किससे किसकी रक्षा ?

लेखक : रमेश जोशी
प्रधान सम्पादक, ‘विश्वा’, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, यू.एस.ए.
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आज तो तोताराम वह सब कुछ हो-हवाकर आया जो कुछ बनने का स्वप्न भारत को दिखाया जा रहा है और अब तक जिसे मुसलमानों और कांग्रेस ने रोक रखा था। और तो और अपनी मृत्यु के 78 साल बाद तक गाँधी और 62 साल बाद भी नेहरू जिसे साकार होने नहीं दे रहे हैं ।
आते ही शुरू हो गया । और वातावरण जग्गी वासुदेव की ‘शिव के साथ एक रात्रि’ की तरह धांसू हो उठा ।
सोमलिङ्गं नरो दृष्ट्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।
लभते फलं मनोवाञ्छितं मृतः स्वर्गं समाश्रयेत्॥
जो मनुष्य ज्योतिर्लिंगों में प्रथम सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है। उसे मनचाहा फल प्राप्त होता है और मृत्यु के बाद वह स्वर्ग को प्राप्त होता है।
इसलिए हे पापात्मा मास्टर, तू भी सोमनाथ लिंग के दर्शन करके अपने पापों का प्रक्षालन कर और मृत्यु के बाद स्वर्ग को प्राप्त हो ।
हमने कहा- यह किसका प्रोजेक्ट है ?
बोला- ऐसे प्रोजेक्ट मोदी जी के अलावा और किसके हो सकते हैं ? कौन है जो इस लोक से बेखबर, दिन में 20-20 घंटे बिना विश्राम किए देश दुनिया और हिंदुओं का परलोक सुधारने के लिए पिला पड़ा है । वैसे गुजरात में सोमनाथ मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मोदी जी जो एक बड़ा भव्य आयोजन करवा रहे हैं, अपने राजस्थान में इस प्रोजेक्ट के प्रचारक, एजेंट या प्रतिनिधि मुख्यमंत्री भजनलाल हैं जो स्कूलों की बिल्डिंगें संभालने से पहले राजस्थान के करदाताओं का पैसा खर्च करके दिल खोलकर खुले हाथ से विज्ञापन छपवा रहे हैं । भजनलाल जी ने ही यह श्लोक अपने विज्ञापन में छपवाया है और साथ ही नीचे भुगतान के लिए एक क्यू आर कोड भी दिया है । हाँ, यह स्पष्ट नहीं किया है कि कितने पैसे देने पर कितने दिन के लिए किस श्रेणी का स्वर्ग मिलेगा ।
हमने कहा- जब भजन लाल जी शाखा तो दूर, स्कूल में जाना भी शुरू नहीं हुए थे तब हमने 1971 में पोरबंदर के बिरला स्कूल में पढ़ाते हुए सोमनाथ के दर्शन कर लिए थे । अब जो कुछ होना होगा वह उसी के पुण्य प्रताप से हो जाएगा । रो रोकर दिए गए 2 परसेंट डी ए में से सोमनाथ जाने या कोई दान-दक्षिण देने का प्रावधान नहीं बनता ।
हम कोई कहीं के मुख्यमंत्री, मंत्री तो हैं नहीं जो अपनी मुख्य ड्यूटी छोड़कर सरकारी खर्च पर मुफ़्त में इस उस तीर्थ को अपवित्र करते और पाप धोते फिरें ।
बोला- फिर भी कुछ न कुछ तो करना ही चाहिए ।और आज तेरी शादी को 67 साल हो रहे हैं इसी उपलक्ष्य में कुछ हो जाए ।
हमने कहा- 1 अप्रैल को मोदी जी की शादी को भी 58 साल हो गए थे । उनको तो तूने न बधाई दी और न ही रिटायर्ड लोगों पर कुछ कृपा करने की सलाह कि अबकी डी ए चार की बजाय छह परसेंट कर दें । जबकि लक्षणों और संयोगों को देखते हुए वे निश्चित रूप से बुद्ध के अवतार सिद्ध होते हैं । उनकी जन्म पत्री देखकर ज्योतिषियों ने बताया था कि या तो यह बालक महान सन्यासी बनेगा या फिर चक्रवर्ती सम्राट । उनके वैराग्य के लक्षण देखकर माता पिता ने सिद्धार्थ की तरह उनकी जल्दी शादी कर दी और संयोग देख सिद्धार्थ की पत्नी का नाम यशोधरा और इनकी पत्नी का नाम जसोदा ।
बोला- यह बात तो सच है । मोदी जी एक साथ ही चक्रवर्ती सम्राट है और एक फकीर भी । देखा नहीं, कैसे धर्म और विरासत की रक्षा के लिए भागे भागे फिर रहे हैं। अगर कुछ नहीं करेंगे तो हो सकता है ये मुसलमान, ईसाई और कांग्रेसी फिर से सोमनाथ के मंदिर को फिर तोड़ न डालें । इसलिए घूम घूमकर हिंदुत्व की विरासत की रक्षा करना बहुत जरूरी है ।
हमने कहा- ये सब झूठ और कुप्रचार है और दूसरों के हर कार्य का श्रेय लेने की कुटिल चालाकी है । मोदी जी के जन्म से पहले देश के गृहमंत्री कांग्रेसी सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की योजना को अंतिम रूप दिया था और 8 मई 1950 को काम की शुरूआत हो गई थी । जब मोदी जी एक साल के भी नहीं थे तक कांग्रेस के बड़े नेता राजेन्द्र बाबू इसकी प्राण प्रतिष्ठा में शामिल हुए थे ।
अब या तो तू जाने या भजनलाल जी या फिर मोदी जी जानें कि वे किस विरासत की किससे रक्षा कर रहे हैं ।
(लेखक के अपने विचार हैं)

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