
जाफर लोहानी
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मनोहरपुर (जयपुर)। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी हजरत शेख बुरहानुद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला आलेह का पीर का चिल्ला नायन अमरसर पर उर्स मेले का आयोजन किया जा रहा है जिसमें 1 मई शुक्रवार को बाद नमाज़ असर मिलाद शरीफ से शुरू होकर 3 मई सोमवार की प्रातःकाल 4 बजे कूल की रस्म के साथ मे विधिवत सम्पन होगा।
दरगाह के ख़ादिम मोहम्मद इमरान मलिक ने बताया कि 1 मई शुक्रवार को बाद नमाज ए असर मिलाद शरीफ होगी जिसमें ख़ुदा के हुकम व मुहम्मद साहब के बताए हुए मार्ग पर चलने की बात कही जाएगी! इसी के साथ मे हिन्दू मुस्लिम जायरिनो का आना शुरू हो जाएगा। इसी प्रकार दिनांक 2 मई शनिवार को लंगर भंडारा शाम 4 बजे से शुरू होगा जिसमे हिन्दू मुस्लिम जायरीन बड़े ही अदब के साथ में लंगर प्रसादी लेंगे। 2 मई शनिवार को रात्रि में 9 बजे के बाद राजस्थान की प्रसिद्ध कव्वाल पार्टियों द्वारा बाबा की मान मनुहार की जाएगी। इसी प्रकार 3 मई सोमवार को सुबह 4 बजे कूल की रस्म के साथ उर्स मेले का समापन होगा।
उल्लेखनीय है कि जिस स्थान पर हजरत बुर्रहानुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलेह इबादत (तपस्या) करते थे उसके चारो और अत्यधिक नीचे (गहरी खाई) नदी का पानी बहा करता था यानी तपस्या स्थल टापूनुमा था पानी के लिए नीचे जाना पड़ता था पानी को लेकर आना ऐसा था जैसे एवरेस्ट की चढ़ाई चढ़ रहे है थोड़ा सा फिसलते ही नदी में गिरने का खतरा था ऊपर आने जाने का रास्ता नही होने से अत्यधिक परेशानी होती थी।
बाबा ने अपनी कठोर तपस्या के बल पर वो मुकाम हासिल कर लिया था जिसके लिए नेकदिल लोग भी तरस जाते है बाबा जिसके हक में भी दुआ करते थे वो जरूर रंग लाती थी उनकी तारीफ़ सुन सुन कर राजा महाराजा भी बाबा से दुआ करवाने के लिए आते थे।
बाबा जब तपस्या करते थे उस दौरान जंगल में खाने पीने का सामान आसानी से उपलब्ध नहीं होता था विद्युत लाइट नहीं थी घनघोर अंधेरा था जंगली जानवरों का अत्यधिक आतंक छाया हुआ था एसी परिस्थिति में भी बाबा अपनी तलीनता के साथ में इबादत करते थे।
दरगाह के खादिम ईमरान मलिक ने कहा कि वली खुदा के दोस्त होते है ये वली ट्रांसफार्मर की तरह होते है जो भी इनसे जुड़ते है वो रोशन हो जाते है और जो लोग इनसे टकराते है वो चकनाचूर हो जाते है।
मलिक ने शायराने अंदाज में कहा कि “निगाहे वली में वो तासीर देखी बदलती हुई रोज हजारों की तक़दीर देखी”! इसी प्रकार उन्होंने कहा कि “हद तपे सो आलिया बे हद तपे सो पीर, हद बे हद दोनो तपे ताको नाम फ़कीर”! इसी प्रकार उन्होंने कहा कि “इरादे रोज बनकर टूट जाते है, दरगाह पर वो ही आते है जिन्हे बाबा बुलाते है।”