फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम

‘धोरा री धड़कन’ का पोस्टर विमोचन; राजस्थानी काव्य गोष्ठी में बही काव्य रसधार
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जयपुर। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर एवं सेंटवेव ऑर्गनाइजेशन के संयुक्त तत्वावधान में 28 अक्टूबर को स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम एवं राजस्थानी काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, माँ सरस्वती वंदना और दोहों की प्रस्तुति के साथ हुआ। इस अवसर पर चिकित्सा जागरूकता के साथ राजस्थानी भाषा और साहित्य की मनमोहक छटा देखने को मिली।
कार्यक्रम में डॉ. दिवेश गोयल, वरिष्ठ परामर्शदाता-ऑन्कोलॉजी तथा डॉ. जितेंद्र शर्मा, परामर्शदाता-सर्जिकल ऑन्कोलॉजी (सिर एवं गर्दन) ने रोगों की समय पर पहचान, नियमित स्वास्थ्य जाँच और स्वस्थ जीवनशैली के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।
समारोह का विशेष आकर्षण राजस्थानी भाषा एवं साहित्य को समर्पित ‘धोरा री धड़कन’ के पोस्टर का विमोचन रहा। पोस्टर का विमोचन ऋतु रागिनी एवं सुनीता त्रिपाठी ने उपस्थित जनों के सान्निध्य में किया।
इसके पश्चात राजस्थानी काव्य गोष्ठी का श्रीगणेश वर्तिका जैन जी के सुंदर भावों और विचारपूर्ण काव्य-वाचन से हुआ। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने गोष्ठी को साहित्यिक गरिमा प्रदान करते हुए एक सुंदर वातावरण निर्मित किया। इसके बाद ललिता, भोला, कल्पना, रिया, सरोज, सोनल, आलोक, ऋतु रागिनी, शिवाली गुप्ता, सुनीता त्रिपाठी एवं कृष्णा सहित अन्य रचनाकारों ने अपनी काव्य प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भावविभोर किया।
कवियों की रचनाओं में राजस्थान की माटी की महक, लोकजीवन की सहजता, गौरवशाली परंपराओं और मायड़ भाषा के प्रति गहरा अनुराग मुखर हुआ। कहीं लोकसंस्कृति के रंग झलके, तो कहीं भावनाओं और विचारों ने श्रोताओं के हृदय को स्पर्श किया। एक के बाद एक प्रभावशाली प्रस्तुतियों से राजस्थानी काव्य की रसधार बही और पूरा वातावरण साहित्यिक उल्लास से सराबोर हो उठा।
कार्यक्रम में अविनाश शर्मा, दीपिका शर्मा एवं विजय माल्या सहित साहित्यप्रेमी और चिकित्साकर्मी उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में शिवाली गुप्ता एवं ब्रजेश शर्मा का विशेष सहयोग रहा। वहीं, ऋतु रागिनी एवं सुनीता त्रिपाठी की भूमिका भी उल्लेखनीय रही।
स्वास्थ्य जागरूकता और साहित्यिक अभिव्यक्ति का यह आयोजन राजस्थानी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और सम्मान का संदेश देते हुए यादगार बना। ‘धोरा री धड़कन’ के पोस्टर विमोचन और काव्य गोष्ठी ने मायड़ भाषा के प्रति प्रेम एवं सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान की।

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