पर्यटन व पुरातत्व विभाग की लापरवाही से परिणाम नहीं निकला सकारात्मक

शैलेश माथुर की रिपोर्ट
www.daylifenews.in
सांभरझील। केंद्र व राज्य सरकार की तरफ से सांभर के प्रमुख ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार, रखरखाव व उनकी वास्तविक खूबसूरती को लौटाने के लिए विगत 10 सालों में 150 करोड रुपए से अधिक खर्च किए जाने के बावजूद परिणाम आशानुकूल नहीं निकल सके। अलग-अलग वर्षों में पर्यटन और पुरातत्व विभाग द्वारा करवाए गए कार्यों का समय-समय पर मॉनिटरिंग का अभाव भी एक प्रमुख वजह बताई जा रही है। यह भी सामने आया कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस काम का जिम्मा सीधे सरकार के लेवल से होना बता कर अपनी वास्तविक भूमिका को पूरी तरह से नष्ट ही कर दिया। नतीजा यह हुआ विभाग ने जिस एजेंसी को इन महत्वपूर्ण कार्यों के लिए नियुक्त किया था उसमें भरपूर लीपा पोती नही की गई हो ऐसा कह पाना बेहद ही मुश्किल है। कुछ उदाहरण तो संतोषजनक स्थिति में माने जा सकते हैं, लेकिन ऐसा सभी पर मापदंडों के अनुरूप कार्य हुआ हो यहां के हालत को देखकर कोई भी तकनीकी जानकार सहजता से अंदाजा लगा सकता है। अब आपको यह बता दें कि 2014-15 में केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना शुरू हुई और सांभर लेक टाउन को राजस्थान के पर्यटन सर्किट में शामिल किया गया। सांभर लेक टाउन के विकास के लिए स्वदेश दर्शन योजना के तहत स्वीकृति का उल्लेख है। डेजर्ट सर्किट के तहत 30 सितंबर 2015 को ही सांभर झील नगर और जयपुर जिले के अन्य पर्यटन स्थलों के विकास की परियोजना स्वीकृत की गई। यह भी बता दें कि राजस्थान पर्यटन विभाग की ओर से शाकम्भरी माता मंदिर, देवयानी कुंड, शर्मिष्ठा सरोवर, नमक संग्रहालय आदि को दर्शनीय स्थलों में शुमार किया गया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसके लिए विभाग की उप शाखा खोले जाने की आज भी जरूरत है। बाद में सांभर झील क्षेत्र को इको टूरिज्म साइट के रूप में विकसित करने की भी सरकारी घोषणा हुई। इस परियोजना में सांभर क्षेत्र के पर्यटन विकास के लिए विभिन्न सुविधाएं प्रस्तावित थीं। केंद्र के नियंत्रक एवं महालेखा परिक्षक रिकॉर्ड के अनुसार परियोजना 23 सितंबर 2019 को पूर्ण घोषित हुई और भौतिक प्रगति 100 प्रतिशत दर्ज की गई। यद्यपि सांभर को पर्यटन नगरी घोषित किए जाने का कोई दस्तावेजी प्रमाण अभी तक सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि सांभर के लिए अब तक वर्ष 2015 में केंद्र की स्वदेश दर्शन योजना में 50 करोड़, वर्ष 2015-2019 में इसी परियोजना का क्रियान्वयन करते हुए 51 करोड़ 17 लाख जारी किए गए। इसी प्रकार वर्ष 2023-24 में राजस्थान बजट घोषणा में विश्व प्रसिद्ध सांभर झील के विकास का प्रस्ताव लेते हुए 50 करोड रुपए का प्रावधान किया गया। वर्ष 2024 में ही राजस्थान के संशोधित बजट में सांभर लेक एरिया सहित पर्यटन स्थलों के विकास के लिए प्रावधान कर इसके लिए भी अलग से करीब 5 करोड़ राशि निर्धारित की गई। यानी डेढ़ अरब की राशि से अधिक खर्च किए जाने के बावजूद सांभर नगरी की आंतरिक स्थिति आज भी पुरानी सभ्यता जैसी ही प्रतीत हो रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *