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नई दिल्ली। हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट में, अनिल अग्रवाल, चेयरमैन, वेदांता ग्रुप ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के खनिज और हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आयात निर्भरता कम करने, देश की विशाल भू-वैज्ञानिक क्षमता को उजागर करने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के लिए “भूमिगत क्रांति” का आह्वान किया।
हमें क्रांतिकारी सोच अपनानी होगी और दुनिया को दिखाना होगा कि हम पुरानी मानसिकता छोड़ रहे हैं, जैसे कि अभी खदानों के लिए 50 साल की फिक्स्ड लीज होती है। दुनिया के बाकी देशों की तरह भारत में भी यह ‘ लाइफ़ ऑफ माइन ‘ (जब तक खदान में संसाधन हैं) तक के लिए होनी चाहिए। आज हमारा 50% आयात इन्हीं ज़मीन के नीचे वाले संसाधनों का है। यह हमारी गाढ़ी कमाई का पैसा है जो दूसरे देशों में नौकरियाँ पैदा कर रहा है। क्यों न इस पैसे का इस्तेमाल हम अपने देश के विकास के लिए करें? आइए, हम सब इस काम के लिए ‘ मिशन मोड ‘ में एक साथ आएं, क्योंकि ज़मीन के नीचे की यह क्रांति हमारे देश की तस्वीर बदल देगी।