पेपर लीक मामले में आखिर किसे बचाया जा रहा है : डोटासरा

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जयपुर। राजस्थान में विधानसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पेपर लीक को एक बड़ा मुद्दा बनाया था और पेपर लीक माफिया को पाताल से खोज निकालने व खत्म करने की बात कही थी, इसी प्रकार देश के गृहमंत्री ने भी पेपर लीक को रोकने का वादा किया था, किन्तु नीट-2026 परीक्षा का पेपर राजस्थान से ही लीक हो गया, जिसमें भाजपा के नेता शामिल पाये गये और वे कह रहे हैं कि बड़े लोगों को बचाया जा रहा है। राज्य के शिक्षा मंत्री इस मुद्दे पर कहते हैं कि पेपर लीक हो गया तो क्या हुआ, वहीं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ नीट पेपर लीक को केरल से श्रीगणेश होना, इस तरह बता रहे हैं जैसे कोई शुभ काम हुआ हो, भाजपा नेता जो नीट-2026 के परीक्षा पेपर लीक में शामिल पाया जाकर गिरफ्तार हुआ है और जॉंच में बड़े नेताओं को बचाया जा रहा है, जैसे आरोप लगा रहा है, से जानकारी मिली है कि नीट-2025 का पेपर भी राजस्थान में लीक हुआ था। आश्चर्य की बात है कि पेपर लीक की जानकारी मिलने के बावजूद राजस्थान में एसओजी ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की, आखिर किसे बचाने के लिये ऐसा किया गया। उक्त विचार राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, जयपुर पर आयोजित प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुये व्यक्त किये।
श्री डोटासरा ने कहा कि 3 मई, 2026 को नीट-2026 की परीक्षा आयोजित हुई थी जिसमें 22 लाख से अधिक अभ्यर्थी जो काफी समय से इस परीक्षा के लिये मेहनत कर रहे थे और परिवार की गाढी कमाई से कोचिंग ले रहे थे, अपने भविष्य को संवारने के लिये शामिल हुये थे, किन्तु इन अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ कुठाराघात करते हुये नीट का पेपर लीक हो गया और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने इस परीक्षा को रद्द कर दिया। सिर्फ नीट-2026 को ही पेपर लीक नहीं हुआ बल्कि 2024 में भी पेपर लीक होने के कारण दुबारा परीक्षायें एनटीए और सरकार ने करवाई थी। उक्त समय यह कहा गया था कि जहॉं गड़बड़ी हुई वह जानकारी में आ गई है और अब सुधार कर दिया गया। 2025 में नीट-यूजी का पेपर आउट हुआ लेकिन सरकार ने नहीं माना और तानाशाही करते हुये पेपर लीक सरगनाओं को बचाने के लिये नीट-2025 के पेपर को लीक होना नहीं माना, किन्तु जब 2026 में नीट का पेपर लीक हुआ तो जॉंच में पाया गया कि राजस्थान के ही जमवारामगढ़ के दो व्यक्ति पेपर लीक गेंग के हर वर्ष नीट का पेपर लाते थे, अपने परिवार के बच्चों को उपल्बध करवाते तथा आगे अन्य अभ्यर्थियों को बेचकर पैसे कमाते थे। यह मांगीलाल और दिनेश बिवाल के परिवार के पॉंच बच्चे 2024 में नीट का पेपर दिया, बहुत ही कम नम्बर आये और असफल रहे, किन्तु बिना कोचिंग के ही 2025 की नीट परीक्षा में पॉंचों बच्चे अच्छे नम्बरों से सफल होकर सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला पा गये। 2025 नीट परीक्षा के पेपर लीक हुआ इसका खुलासा 2026 नीट परीक्षा पेपर लीक की जॉंच में हुआ, क्योंकि इन दोनों ने 2026 में भी पेपर लीक किया। सवाल यह है कि नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं को कराने की जिम्मेदारी एनजीओ जैसी एनटीए संस्था को केन्द्र सरकार क्यों दी और देश के बच्चों के भविष्य के साथ क्यों खिलवाड़ किया गया। हद तो तब हो गई जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने चुनाव लूटने के लिये राजस्थान के मतदाताओं को प्रभावित करने के लिये प्रदेश में पेपर माफिया के खात्में की बात कही थी, पेपर लीक का दुष्प्रचार किया और गृहमंत्री श्री अमित शाह ने भी इसी प्रकार अनर्गल आरोप-प्रत्यारोप लगाये, भाजपा के समस्त नेता तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष, सीएलपी लीडर सभी ने इस मुद्दे को उठाया था कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार के समय पेपर लीक हुये, किन्तु अब एक शब्द नहीं बोल रहे हैं जबकि मोदी सरकार के शासन अब तक 89 पेपर लीक हो चुके हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गॉंधी ने संसद में खड़े होकर वर्ष 2024 में बोला था कि सरकार को देशवासियों और युवाओं के मुद्दों पर चर्चा करानी चाहिये, नीट का पेपर लीक हो गया, इस पर चर्चा होनी चाहिये, ना कि लोगों को भ्रमित करने के लिये गैर जरूरी मुद्दों पर चर्चा हो। उक्त समय भाजपा की केन्द्र सरकार ने नीट-2024 पेपर लीक पर चर्चा नहीं करवाई, जिसके पश्चात् 2025 में भी नीट पेपर लीक होने के आरोप लगे, चर्चा की माँग की, लेकिन केन्द्र सरकार ने टाली। इस वर्ष नीट-2026 का पेपर लीक हुआ तो सीकर के लोगों ने जाकर पुलिस को सूचना दी और शिकायत दर्ज करने का अनुरोध किया किन्तु शिकायत दर्ज नहीं हुई, पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की, जिस पर इन लोगों ने सीधे एनटीए को ईमेल से शिकायत की और प्रमाण प्रस्तुत किये कि पेपर से पहले ही 120 से अधिक प्रश्र पत्र में वर्णित अनुसार मिल चुके हैं, तब एसओजी हरकत में आई, आनन-फानन में लोगों को पकड़ गया, एसओजी इस अपराध का मुकद्मा भी दर्ज करना चाहती थी, किन्तु सरकार में उच्च स्तर पर बैठे हुये लोगों ने मुकद्मा दर्ज नहीं होने दिया, ताकि पेपर लीक नहीं माना जाये, क्योंकि भाजपा के नेताओं को पूरा विश्वास था कि जिस प्रकार 2024 और 2025 की नीट परीक्षाओं में पेपर लीक के बावजूद बचाव हो गया, इस बार भी बच जायेंगे। 2024 व 2025 की नीट परीक्षा में केन्द्र सरकार व शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने माननीय उच्चतम न्यायालय में यह कहा था कि परीक्षा में हुई गड़बड़ी पकड़ ली गई है, रद्द करने की आवश्यकता नहीं है। इस दफा भी भाजपा नेताओं ने सोचा था कि पूर्व की भांति ही बचाव हो जायेगा, किन्तु व्यापकता के कारण जन आक्रोश को देखते हुये यह परीक्षा निरस्त करनी पड़ी और भाजपा सरकार की कलई खुल गई। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान आज कह रहे हैं कि पेपर लीक राष्ट्रव्यापी समस्या है, शिक्षा माफिया पेपर लीक कराकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। धर्मेन्द्र प्रधान जी को यह जवाब देना चाहिये कि यदि यह बात पहले पूर्व के वर्षों में ही मान लेते तो आज तीन वर्षों में हर वर्ष 22 लाख बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होता। भाजपा को केवल दूसरों पर आरोप लगाने और अन्य दलों की सत्ता लूटने के लिये पेपर लीक का मुद्दा याद आता है, खुद के गिरेबान में ये झांक के नहीं देखते हैं। राजस्थान के शिक्षा मंत्री कह रहे हैं कि पेपर लीक हो गया है तो कोई बड़ी बात नहीं है, दुबारा हो जायेगा। भाजपा नेता यह भी कह रहे हैं कि कोई साथ में फोटो खींचा ले तो क्या फर्क पड़ता है, किन्तु कोई अपराधी देशद्रोह जैसा अपराध कर रहा है, भाजपा ने उसे पदाधिकारी बना रखा है, भाजपा विधायक के जन्मदिन पर, अन्य कार्यक्रमों में शामिल होता है, भाजपा का प्रचार करता है, मंत्री उसके घर जाते हैं तो आसानी उस अपराधी से भाजपा नेता पल्ला कैसे झाड़ सकते हैं। आज दिन तक भी भाजपा में पेपर लीक में शामिल अपराधी को अपनी पार्टी से निष्कासित नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि पेपर कराने की जिम्मेदारी केन्द्र सरकार की, पेपर लीक में शामिल अपराधी राजस्थान में भाजपा का पदाधिकारी, ऐसे में भाजपा इस प्रकरण से पल्ला नहीं झाड़ सकती है। भाजपा के एक मंत्री चुनावों में माफिया को नाश्ते में खाने की बात कहते थे, आज मंत्री माफियाओं के साथ नाश्ता कर रहे हैं। मुख्यमंत्री लगातार कह रहे हैं कि उनके शासन में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है, 350 पेपर जिसमें पहली क्लास से बाहरवीं, समस्त कॉलेज आदि के पेपर शामिल हैं, कराने की बात कहते हैं, रोजगार देने वाली परीक्षायें तो बहुत कम हुई है, किन्तु मुख्यमंत्री जी को यह जानकारी होनी चाहिये कि राजस्थान में भाजपा की वर्तमान सरकार के शासन में ढाई वर्ष में अलवर में एनसीसी सी ग्रेड का पेपर, कक्षा 10 का पेपर चूरू में, भरतपुर, जोधपुर और बाड़मेर में नीट का पेपर लीक हुआ, नेशनल सीड कॉरपोरेशन का पेपर लीक हुआ, आरयूएचएस का पेपर लीक हुआ, जोधपुर के खेतेश्वर महाविद्यालय में सैकण्ड ग्रेड परीक्षा लीक हुआ, राजस्थान विश्वविद्यालय में फिजिक्स का पेपर लीक हुआ, नवलगढ़ में आरएएस का पेपर परीक्षा से पहले खुला मिला और अब नीट-2026 तथा नीट-2025 का पेपर लीक होने की पुष्टि हुई है। यदि पेपर लीक हो तो सरकार स्वीकार नहीं कर रही, यह हमारे देश के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। आश्चर्य की बात है कि 2024 में जो एनटीए का डीजी था जिसके समय पेपर लीक हुआ, उसको भाजपा सरकार ने प्रमोशन देकर छत्तीसगढ़ सरकार में मुख्यमंत्री का प्रिसिंपल सेकेट्री बना दिया। इसी प्रकार एनटीए चेयरमेन प्रदीप कुमार जोशी ने 2023 से उसके कार्यकाल में सभी पेपर लीक हुये हैं, पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, अभी भी पद पर बना हुआ है और प्रमुख बात यह है कि यही व्यक्ति मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार में सर्विस कमीशन के चेयरमेन थे, इन्हीं के कार्यकाल में व्यापम घोटाला हुआ था। एनटीए आरएसएस और भाजपा के संगठन के लोगों की संस्था है, ना कि कोई सरकारी संस्था है, पहले सीबीएससी परीक्षा करवाती थी, उसमें घपले और घोटाले नहीं कर पा रहे थे, इसलिये एनटीए संस्था बनाई गई। संसद की शिक्षा महिला, बच्चे, युवा और खेल पर बनी पार्लियामेन्ट्री स्टेण्डिंग कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में एनटीए की कार्यप्रणाली पर प्रश्र उठाये थे और यह भी नोट किया कि एनटीए संसद को वार्षिक रिपोर्ट देने भी असफल रहा है। शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने एनटीए में सुधारों की जरूरत 2024 में संसद में दिये गये वक्तव्य में बताई थी, किन्तु दुर्भाग्य से कोई सुधार नहीं हुआ। पेपर लीक भाजपा नेताओं का प्रमुख व्यवसाय बन गया है, इसीलिये केन्द्र से एक पर्ची और राजस्थान सरकार ने घोषणा की है कि एनटीए की तर्ज पर राजस्थान में आरएसए संस्था गठित कर परीक्षायें कराने की जिम्मेदारी दी जायेगी, इसलिये राजस्थान सरकार बड़ी परीक्षायें नहीं करवा रही है। जब देश में एनटीए संस्था पेपर लीक होने से नहीं रोक पा रही है तो राजस्थान में किसी प्रकार की एजेंसी बनाने का क्या औचित्य है, भाजपा केवल लोगों को बरगलाना चाहती है, अब मुख्यमंत्री जी को हर भाषण में कहते हैं कि नकल प्रकरण के मगरमच्छों को पकड़ेगें, उन्हें या तो अपने भाषण बंद कर देना चाहिये अन्यथा कांग्रेस की मांग है कि नीट सहित समस्त परीक्षाओं में शामिल बड़े मगरमच्छ जो भाजपा से संबंधित है, जिनके बारे में नीट-2026 परीक्षा में पकड़ा गया आरोपी बोल रहा है, अविलम्ब उन पर कार्यवाही करें। दु:ख का विषय है कि नीट परीक्षा के दो अभ्यर्थियों द्वारा आत्महत्या करने की जानकारी सामने आई है, उन परिवारों पर जिन्होंने अपने नौनिहालों को खो दिया, क्या बीत रही होगी। पेपर लीक प्रकरण की जॉंच ज्वाईंट पार्लियामेंट कमेटी अथवा उच्चतम न्यायालय के रिटायर्ड जज से करवाई जानी चाहिये, क्योंकि सीबीआई पर केन्द्र सरकार का अंकुश है तथा केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को अपने पद से तुरंत प्रभाव से इस्तीफा देना चाहिये। युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिये कांग्रेस पार्टी सडक़ से सदन तक लड़ाई लड़ेगी।
इस अवसर पर नेता विपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि राजस्थान में भाजपा ने सरकार यही सपना दिखाकर बनाई थी कि अब पेपर लीक नहीं होंगे, किन्तु केन्द्र सरकार द्वारा कराई गई परीक्षाओं के लीक होने की संख्या शतक के पास पहुॅंच रही है, लेकिन जवाबदेही शून्य है। नीट-2026 के आरोपी द्वारा भाजपा का पदाधिकारी होने का विज्ञापन अखबारों तक में छपा है, इसका जवाब भाजपा क्यों नहीं देती है। राजस्थान सरकार से सवाल है कि पेपर लीक होने की जानकारी मिलने के बावजूद 9 दिन तक राजस्थान में एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई, इसका जिम्मेदार कौन है, राजस्थान में पेपर माफियाओं को बचाने का काम कौन कर रहा है। पेपर माफिया जिसका नाम ले रहे हैं कि हम तो छोटे लोग हैं, वे बड़े लोग कौन है, इसकी जानकारी सरकार कब देगी। राजस्थान में पेपर लीक को लेकर कड़ा कानून बना हुआ है, राजस्थान का कानून केन्द्र के कानून से दस गुना मजबूत है, यदि राजस्थान में एफआईआर होती तो पेपर लीक के अपराधियों को आजीवन कारावास तथा दस करोड़ रूपये जुर्माने का दण्ड भुगतना पड़ता, इसीलिये शायद चूॅंकि भाजपा के लोग अपराध में शामिल है, एफआईआर राजस्थान में दर्ज नहीं हुई। भाजपा नेता सत्ता में बैठकर दोनों हाथों से देश की जनता एवं युवाओं को लूटने का काम कर रहे हैं, अपराधों को दबाया व छुपाया जा रहा है। जिन बच्चों ने पेपर देने के लिये मेहनत की, परिवार ने गाढी कमाई उन पर खर्च की, ऐसे 22 लाख बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है, इन परिवारों पर क्या बीती होगी, किन्तु सरकार की ओर से कोई जवाबदेही नजर नहीं आती है।

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