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मुंबई। वाणिज्य विभाग ने जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) के सहयोग से ‘चिंतन शिविर – रत्न एवं आभूषण के लिए 2040 रोडमैप’ का आयोजन किया। इस उच्चस्तरीय संवाद का उद्देश्य ऐसी व्यापक रणनीति तैयार करना था, जिससे भारत 2040 तक रत्न एवं आभूषण निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के अपने लक्ष्य को हासिल कर सके। भारत सरकार के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत की ताकत सोना, चांदी या कच्चे हीरों के खनन में नहीं, बल्कि कुशल कारीगरों के विशाल समूह में है। चिंतन शिविर का आयोजन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के मार्गदर्शन में किया गया। डीजीएफटी के महानिदेशक, लव अग्रवाल ने भारत को एक वैश्विक ब्रांड तथा डिजाइन और मूल्यवर्धित आभूषणों के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। जीजेईपीसी के अध्यक्ष, किरीट भंसाली ने कहा कि नए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए), विशेष अधिसूचित क्षेत्रों के माध्यम से कच्चे हीरों की बिक्री पर 15 वर्ष की कर छूट और एमएसएमई के लिए बढ़ते समर्थन ने उद्योग के विकास के लिए मजबूत नीतिगत आधार तैयार किया है।