विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र ‌

लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।
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लोकतंत्र का अर्थ है जनता का जनता द्वारा जनता के लिए शासन। इन शब्दों का वास्तविक अर्थ यह है कि जनता स्वयं नेताओं को चुनती है कि जनता के व देश हित में काम करें लेकिन वर्तमान राजनीतिक में इन शब्दों में कोई मायने नहीं रह गए हैं। ऐसा लगता है देश में राजनीतिक दलो की मनमानी चल रही है। उन्हें इस बात पर कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई उनके बारे में क्या बोल रहा है। आज भारत के कुल 7-8 राज्यों को छोड़कर बीजेपी की सरकार है, सरकार के काले कारनामों पर भी शक नहीं किया जा सकता हैं। उदाहरण के लिए पुलवामा हमला, पहलगाम हमला, अडानी को ₹1 में जमीन देना, मणिपुर हिंसा पर चुप रहना, ईरान सुप्रीमो के मौत पर खामोश रहना। ईरान के नौ सैनिकों को अमेरिका द्वारा मार दिया जाना, अमेरिका का भारत पाकिस्तान के युद्ध का सीजफायर करवाना।
हाल ही में पश्चिम बंगाल चुनाव में जो बीजेपी की जीत हुई है वहां पर हिंसा की जा रही है, मारपीट की जा रही है, दुकानें तोड़ी जा रही है, आगजनी हो रही हैं और इस प्रकार भाजपा सरकार अपना जश्न मना रही है और विपक्षी पार्टियों को दु:ख हो रहा है। जिस प्रकार पश्चिम बंगाल में चुनाव में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा कर, वोट चोरी की, भाजपा सरकार जीत गई और ममता बनर्जी हार गई। लेकिन आप देखिए ममता बनर्जी का एक छोटा साधारण सा मकान है। मामूली फुटवियर और सफेद साड़ी। यह उनका कोई टोटल खर्चा है उनके पास कोई ज्यादा संपत्ति भी नहीं है। अगर दूसरे नेताओं से तुलना करें तो आप कल्पना नहीं कर सकते की ममता बनर्जी कितनी साधारण जिंदगी जीती है।
राहुल गांधी बार-बार कह रहे थे मतदाता सूची में खेल हो रहा है कि इसके जरिए वोट काटे जाएंगे, चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। साफ शब्दों में कहा पूरा विपक्ष एकजुट होकर नहीं लड़ा तो चुनाव नाम के रह जाएंगे। लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। और वही हुआ पश्चिम में बंगाल मे SIR के नाम पर लाखों मतदाताओं के नाम काट दिए गए। तत्कालीन सरकार ने वोट चोरी करके सत्ता हासिल की और अब सारे विपक्षी दल एक दूसरे का मुंह देख रहे है। अगर विपक्षी पार्टी एकजुट हो जाती तो आज बंगाल पर भाजपा सरकार की जीत नहीं होती। संसद लोकतंत्र का मंदिर है और नेता को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देशहित के बारे में सोचना चाहिए।
अभी भी कुछ नहीं पर बिगड़ा है लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष दोनों एक गाड़ी के पहिए के समान होते हैं जितना महत्व सत्ता का है उतना ही महत्व विपक्षी दल का भी है। विपक्ष में रहकर भी आप देश हित के मुद्दे उठा सकते हैं सरकार का विरोध कर सकते हैं। संसद सत्र में व्यर्थ की बहस नहीं करके जनता की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सत्तासीन सरकार पर दबाव डाले। सरकार को मजबूर होकर आपकी बात माननी होगी। जनता का हित होगा तो जनता अगले चुनाव में आप को वोट करेंगी। सारे विपक्षी दल एकमत होकर देश हित के लिए संसद में आवाज उठाएं तभी लोकतंत्र सफल होगा। (लेखक के अपने विचार हैं)

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