सीमा-पार पारिवारिक विवादों पर राष्ट्रीय कार्यशाला एवं सम्मान समारोह

विश्व के सबसे बड़े प्रवासी भारतीय समुदाय की चुनौतियों पर राष्ट्रीय मंथन
दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण • 71 शिक्षाविद्, साहित्यकार एवं समाजसेवी ‘ग्लोबल प्राइड अचीवर्स अवार्ड–2026’ से सम्मानित • प्रवासी भारतीयों के अधिकारों की सुरक्षा हेतु विधिक एवं नीतिगत सुधारों पर राष्ट्रीय सहमति
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तिरुवनंतपुरम (केरल)। विश्वभर में बसे भारतीय मूल के करोड़ों लोगों के समक्ष उभर रही सीमा-पार पारिवारिक, सामाजिक एवं कानूनी चुनौतियों पर गंभीर राष्ट्रीय विमर्श का ऐतिहासिक मंच केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में साकार हुआ। गोपाल किरण समाजसेवी संस्था (GKSSS) द्वारा एसआरएम विश्वविद्यालय, दिल्ली-एनसीआर, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट (IIMAD), गुलाटी इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंस एंड टैक्सेशन (GIFT) तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली के संयुक्त सहयोग से GIFT परिसर में 22वीं राष्ट्रीय एक दिवसीय कार्यशाला एवं राष्ट्रीय सम्मान समारोह का अत्यंत भव्य, गरिमामय एवं ऐतिहासिक आयोजन सम्पन्न हुआ।
“प्रवासी भारतीयों के सीमा-पार पारिवारिक विवाद : चुनौतियाँ, समाधान एवं विधिक सुधार” विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, न्यायविदों, विधि विशेषज्ञों, वरिष्ठ शोधकर्ताओं, साहित्यकारों, समाजसेवियों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं नीति-निर्माताओं ने सहभागिता करते हुए प्रवासी भारतीय परिवारों से जुड़े जटिल कानूनी, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक एवं नीतिगत प्रश्नों पर गहन चिंतन-मंथन किया तथा व्यवहारिक एवं दूरदर्शी समाधान प्रस्तुत किए।

भारत आज विश्व का सबसे बड़ा प्रवासी भारतीय समुदाय वाला देश है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार विश्व के लगभग 3.5 करोड़ से अधिक भारतीय मूल के लोग अनेक देशों में निवास कर रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, सऊदी अरब, ऑस्ट्रेलिया, कतर, कुवैत, मलेशिया एवं सिंगापुर सहित अनेक देशों में भारतीय समुदाय की उल्लेखनीय उपस्थिति है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रवासन, अंतरराष्ट्रीय विवाह, रोजगार एवं शिक्षा के अवसरों के साथ सीमा-पार वैवाहिक विवाद, बाल अभिरक्षा, संपत्ति विवाद, घरेलू हिंसा, दोहरी नागरिकता, न्यायिक अधिकार-क्षेत्र तथा पारिवारिक संरक्षण जैसी समस्याएँ निरंतर जटिल होती जा रही हैं। इन्हीं समकालीन चुनौतियों पर नीति-आधारित राष्ट्रीय संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. (डॉ.) संदीप कुलश्रेष्ठ द्वारा ICSSR के मेजर रिसर्च प्रोजेक्ट के विस्तृत परिचय से हुआ। इसके उपरांत गोपाल किरण समाजसेवी संस्था की वर्ष 1985 से शिक्षा, साहित्य, सामाजिक न्याय, महिला एवं बाल अधिकार, मानवाधिकार, शोध तथा जनसेवा के क्षेत्र में चार दशकों से अधिक समय से की जा रही उल्लेखनीय सेवाओं का परिचय प्रस्तुत किया गया।

IIMAD के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) एस. इरुदया राजन ने वैश्विक प्रवासन से भारतीय परिवारों की बदलती सामाजिक संरचना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रवासी भारतीयों की समस्याओं के समाधान हेतु शोध-आधारित नीति निर्माण, विश्वसनीय आँकड़ों तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सशक्त बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए GIFT के निदेशक प्रो. (डॉ.) के. जे. जोसफ ने कहा कि प्रवासी भारतीयों के पारिवारिक विवाद केवल कानूनी विषय नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक, सांस्कृतिक, भावनात्मक एवं मानवीय संवेदनाओं से जुड़े गंभीर प्रश्न हैं। इनके समाधान के लिए सरकार, विश्वविद्यालयों, न्यायपालिका एवं सामाजिक संस्थाओं के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है।
गोपाल किरण समाजसेवी संस्था के अध्यक्ष श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि भारत विश्व के सबसे बड़े प्रवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए प्रवासी भारतीय परिवारों की समस्याएँ केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एवं वैश्विक महत्व का विषय हैं। उन्होंने सीमा-पार पारिवारिक विवादों के त्वरित निस्तारण, महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, प्रभावी कानूनी सहायता तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर आधारित समन्वित राष्ट्रीय नीति विकसित करने पर बल दिया।

कार्यशाला के अंतर्गत पाँच तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता शांति कुमार सयाल ने की, जिसमें प्रवासी भारतीय परिवारों में बढ़ते विखंडन, तलाक एवं अलगाव के सामाजिक तथा मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर चर्चा हुई। द्वितीय सत्र में महिलाओं, बच्चों एवं वरिष्ठ नागरिकों पर दीर्घकालीन पारिवारिक अलगाव के प्रभावों का विश्लेषण किया गया। तृतीय सत्र में प्रो. (डॉ.) संदीप कुलश्रेष्ठ ने निजी अंतरराष्ट्रीय विधि, सीमा-पार पारिवारिक विवादों तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्थाओं पर विस्तार से जानकारी दी। चतुर्थ सत्र में अंतरराष्ट्रीय विवाह, बाल अभिरक्षा एवं अभिभावकीय अपहरण जैसे संवेदनशील विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। पंचम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) जय कुमार, निदेशक, केरल विश्वविद्यालय ने की, जिसमें OCI, दोहरी नागरिकता तथा निजी अंतरराष्ट्रीय विधि के भविष्य पर गंभीर विमर्श हुआ।
इस अवसर पर डॉ. जे. नागराजन ने कहा कि प्रवासी भारतीयों की समस्याओं को वैश्विक दृष्टिकोण से समझना होगा। रत्ना तिवारी ने प्रवासी परिवारों में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं न्याय तक उनकी सहज पहुँच सुनिश्चित करने पर बल दिया, जबकि डॉ. संजीव कुमार मिश्रा ने सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों तथा भविष्य में आवश्यक नीतिगत सुधारों पर अपने विचार व्यक्त किए।

राउंड टेबल कंसल्टेशन में शांति अय्यर, प्रो. (डॉ.) संदीप कुलश्रेष्ठ तथा डॉ. प्रियंका दत्ता ने शोध निष्कर्षों, हितधारकों के सुझावों एवं नीतिगत सुधारों पर विस्तृत विचार-विमर्श का संचालन किया। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव एवं सुझाव साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार विनय कुमार करुण (सजग) की चर्चित कृति “हरवाही : मजबूरी या दंश” सहित दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का गरिमामय लोकार्पण किया गया। विद्वानों ने इन पुस्तकों को समाज, शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान बताया।
राष्ट्रीय सम्मान समारोह का शुभारंभ भारतीय संस्कृति की मातृशक्ति सम्मान परंपरा के अनुरूप अत्यंत भावपूर्ण वातावरण में हुआ। सर्वप्रथम श्रीमती जे. भुवनेश्वरी जीयाराम अम्मा, जो डॉ. जे. नागराजन की पूज्य माताजी हैं, को शॉल, मेडल एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। आयोजकों ने उन्हें भारतीय संस्कार, त्याग, मातृत्व एवं प्रेरणा की सजीव प्रतिमूर्ति बताते हुए सम्मान अर्पित किया। पूरा सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
इसके पश्चात शिक्षा, साहित्य, शोध, समाजसेवा, संस्कृति, महिला सशक्तिकरण एवं जनसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 71 विशिष्ट शिक्षाविदों, साहित्यकारों एवं समाजसेवियों को “ग्लोबल प्राइड अचीवर्स अवार्ड–2026” से सम्मानित किया गया।

सम्मानित विभूतियों में तमिलनाडु से रत्ना तिवारी, डॉ. एम. शीबा, डॉ. सुशीला पी., डॉ. बी. मल्लिका, डॉ. जे. नागराजन, शांति अय्यर, सशिकला ए. दवे, तुलिका दास एवं जे. अशोक कुमार जैन; केरल से डॉ. एस. लीलाकुमारी अम्मा, लेफ्टिनेंट (डॉ.) शबाना हबीब, डॉ. आनंदकृष्णन एडाचेरी, डॉ. आर. सुरेंद्रन (ए.आर.एस.यू.), डॉ. आशा जी., डॉ. गणेश एम., डॉ. सजीना पी. एस., के. अंबुजाक्षन एवं डॉ. शालिनी सी.; दिल्ली से डॉ. नेहा साहू, श्री शीतल प्रसाद, डॉ. प्रियंका मिश्रा एवं डॉ. संजीव कुमार मिश्रा; अरुणाचल प्रदेश से कागो माडो; बिहार से नीता सहाय, डॉ. सुधांशु कुमार चक्रवर्ती एवं डॉ. स्वेता शरण; छत्तीसगढ़ से मेघकरण मार्कण्डेय, दुर्गेश संजय किशोर, डॉ. कुबेर सिंह गुरुपंच, डॉ. पिंकी गौर, डॉ. रश्मिलता मिश्रा, चुम्मन दास मनहर, डॉ. पूर्णिमा सरोज, मणिप्रभा त्रिपाठी, डॉ. श्याम लाल निराला, डॉ. जी. सी. भारद्वाज एवं मिस लीला माणिक; गुजरात से प्रो. डॉ. देवाकर एस. दिनेश गौर; हिमाचल प्रदेश से सरोज शर्मा; झारखंड से डॉ. प्रेम प्रकाश, डॉ. पूनम कुमारी एवं डॉ. ममता कुमारी; कर्नाटक से डॉ. रश्मि बी. वी.; मध्य प्रदेश से डॉ. दीपक अहिरवार, रिंकू डाबाद, डॉ. उमा शर्मा, शिशिर देसाई एवं डॉ. अखिल कुमार दुबे; महाराष्ट्र से डॉ. अनीता संजय चिखलीकर, संतोष अर्जुन कदम, डॉ. विपुल शिवाजी घेमुड, डॉ. ज्योति जलिंदर किरवे, वर्षा मारुति भिसे, डॉ. अबुल हसीब एफ. ए. सिद्दीकी, रेखा लहू कराड एवं डॉ. कोलेकर शिवाजी श्रीमंत; मेघालय से प्रो. पार्थ सारथी पाण्डेय; ओडिशा से आकांक्षा चाछरा; तेलंगाना से प्रो. जी. मैरी सुनंदा; उत्तर प्रदेश से दिव्यांशु, प्रिया वर्मा, रागिनी जैन, डॉ. कृष्ण कुमार, अरुण कुमार प्रजापति, कमला सिंह, शांति कुमार सयाल, विनय कुमार करुण (सजग) एवं डॉ. वंदना यादव तथा उत्तराखंड से डॉ. रमेश राम को सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त उर्मिला पोरवाल सहित अन्य विशिष्ट सामाजिक विभूतियों को भी विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉ. प्रियंका दत्ता ने किया। सभी मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों का बैज एवं सम्मान-पटका पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया। संस्था के अध्यक्ष श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने सभी प्रतिभागियों एवं सम्मानित विभूतियों का सम्मान-पटका पहनाकर अभिनंदन किया।
समारोह के अंत में आयोजकों ने सभी मुख्य अतिथियों, विशेषज्ञों, वक्ताओं, शोधकर्ताओं, प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए घोषणा की कि आगामी राष्ट्रीय कार्यशाला एवं राष्ट्रीय सम्मान समारोह का आयोजन हैदराबाद (तेलंगाना) तथा शिलांग (मेघालय) में किया जाएगा।
यह आयोजन केवल एक राष्ट्रीय कार्यशाला नहीं, बल्कि विश्वभर में बसे करोड़ों प्रवासी भारतीयों के पारिवारिक अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा, न्याय, मानवीय गरिमा तथा प्रभावी विधिक एवं नीतिगत सुधारों की दिशा में एक ऐतिहासिक, दूरदर्शी और प्रेरणादायी राष्ट्रीय पहल के रूप में स्थापित हुआ। (प्रेस नोट)

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