हजरत सैय्यद लाल खाँ बाबा का चद्दर का जुलूस निकला

गंगा-जमुनी तहजीब का संगम
जाफर लोहानी
www.daylifenews.in
मनोहरपुर (जयपुर)। कस्बे के दिल में बसा सैय्यद बाबा मार्केट एक बार फिर रूहानियत और भाईचारे के रंगों में रंग रहा है। यहां विराजे हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक, अकीदत के मरकज हजरत सैय्यद लाल खां बाबा रह. ओर हजरत सूफी निजामुद्दीन यूनुसी बिस्मिल कादरी रह. का एक रोजा सालाना उर्स इस बार 10 अक्टूबर, शनिवार को बड़ी अकीदत और एहतराम के साथ मनाया जा रहा है।
हजरत सैय्यद लाल खाँ बाबा उर्स कमेटी के प्रमुख खिदमतगार मोईन खान निजाम कादरी ने बताया कि इस महफिल में सीकर की सरजमीं की महान सूफी हस्ती हजरत सूफी मोइनुद्दीन जिलानी साहब विशेष तौर पर तशरीफ लाए हुए हैं।
उर्स का आगाज 10 अक्टूबर शनिवार सुबह 9 बजे दरगाह में कुरान खानी से हुआ। कुरान खानी की पाक तिलावत के साथ ही मेले में रौनक शुरू हो गईं। दूर-दराज से हिंदू-मुस्लिम जायरीन रंग-बिरंगे परिधानों में सज-धज कर, ढोल-नगाड़ों और नारों के साथ दरगाह पर हाजिरी देने पहुंचें।
आकर्षण का केंद्र – चादर जुलूस
उर्स का सबसे बड़ा आकर्षण शाम को निकलने वाला चादर का जुलूस रहा। परंपरा के अनुसार हजरत करीम शाह बाबा के दरबार से गाजे-बाजे, फूलों और इत्र की खुशबू के साथ चादर का जुलूस उठा, जो कस्बे के प्रमुख बाजारों व सैय्यद बाबा मार्केट होते हुए दरगाह प्रांगण में पहुंचा। वहां अकीदत के साथ चादर पेश की गईं और मन्नतें मांगी गईं।
लंगर-ए-आम और भाईचारे की मिसाल
चादर पेशी के बाद लंगर-ए-आम का आयोजन हुआ, जहां हिंदू-मुस्लिम सभी समुदाय के लोग एक ही दस्तरखान पर बैठकर लंगर ग्रहण किए। यही तो सैय्यद बाबा का पैगाम है – “मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।”
रूह को सुकून दी महफिले शमा
रात 10 बजे के बाद दरगाह प्रांगण में रूहानी महफिले शमा सजी। इसमें राजस्थान की मशहूर कव्वाल पार्टी मोहम्मद इकबाल कादरी ओर साजिद हुसैन कादरी सीकर अपना सूफियाना कलाम से बाबा की मान-मनुहार की। पूरी रात कव्वाली की गूंज से मनोहरपुर की फिजा रूहानी हो गईं। यह रूहानी जश्न 11 अक्टूबर रविवार की सुबह 4 बजे कुल की रस्म के साथ मुकम्मल हुआ।
कमेटी ने की अपील
उर्स कमेटी ने सभी अकीदतमंदों, दुकानदारों और नगरवासियों से अपील की है कि वे उर्स में शामिल होकर इसे कामयाब बनाएं और मनोहरपुर की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल कायम रखें। इससे पूर्व मोहल्ला तोपचिवाड़ा में स्तिथ हजरत करीम शाह बाबा के कव्वाली के संग चद्दर पेश की गई।

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