कर्नाटक में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर हरी प्रसाद

लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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कर्नाटक में डी.के .शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद रिक्त होना तय था तभी से यह पद पाने के लिए राज्य कांग्रेस के सीनियर नेताओं में रस्साकसी अभी से शुरू हो गई थी। ये सब नेता इस पद के अपने अपने दावे प्रस्तुत कर रहे थे. इस पद के लिए सतीश जारकीहोली और मुन्नियपा का नाम लिया जा रहा था।
कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन का कहना था कि पार्टी के नए अध्यक्ष का नाम तय करने से पूर्व सभी पक्षों का ध्यान रखा जायेगा।
राज्य में विधानसभा चुनाव 2028 के अंत के आस पास होने है, उनका कहना है कि इन चुनावों को सबसे अधिक ध्यान में रखा जायेगा ताकि पार्टी एक बार फिर सत्ता में आ सके। तब पार्टी के भीतर दो बड़े नाम सामने आये है। इनमें एक हथे सतीश जारकीहोली तथा दूसरे थे के. एच. मुनियप्पा। दोनों ही पिछड़ा वर्ग से आते है .उधर नए मुख्यमंत्री शिवकुमार तथा भूतपूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारामिया निश्चित रूप से चाहते थे कि वे इस पद पर ऐसे नेता को बैठाया जाये जो उनके साथ मिलकर चल सके तथा पार्टी में सत्ता का दूसरा केंद्र नहीं बने।
यदयपि इस पद पर कौन विराजमान हो इस पर अंतिम फैसला पार्टी आला कमान ने ही करना था, लेकिन कुछ नेताओं ने सुझाव दिया कि पार्टी के वरिस्ठ नेताओं की एक कमेटी बनाई जाये जो इस पद चुने ज़ाने के लिए उम्मीदवारों का पैनल तैयार करके पार्टी आला कमान को भेजे तथा पार्टी आला कमान इसी पैनेल में से किसी एक को इस पद के लिए चुने। जानकारों का कहना है ऐसी कमिटी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी सिद्धारामिया को थी। पर आला कमान ने इस पद के लिए बी.के हरी प्रसाद के नाम के घोषणा कर दी. वे भी पिछड़ा वर्ग से आते है तथा केंदर में कांग्रेस पार्टी के महासचिव रहे हैं मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देने के बाद सिद्धारामिया ने कहा था कि पार्टी के केंद्रीय नेता चाहते है कि अब उन्हें दिल्ली आकर पार्टी में राष्ट्रीय स्तर काम करना चाहिए। पर उन्होंने साफ कर दिया था कि वे फ़िलहाल राज्य की राजनीति में ही काम करने को तरजीह देंगे। लेकिन बिना विलम्ब के उन्हेर कांग्रेस कार्यसमिति का सदस्य नामजद कर दिया गया।
शिवकुमार को लगभग 6 साल पहले राज्य पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया था। वे गाँधी परिवार के बहुत नजदीक माने जाते है। जब 2023 में राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी तो वे मुख्यमंत्री पद बड़े दावेदार थे। लेकिन पार्टी ने तब सिद्धारामिया को यह पद देने का निर्णय किया। शिव कुमार को उप मुख्यमंत्री का पद मिला तथा उन्होंने उनके पसंद का विभाग भी दिया गया। यह भी कहा गया कि वे 2024 के लोकसभा चुनावों तक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी बने रहेंगे। लेकिन ऐसे नहीं हुआ तथा उनपर कभी भी प्रदेश कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष छोड़ने के दवाब नहीं बनाया गया। उन्होंने राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा के कर्नाटक के हिस्से को सफल बनाने में एक बड़ी भूमिका निभाई थी। तब यह कहा गया था कि राहुल गाँधी की इस यात्रा के चलते ही 2023 में पार्टी सत्ता में आई थी।
सतीश जारकीहोली , राज्य के मराठी बहुल जिले बेलगवी आते से है। उनका सारा परिवार ही राजनीति में हैं। उनके चार और भाई हैं। सब भाई अलग अलग पार्टियों में तथा अलग अलग काल में राज्य विधान सभा के सदस्य रहे है। खुद सतीश जराकीहोली एक समय बीजेपी के साथ रहे तथा 2019 में उन्होंने जनता दल (एस ) तथा कांग्रेस की साझा सरकार को गिराने में बड़ी भूमिका निभाई थी. उनका परिवार को अपने इलाके में शुगर लॉबी का बॉस कहा जाता है क्योंकि वे और उनके भाई कई सहकारी शुगर मिलों के मुखिया है। लेकिन कई बार वे गलत कारणों से अखबारों के सुर्ख़ियों में आते रहे है
मुनियप्पा 7 बार संसद के सदस्य रहे है . वे केंद्र में मंत्री भी रहे है। वे कोलर इलाके से आते है तथा पिछड़ा वर्ग के एक बड़े नेता है।
लेकिन इस पद के दावेदारों ने दिल्ली में डेरा डाल कर अपनी अपने लॉबी शुरू कर दी थी . पार्टी के क्षेत्रों में कहा जा रहा था कि ने अध्यक्ष के चयन के लिए सबसे अधिक शिवकुमार को ही सुना जायेगा जिनका राज्य की राजनीति में दबदबा और बढ़ गया है . वैसे भी बहुत अधिक संपन्न है. उनके पास 1400 करोड़ से भी अधिक संपतियां है . उन्हें पार्टी में ट्रबल शूटर कहा जाता है . देश के किसी भी राज्य में जब सत्तारूढ़ कांग्रेस में संकट आया तो उन्होंने इसे दूर करने में बड़ी भूमिका निभाई . जब कांग्रेस के दिवंगत नेता अहमद पटेल के गुजरात से राज्य सभा के चुनाव जीतने में संकट आया तो उनके समर्थक विधायकों को कई दिन तक शिवकुमार के रिसोर्ट में रखा गया था। (लेखक का अपना अध्ययन एवं अपने विचार है)

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