कविता

लेखिका : ममता सिंह राठौर
कानपुर (यूपी)
www.daylifenews.in
ज्यादा होशियारी भी कर ली तो क्या कर लिया
जो तुम्हारा नहीं था उसको क्या ?हजम कर लिया
बात बड़ी छोटी है यही मिला यही खत्म कर लिया
ले जाने का हुनर क्या इख्तियार कर लिया
मंदिर में दिया जलाया
भगवान को भी न जाने क्या क्या बताया
इतनी चालाकियों के बाद भी
क्या फैसला बदल लिया