लेखक : डा. प्रशांत सिन्हा
लेखक पर्यावरणविद हैं।

www.daylifenews.in
भारत में डिजिटल परिवर्तन की नई लहर अब केवल वेबसाइटों और मोबाइल ऐप्स तक सीमित नहीं रह गई है। देश के होटल, अस्पताल, कारखाने, विद्यालय और व्यावसायिक प्रतिष्ठान तेजी से अपनी भौतिक परिसंपत्तियों को डिजिटल रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में 3D डिजिटल ट्विन और वर्चुअल टूर समाधान उपलब्ध कराने वाली डेल्ट्रॉन इंडिया की तकनीक विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
कंपनी के अनुसार, उसकी डिजिटल ट्विन तकनीक किसी भवन, परिसर या औद्योगिक इकाई की वास्तविक स्थिति पर आधारित त्रि-आयामी (3D) डिजिटल प्रतिकृति तैयार करती है। यह तकनीक उपयोगकर्ताओं को किसी भी स्थान का वर्चुअल भ्रमण करने की सुविधा देती है, जिससे वे दूर बैठे ही उस परिसर की संरचना, सुविधाओं और कार्यप्रणाली को समझ सकते हैं।
डिजिटल युग में जहां ग्राहक पारदर्शिता और विश्वसनीयता को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं व्यवसायों के लिए यह तकनीक एक प्रभावी संचार माध्यम के रूप में उभर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल ट्विन तकनीक भविष्य में व्यवसायों की प्रस्तुति, संचालन और ग्राहक संवाद का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।
होटल उद्योग में बढ़ा आकर्षण
हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में इस तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। होटल और रिसॉर्ट अब संभावित ग्राहकों को अपने कमरों, बैंक्वेट हॉल, स्विमिंग पूल, स्पा और अन्य सुविधाओं का वर्चुअल अनुभव प्रदान कर रहे हैं। इससे ग्राहकों को बुकिंग से पहले ही संपत्ति की वास्तविक स्थिति देखने का अवसर मिलता है, जिससे उनका विश्वास बढ़ता है और निर्णय लेने की प्रक्रिया आसान होती है।
स्वास्थ्य सेवाओं में विश्वास का नया आधार
त्वचा रोग एवं सौंदर्य चिकित्सा केंद्रों सहित अनेक स्वास्थ्य संस्थान भी डिजिटल ट्विन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। मरीज अब उपचार कक्षों, चिकित्सा उपकरणों और स्वच्छता मानकों का ऑनलाइन अवलोकन कर सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुविधा मरीजों और संस्थानों के बीच विश्वास का नया आधार तैयार कर रही है।
विनिर्माण क्षेत्र को मिल रही परिचालन दक्षता
औद्योगिक इकाइयों के लिए डिजिटल ट्विन तकनीक केवल प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि परिचालन दक्षता बढ़ाने का भी महत्वपूर्ण साधन बन रही है। कारखानों में इसका उपयोग सुरक्षा प्रशिक्षण, संयंत्र निरीक्षण, उपकरण प्रबंधन तथा गुणवत्ता नियंत्रण जैसी प्रक्रियाओं में किया जा रहा है।
विशेष रूप से निर्यात आधारित उद्योगों के लिए यह तकनीक विदेशी खरीदारों और निरीक्षकों को दूरस्थ रूप से उत्पादन इकाइयों का निरीक्षण करने की सुविधा प्रदान कर रही है, जिससे समय और लागत दोनों की बचत हो रही है।
शिक्षा क्षेत्र में अभिभावकों के लिए नई सुविधा
प्री-स्कूल और प्ले-स्कूल भी इस तकनीक को अपनाने लगे हैं। विद्यालय अपने परिसर, कक्षाओं, खेल क्षेत्रों और अन्य सुविधाओं के वर्चुअल टूर उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे अभिभावक घर बैठे ही विद्यालय की व्यवस्था का आकलन कर सकते हैं। इससे प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बन रही है।
रियल एस्टेट और रिटेल क्षेत्र में बढ़ता उपयोग
रियल एस्टेट डेवलपर्स, वास्तुकार और निर्माण क्षेत्र से जुड़े पेशेवर परियोजनाओं के दस्तावेजीकरण, निरीक्षण और विपणन के लिए डिजिटल ट्विन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। वहीं, रिटेल कंपनियां और फ्रेंचाइज़ी नेटवर्क अपने स्टोरों के मानकीकरण और परिचालन निगरानी के लिए इसका सहारा ले रहे हैं।
डिजिटल भारत की दिशा में एक कदम
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था अधिक डिजिटल होती जाएगी, वैसे-वैसे भौतिक परिसंपत्तियों की डिजिटल पहचान का महत्व भी बढ़ेगा। डेल्ट्रॉन इंडिया की पहल इसी परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो व्यवसायों को अपनी परिसंपत्तियों को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान कर रही है।
भारत में डिजिटल अवसंरचना के विस्तार और इंटरनेट की बढ़ती पहुंच के साथ 3D डिजिटल ट्विन तकनीक आने वाले वर्षों में विभिन्न उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक उपकरण के रूप में उभर सकती है। (लेखक के अपने विचार हैं)