ख्वाज़ा गरीब नवाज के कांग्रेसी नेता नदीम पठान कि हुई दस्ताबंदी

जाफर लोहानी
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आंधी (जयपुर)। ग्राम आंधी कस्बे के कांग्रेसी नेता नदीम पठान ने कहा कि दरगाह सिर्फ दुआ की जगह नहीं, दवा की जगह भी है। यहां दस्तार उनको मिलती है जो मजहब से ऊपर उठकर इंसानियत की बात करते हैं। नदीम पठान की दस्ताबंदी युवाओं के लिए पैगाम है: नाम कमाना है तो गरीब की दुआ कमाओ, ख्वाजा की पगड़ी खुद चलकर आएगी।” यह शब्द पठान ने अजमेर मे स्तिथ हजरत ख्वाजा ग़रीब नवाज़ के दर पर ख़ादिम के दस्ताबंदी करने के बाद मे कहे। नदीम पठान ने कहा कि “ये पगड़ी मेरी नहीं, उन सब की है जो बगैर नाम के खिदमत करते हैं। गरीब नवाज के दर पर मैं बब्बर शेर नहीं, सब गुलाम हैं। ख्वाजा ने मुझे चुना, अब जिंदगी भर कौम और मुल्क की खिदमत करूंगा। आंधी आए या तूफान, ख्वाजा का खिदमतगार पीछे नहीं हटेगा।”
क्या है दस्ताबंदी:
दरगाह शरीफ में दस्तारबंदी एक आध्यात्मिक सम्मान है। जब कोई शख्स खिदमत, इंसानियत और कौम की सेवा में मिसाल बनता है, तो दरगाह के खादिम उसे दस्तार बांधकर ‘खादिम-ए-ख्वाजा’ का दर्जा देते हैं। ये पगड़ी सिर्फ कपड़ा नहीं, जिम्मेदारी है।
कौन हैं नदीम पठान:
कांग्रेस के नेता व आंधी के बब्बर शेर’ के नाम से पहचाने जाते हैं।
वजह:
तूफान, बाढ़ या किसी भी आपदा में सबसे पहले मदद को नदीम पठान ही पहुंचते हैं। गरीब नवाज के लंगर में सेवा, यतीम बच्चों की पढ़ाई और मरीजों की मदद के लिए जाने जाते हैं।
खादिम का पैगाम:
दस्ताबंदी करने वाले खादिम ने कहा: “नदीम पठान ने साबित किया है कि ख्वाजा का सच्चा मुरीद वो है जो इंसानियत की खिदमत करे। ये दस्तार गरीब नवाज की तरफ से इनाम है। अब इनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है।”
इस अवसर पर पठान के साथ मे आए हुए करणी सेना के राष्ट्रीय महासचिव लक्ष्मण सिँह राजावत व ताला के इशाक खान आदि की भी दस्ताबंदी की गईं
इसके बाद मे भारत देश की खुशहाली की दुआएं की गईं।

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