत्री किस भाषा में बात करना चाहते हैं, यह समझ से परे है, उनके निकट रिश्तेदार का नाम आ गया, इसी से उन्हें तकलीफ हो गई, जबकि मैं गोविन्द सिंह डोटासरा के बेटे, बहु और रिश्तेदारों का नाम लेकर भाजपा के नेताओं, मंत्रियों, विधायकों ने पिछले 5 साल से अनर्गल बयान बाजी की है, गालियां निकाली है, लेकिन हम केवल एक बात कहते हैं कि डबल इंजन की सरकार जांच कराये और जो बईमान हो उसे जेल में भेजें, रोज अनर्गल बयान बाजी ना करें, यदि शिखर अग्रवाल की मीडिया में कोई बात आई जो मुख्यमंत्री का ACS रहा है, उस पर कोई आरोप लगे हैं, उसके द्वारा किसी कंपनी को लाभ दिया गया है और यदि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कमेटी ने कम्पनी को लाभ दिया है तो शालीनता से जवाब देना चाहिए इस तरह से बौखलाना यह दर्शाता है कि दाल में कुछ काला ही नहीं दाल ही काली है, इसलिए मुख्यमंत्री को इस भाषा में बात करने की आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री बार-बार श्री महेश जोशी का नाम लेते हैं, उन्हें यह बताना चाहिए क्या न्यायालय द्वारा श्री महेश जोशी को अपराधी साबित कर दिया है, केवल आरोप ही तो लगे हैं, क्या भाजपा के प्रदेश के और केन्द्रीय नेता कभी जेल नहीं गए हैं अथवा न्यायालय से छूटकर नहीं आए, मुख्यमंत्री को सोचना चाहिए कि कांग्रेस के कार्यकाल में यदि किसी अधिकारी ने भ्रष्टाचार किया तो वह जेल गया और अब उनके कार्यकाल में जो एंटी करप्शन ब्यूरो रेट डाल रहा है, कार्रवाई कर रहा है, क्या उसका दोष वह स्वयं पर लेंगे। अब मुख्यमंत्री को कांग्रेस पर अनर्गल आरोप लगाना बंद करना चाहिए, उनके कार्यकाल के 3 वर्ष समाप्त हो चुके हैं, मात्र दो ही वर्ष बचे हैं, इसमें अब प्रदेश के लिए कोई कार्य करके दिखाना चाहिए। हालांकि दो वर्ष तक वह मुख्यमंत्री रहे यह भी कोई आवश्यक नहीं है, उन्हें यह भी समझना होगा कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत का सार्वजनिक जीवन बेदाग है और पूरे प्रदेश में उनका हर वर्ग और हर राजनीतिक दल सम्मान करता है, उन पर उंगली कोई नहीं उठा सकता, आज पूरा प्रदेश श्री अशोक गहलोत के साथ खड़ा है, लेकिन मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद उनके साथ कोई खड़ा नहीं दिखेगा। मुख्यमंत्री की शालीन भाषा होनी चाहिए, जब भी कांग्रेस आंदोलन करें तो मुख्यमंत्री पुलिस अधिकारियों को बुलाकर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज करने की बात कहते हैं, कोई मुकदमा ढूंढने की बात कहते हैं, लेकिन उन्हें यह सोचना चाहिए की तीन साल से पद पर बैठे हैं, अब तक आपको कोई मुकदमा नहीं मिला तो क्या सरकार सो रही थी। आज यदि कांग्रेस पार्टी की ओर से गलत नीतियों पर सवाल उठाए जाएं और सरकार के गलत निर्णय का विरोध किया जाए तो अधिकारियों को बुलाकर मुकद्मों फंसाने के निर्देश नहीं देने चाहिए। मुख्यमंत्री को सरकार द्वारा किए गए कार्य और जनता के विकास के लिए यदि कोई योजना बनाई हो तो उसकी बात करनी चाहिए, इस तरह की निम्न स्तरीय भाषा का इस्तेमाल मुख्यमंत्री को नहीं करना चाहिए, क्योंकि अति सर्वत्र वर्जित है कि यदि मुख्यमंत्री अति करेंगे तो उसका नुकसान स्वयं को और उनकी पार्टी को ही उठाना पड़ेगा। यदि कोई वरिष्ठ नेता, ऐसा व्यक्ति जिसने शासन चलाया हुआ है और शासन की जानकारियां रखता है, सरकार की गलत नीतियों की आलोचना करे, जनता के मुद्दों को उठायें, भ्रष्टाचार से जुड़े हुये मुद्दे पर संज्ञान लाकर सवाल-जवाब करें तो मुख्यमंत्री महोदय को धमकाने की भाषा में बात नहीं करनी चाहिए, सरकार जेल में भी डाल दे तो कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि ना तो मुख्यमंत्री का पद और ना ही केन्द्रीय शासन में बैठे भाजपा नेताओं के पद परमानेंट है, यह सब बदलने वाले हैं, सरकार से कांग्रेस की स्पष्ट मांग है कि राइजिंग राजस्थान में कितने करोड़ का निवेश हुआ, कितना पैसा राजस्थान में आया, जो भी खर्च मुख्यमंत्री और मंत्रियों के विदेश यात्राओं पर सरकार ने किया, क्या उसकी भरपाई हुई है, निवेश से कितने लोगों को रोजगार मिला, किस-किस व्यक्ति को जमीन आवंटित की गई, उसकी पूरी जानकारी अब सरकार को सार्वजनिक करनी चाहिये। मुख्यमंत्री को यह समझना होगा कि पूर्व में भी कई लोग मुख्यमंत्री बने और भविष्य में भी बनेंगे, लेकिन इस तरह की भाषा का इस्तेमाल मुख्यमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है, जिस दिन दिल्ली वाले भाजपा नेताओं ने मन बदल दिया तुरन्त कुर्सी चली जाएगी, विपक्ष यदि कोई मुद्दा उठाये तो गरिमा में शब्दों के साथ ही उसका जवाब देना चाहिए, गलत काम है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करना सरकार का अधिकार है, लेकिन हर किसी को डरा-धमका कर उसको चुप करने का प्रयास गलत है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए जिस भाषा का प्रयोग किया गया है उसकी निन्दा करती है और आशा करती है कि जिम्मेदारी के पद पर रहते हुए मुख्यमंत्री गरिमामयी भाषा का इस्तेमाल करेंगे और बिना तथ्य के आरोप-प्रत्यारोप नहीं करेंगे। (प्रेस नोट)

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