करुर हादसे में मृतकों के परिवार जनों को नौकरियां

लेखक : लोकपाल सेठी
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तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले एक ऐसा हादसा हुआ था जिससे राजनीतिक हलकों में कहा जाने लगा था कि अभिनेता से नेता बने सी. जोसफ विजय और उनकी लगभग दो साल पुरानी टी.वी.के.पार्टी को ऐसा झटका लगा है कि उसका सत्ता में आने का सपना पूरा नहीं होगा।
अपने चुनावी अभियान के अंतर्गत जोसफ विजय 27 सितम्बर 2025 को करुर जिले के वेलुसामी स्थान पर एक चुनावी सभा को संबोधित करने वाले थे। इसके लिए प्रशासन तथा पुलिस से अनुमति ले ली गयी थी। जिस स्थान पर सभा होनी थी वह शहर के बीचों बीच स्थित है। इस मैदान में लगभग पांच हज़ार लोग ही समा सकते थे। लेकिन विजय की सभा में भाग लेने के लिए पचास हज़ार से भी अधिक लोग पहुँच गए। पुलिस की संख्या कोई खास अधिक नहीं थी। विजय के वहाँ पहुँचाने से पहले ही सभा स्थल पर भगदड़ मच गई जिसमें 41 लोगों की मृत्यु हो गई तथा सौ से अधिक लोग घायल हो गए। वहां भगदड़ की सूचना मिलने के बाद विजय सभा स्थल पर आये बिना ही लौट गए। वे उस अस्पताल में भी नहीं गए जहाँ घायलों का इलाज हो रहा था . उनके समर्थकों सहित आम व्यक्ति को भी यह अपेक्षा थी कि वे मृतकों तथा घायलों को मिलेंगे तथा उनके परिवारों को सांत्वना देंगे . उनके नज़दीकी कुछ लोगों को यह आशंका थी कि अगर वे वहां गए तो उनके खिलाफ बड़े प्रदर्शन होंगे , यहाँ तक कि उनको इस इलाके घुसने तक नहीं दिया जायेगा। इसके चलते कुछ दिनों बाद विजय ने मृतकों तथा घायल लोगों के चेन्नई बुलाकर उनसे सुहानुभूति व्यक्त की, कुछ परिवारों की आर्थिक सहायता भी की।
लेकिन इन सबसे आम मतदाता उनसे खुश नहीं था . चुनावों के दौरान टी .वी. के. पार्टी के इस अध्यक्ष ने राज्य के हर जिले में सभाएं की लेकिन इस जिले में नहीं गए . इन सबके चलते यह धारणा बन गई थी कि विधानसभा के 234 सीटों में से इस पार्टी को 20-25 से अधिक सीटें नहीं मिलेगी. लेकिन सभी चुनावी सर्वेक्षणों को धत्ता बताते हुए जोसफ विजय को पार्टी को पूर्ण बहुमत तो नहीं मिला , लेकिन 108 सीटों पर जीत से यह नई पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई। कुछ ही दोनों में कांग्रेस तथा कुछ अन्य छोटे दलों के समर्थन से वे सरकार बनाने में सफल रहे। राज्यपाल के निदेश के अनुसार वी विधानसभा के सदन में अपना बहुमत साबित करने में सफल रहे। ऐसा माना जाता है कि पद सँभालने के कुछ दिनों बाद ही करूर जा कर नौ महीने पहले हुए इस हादसे से प्रभावित हुए परिवार जनों को मिलने जाना चाहते थे। लेकिन कुछ प्रशासनिक कारणों से उनका कार्यक्रम टालता चला। आखिर जून महीने के आखरी दिनों में उन्होंने यह घोषणा कि वे वहाँ जुलाई के शुरू में एक दिन के लिए वहां जायेंगे, उनके वहां जाने के कार्यक्रम को प्रमुख विपक्षी दल द्रमुक ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसके चलते मुख्यमंत्री जोसफ विजय ने वहां जाने का कार्यक्रम तब तक के लिये टाल दिया जब तक सुप्रीम कोर्ट द्रमुक की याचिका पर फैसला नहीं सुनाता। सुप्रीम कोर्ट ने जल्दी ही द्रमुक की याचिका को ख़ारिज कर दिया. कोर्ट का कहना था कि मुख्यमंत्री के रूप जोसफ विजय को राज्य के किसी भाग में जाने का अधिकार है। कोर्ट ने द्रमुक की याचिका को ख़ारिज करते हुए यह टिप्पणी की कि इस तरह के राजनीतिक उद्देश्य के चलते याचिकाएं दाखिल करके कोर्ट को समय बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर मुख्यमंत्री का करूर जाने का कार्यक्रम तय किया गया। सरकार की और से यह घोषणा की गई कि मृतकों केपरिवारों के सदस्य को नौकरी दी जायेगी। उन परिवारों से संपर्क करके यह सुनिश्चित किया गया कि उनमें ससे नौकरी के पात्र है कौन कौन है। आखिर 37 परिवारों के सदस्य को नौकरी दिया जाना तय किया गया। बाकि 4 परिवारों को इसमें नहीं शामिल किया गया जो इस हादसे के चलते नौकरी की पात्रता नहीं रखते थे। जोसफ विजय ने जिला प्रशासन को निदेश दिया कि इन 37 परिवारों और उनके सदस्यों को सरकारी खर्च पर जिला मुख्यालय लाया जाये। जिला मुख्यालय में एक समारोह किया गया जिसमें मुख्यंमत्री जोसफ विजय ने इन परिवारों के पात्र सदस्यों को नियुक्ति पत्र दिये। उन्होंने इन परिवारों को आश्वासन दिया कि भविष्य में भी उनकी हर प्रकार से सहायता दी। उन्होंने यह घोषणा भी कि की मृतकों की याद में उनकी पार्टी की ओर से एक स्मारक बनया जायेगा। इस समारोह के लिए कड़ी सुरक्षा की व्यवस्था गई थी ताकि मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई प्रदर्शन किया गया तो तो प्रदर्शनकारी जिला मुख्यालय तक नहीं पहुच सकें, समारोह में पांच हज़ार से अधिक लोग भाग लेने नहीं आने चाहियें। इसके लिए पास जारी किये गये थे ताकि समारोह स्थल पर जाने से पहले उनकी कड़ी जाँच की जा सके। (लेखक के अपने विचार हैं)

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