जब याद आए अद्भुत प्रतिभा के धनी बंकट बिहारी ‘पागल’

जयपुर झिलमिला उठा कविताओं से
पं. वेद प्रकाश दाधीच को मिला ‘बंकट बिहारी ‘पागल’ – कल्पना स्मृति सम्मान’, डॉ. के.एल. जैन रहे मुख्य अतिथि, प्रोफेसर डॉ. चिन्मय शेष मेहता रहे विशिष्ट अतिथि
www.daylifenews.in
जयपुर। कहते हैं, कवि कभी विदा नहीं होते, वे शब्दों में जिंदा रहते हैं। कुछ ऐसा ही अहसास हुआ 2 अक्टूबर 2026 की शाम, जब अजमेरी गेट स्थित राजस्थान चैंबर भवन का भैरोंसिंह सभागार कविताओं की रोशनी से झिलमिला उठा।
मौका था स्वर्गीय बंकट बिहारी ‘पागल’ जी की नवम पुण्यतिथि का, और वीणा माँ म्यूजिक ने इसे ‘झिलमिल कवि सम्मेलन’ के रूप में एक भावभीनी श्रद्धांजलि में बदल दिया।
समारोह में राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (RCCI) के अध्यक्ष डॉ. के. एल. जैन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। ‘चोखी ढाणी’ के एथनिक डिजाइनर और राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व डीन प्रोफेसर डॉ. चिन्मय शेष मेहता विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच की शोभा बढ़ा रहे थे। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुम्बई से कार्यक्रम को शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का सधा हुआ और गरिमामय संचालन डॉ. संतोष चारण ने किया।
दो आत्माओं के नाम एक सम्मान
सम्मेलन का सबसे भावुक क्षण तब आया जब साहित्य और काव्य के क्षेत्र में निरंतर साधना के लिए वरिष्ठ कवि पं. वेद प्रकाश दाधीच को ‘बंकट बिहारी ‘पागल’ – कल्पना स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि स्वर्गीय बंकट बिहारी और उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय कल्पना के अटूट प्रेम और साहित्यिक विरासत को किया गया नमन है।
जब कविताओं ने बांधा समां
एक के बाद एक कवियों ने माइक संभाला और पूरा सभागार तालियों, वाह-वाह और नम आँखों से गूंज उठा। जयपुर के 30 से अधिक ख्यात कवियों – प्रज्ञा श्रीवास्तव, रजनी श्री बेदी, भानु भारद्वाज, विनय कुमार, सुरेखा मित्तल, गोपाल सिंह राघव, अर्चना भटनागर, मुकेश सक्सेना, कासिम बीकानेरी, पी.के. मस्त और पं. वेद प्रकाश दाधीच सहित 30 से ज्यादा कवि और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से ‘कवि पागल’ की साहित्यिक यात्रा को फिर से जीवंत कर दिया। शहर के साहित्यप्रेमियों और गणमान्यजनों की मौजूदगी ने इस शाम को अविस्मरणीय बना दिया।
इस सफल आयोजन के पीछे वीणा माँ म्यूजिक की संस्थापक प्रशंसा श्रीवास्तव, निदेशक रितेश श्रीवास्तव और उनकी पूरी टीम की महीनों की मेहनत और दिल से किया गया प्रयास रहा, जिसके लिए संस्था ने सभी का हृदय से आभार व्यक्त किया।
कवि व कवयित्री : डा. निशा माथुर (सरस्वती वन्दना), प्रशंसा श्रीवास्तव, रजनी श्री बेदी, भानु भारद्वाज, विनय कुमार (अंकुश), सुरेखा मित्तल, गोपाल सिंह राधव,
बादल सोनगरा, अर्चना भट्नागर, प्रज्ञा श्रीवास्तव ‘प्रज्ञांजलि’, मुकेश सक्सेना, भगवान सहाय पारीक, वरूण चतुर्वेदी, वीनू शर्मा, कमलेश उपाध्याय, राजेश भट्नागर, पी. के. मस्त, नीरूपमा चतुर्वेदी, सुनीता मीना, राजेश रजुआ, कन्हैया लाल, शोभा चन्दर, हेमंत कुमावत, साकार श्रीवास्तव, अमित आजाद, उमेश उत्साही, अब्दुल गफ्फार, ज्ञानवती सक्सेना, कृष्ण कुमार सैनी, अनु शर्मा गार्गी, पं. वेद प्रकाश दाधीच (कल्पना स्मृति सम्मान), डा. संतोष चारण (संचालन)। (प्रेस विज्ञप्ति)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *