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जयपुर। सीकर के करीब 40% सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील का राशन खत्म हो गया है। जुलाई के बाद न खाद्यान्न मिला, न राशि, और बच्चों का दूध भी सितंबर के बाद बंद है। शिक्षक और भामाशाह अपनी जेब से बच्चों का पेट भर रहे हैं।
यह बात पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने एक्स पोस्ट पर लिखते हुए आगे लिखे कि रसोइयों को 8 महीने से मानदेय नहीं मिला, और उनमें कई विधवा और तलाकशुदा महिलाएं हैं। भाजपा सरकार को बच्चों की थाली और रसोइयों के घर चलाने की कोई परवाह नहीं है, उसे सिर्फ अपनी सरकार का थोथा प्रचार करना है।
उन्होंने आगे लिखा मुख्यमंत्री जी जवाब दें: विज्ञापनों के लिए पैसा है, पर बच्चों के निवाले और रसोइयों के मानदेय के लिए क्यों नहीं?
https://x.com/ashokgehlot51/status/2110268112402845871