गोवा की राजनीति में बनते बिगड़ते गठबंधन

लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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देश के छोटे राज्यों में से एक गोवा में विधानसभा के चुनाव अगले साल के शुरुआती महीनों में होने वाले हैं . लेकिन अभी से वहां सियासी हलचल तेज हो गई है। नए गठबंधन सामने आने लगे है तथा कई पुराने गठबंधन बिखर रहे हैं।
इस मामले में आप पार्टी ने पहल की है। उसने गोवा फॉरवर्ड पार्टी के साथ मिलकर “गोवा फर्स्ट” नाम से एक नया गठबंधन बनाया है।
पिछले दिनों आप के राष्ट्रीय संयोजक तथा दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने गोवा में आये थे. उनके साथ दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी भी थी . वे इस समय दिल्ली विधान सभा में विपक्ष की नेता हैं तथा पार्टी के तरफ से गोवा की प्रभारी है . उनके गोवा फॉरवर्ड पार्टी के अध्यक्ष विजय सरदेसाई तथा अन्य नेताओं के साथ लम्बी बात हुई थी जिसमें इन दोनों दलों ने मिलकर एक नया गठबंधन “गोवा फर्स्ट” बनाने का निर्णय किया गया . दोनों दलों के नेताओं ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता में इस नए गठबन्धन की घोषणा की . राज्य विधानसभा की कुल 40 सीटें है . दोनों दल 20 – 20 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे . केजरीवाल ने दावा किया कि उनका यह नया गठबंधन दोनों राष्ट्रीय दल – बीजेपी और कांग्रेस – के विकल्प रूप में सामने आयेगा. उन्होंने कहा कि राज्य में बीजेपी लोकप्रियता बहुत घट गई है तथा इसके विधान सभा के चुनावों में हार निश्चित है . इस समय पंजाब में आप की सरकार है जो 2022 में भारी बहुमत से जीत कर आई थी. उस समय केजरीवाल ने दावा किया था कि गुजरात तथा गोवा में उनकी पार्टी सत्ता में आयेगी . लेकिन उन चुनावों में आप पार्टी को गोवा में केवल दो सीटें तथा गुजरात में 5 सीटें मिलीं थी।
गोवा के पिछले विधानसभा चुनावों में आप पार्टी को 2 सीटें तथा गोवा फॉरवर्ड पार्टी को एक सीट मिली थी। उन चुनावों में इन दोनों दलों ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। इन चुनावों में बीजेपी को 20 सीटें मिलीं थीं। कांग्रेस का आंकड़ा 11 तक सिमिट गया था। राज्य में उस समय लगातार तीसरी बार बीजेपी की सरकार बनी थी।
गोवा की आज़ादी के बाद राज्य कांग्रेस तथा गोमान्तक पार्टी , दो बड़े दल थे। राज्य में अधिकांश समय कांग्रेस की सरकार ही रही। उस समय पार्टी बदलना सामान्य बात हो गई थी। यह खेल दशकों तक चलता रहा. राज्य की राजनीति अस्थिर बनी रही। 2012 में बीजेपी अपने बल पर पहली बार सत्ता में आई तथा युवा मनोहर पारिकर राज्य के मुख्यमंत्री बने।
2022 में बीजेपी को कुल 20 सीटें मिली तथा सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर सामने आई लेकिन स्पष्ट बहुमत से एक सीट कम मिली। लेकिन निर्दलियों के समर्थन से लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में सफल रही . इसके बाद भी में दल बदल का खेल चलता रहा। न केवल निर्दलीय बल्कि कांग्रेस के कई विधायक भी बीजेपी के साथ हो गए . इस समय 40 के सदन में बीजेपी के सदस्यों के संख्या 33 है. केजरीवाल का कहना है कि पार्टी के7 राज्य सभा सदस्यों , जिसमें राघव चड्ढा भी शामिल है, के बीजेपी में चले जाने से पार्टी को बड़ा धक्का लगा था इसलिए अब विधानसभा के उम्मीदवारों का चयन पूरी सावधानी से करेगी . “ठोक बजाकर ही उम्मीदवारों को टिकट दी जायेगी।
पर राजनीति के जानकारों को कहना है जिस समय गोवा में विधानसभा होंगे लगभग उसी समय पंजाब विधानसभा क चुनाव भी है। इसलिए वे चाह कर भी गोवा को अधिक समय नहीं दे पाएंगे। दिल्ली में चुनाव हारने के बाद केजरीवाल अपना अधिक से अधिक समय पंजाब में गुजार रहें हैं। पार्टी और केजरीवाल के लिए इस समय पंजाब के चुनाव गोवा से कही अधिक महत्त्व दे रहे हैं तथा दोबारा पार्टी के जीत का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। आप पार्टी वहां अपने बल पर ही चुनाव लड़ेगी तथा किसी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी।
इस छोटे राज्य में कुल मतदातायों की संख्या लगभग 12 लाख है। राज्य में लोकसभा की दो सीटें है। विधानसभा क्षेत्र इतने छोटे हैं कि औसतन एक विधानसभा क्षेत्र में लगभग 40 हज़ार मतदाता है। इसी प्रकार लोकसभा चुनाव क्षेत्र में मतदातायों की संख्या लगभग 6 लाख है . राज्य का कुल क्षेत्रफल 37 हज़ार वर्ग किलोमीटर है. यह एक तटीय क्षेत्र है तथा राज्य सरकार को सबसे से अधिक राजस्व पर्यटन उद्योग से होती है। यहाँ किसी राज्य से अधिक विदेशी पर्यटक आते हैं तथा लम्बी अवधि तक यहाँ रुकते है। राज्य की राजधानी पणजी, देश सबसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह पिछले कई सालों से स्थाई स्थल है। रमणीक स्थल होने के कारण फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों तथा अन्य धनाढ्य परिवारों ने यहाँ विशाल और सुंदर बंगले बना रखे हैं। (लेखक के अपने विचार है।)

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