
सुरेश बागड़ी की रिपोर्ट
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मण्डावर (दौसा)। मण्डावर क्षेत्र में शनिवार शाम आए तेज अंधड़ और तूफान ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। शाम करीब सात बजे चली तेज आंधी से टीन-टप्पर उड़ गए तथा सैकड़ों पेड़-पौधे धराशायी हो गए। इसी दौरान नगर पालिका मण्डावर क्षेत्र के बलाई मोहल्ला स्थित श्मशान घाट के पास दो बड़े बबूल के पेड़ टूटकर मण्डावर-बनावड़ सड़क मार्ग पर गिर गए, जिससे मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया और रातभर यातायात प्रभावित रहा।
स्थानीय लोगों ने तत्काल इसकी सूचना नगर पालिका प्रशासन को दी। लोगों के अनुसार नगर पालिका अधिशासी अधिकारी को भी मामले से अवगत कराया गया, जिस पर जल्द ही जेसीबी मशीन भेजकर रास्ता खुलवाने का आश्वासन दिया गया। हालांकि रातभर सड़क पर गिरे पेड़ों को हटाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। परिणामस्वरूप मण्डावर-बनावड़ मार्ग पूरी तरह बंद रहा और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मार्ग बंद होने से दोपहिया वाहन चालक खेतों और कच्चे रास्तों से होकर वैकल्पिक मार्ग तलाशते रहे, जबकि चारपहिया वाहन चालकों को वापस लौटना पड़ा। कई यात्रियों को करीब 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर मण्डावर-कोट मार्ग से होकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क बंद होने के बावजूद न तो नगर पालिका, न ही सार्वजनिक निर्माण विभाग और न ही प्रशासन की ओर से किसी प्रकार का चेतावनी बोर्ड या सुरक्षा व्यवस्था की गई।
रात के अंधेरे में सड़क पर पड़े पेड़ कई वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का कारण भी बने। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ दोपहिया वाहन चालक टूटे हुए पेड़ों से टकराकर घायल भी हुए। मार्ग बंद होने से मण्डावर से ऐदलपुर, तांता का बास, बनावड़, हाड़ौली, नांगल मेव सहित दर्जनों गांवों के लोगों को पूरी रात परेशानियों का सामना करना पड़ा।
राहगीरों की परेशानी को देखते हुए पूर्व विधायक ओमप्रकाश हुड़ला देर रात करीब एक बजे सोशल मीडिया पर लाइव आए और नगर पालिका प्रशासन, जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब संबंधित अधिकारियों को समय रहते सूचना दे दी गई थी, तब भी सड़क से पेड़ नहीं हटाए जाना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
स्थिति यह रही कि रविवार सुबह आठ बजे तक भी सड़क पर पड़े पेड़ नहीं हटाए गए। आखिरकार परेशान राहगीरों और स्थानीय लोगों ने स्वयं पहल करते हुए कुल्हाड़ियों से पेड़ों की टहनियां काटीं और करीब साढ़े आठ बजे मार्ग को आंशिक रूप से सुचारु कराया। इसके बाद ही वाहनों की आवाजाही शुरू हो सकी।
घटना के बाद नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सफाई, कचरा निष्पादन और आपदा जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए विभिन्न मदों में लाखों रुपये के ठेके दिए जाते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर व्यवस्थाएं धरातल पर दिखाई नहीं देतीं। लेकिन ऐसी आपदा आने पर संविदाको से नगर पालिका अधिकारियों की सांठ गांठ की पोल खुलती है। शहर के लोग जनता को दे रहे सुविधाओं की बात करने वाले जनप्रतिनिधियों एवं नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर जमकर कोस रहे हैं।