प्रणवेंद्र शर्मा सनातन धर्म के माध्यम से देश की सेवा को समर्पित : डॉ कमलेश मीना

राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष, छात्र नेता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विचारक प्रणवेंद्र शर्मा से डॉ कमलेश मीना की शिष्टाचार भेंट
लेखक : डॉ कमलेश मीना
सहायक क्षेत्रीय निदेशक, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, इग्नू क्षेत्रीय केंद्र जयपुर राजस्थान। इग्नू क्षेत्रीय केंद्र जयपुर, 70/80 पटेल मार्ग, मानसरोवर, जयपुर, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार।
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राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष, छात्र नेता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विचारक प्रणवेंद्र शर्मा से शिष्टाचार भेंट हुई। वे राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष, नेता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विचारक हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष, छात्र नेता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विचारक आदरणीय भाई साहब परम श्रद्धेय श्री प्रणवेंद्र शर्मा जी सनातन धर्म की एक महान विरासत से जुड़े हैं और महात्मा रामचन्द्र वीर महाराज जी के पोते और आचार्य गुरु परम श्रद्धेय श्री धर्मेंद्र के पुत्र हैं, जो एक प्रख्यात, जोशीले हिंदू संत, वक्ता और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के वरिष्ठ नेता थे। महात्मा रामचंद्र वीर महाराज के पुत्र आचार्य धर्मेंद्र का पूरा जीवन हिंदी और हिंदुत्व की रक्षा के लिए समर्पित रहा है। उनका जन्म 9 जनवरी,1942 को गुजरात के मालवाड़ा में हुआ था । पिता महात्मा रामचंद्र वीर के आदर्शों और व्यक्तित्व का इन पर ऐसा प्रभाव पड़ा कि इन्होंने 13 साल की उम्र में वज्रांग नाम से एक समाचार-पत्र निकाला।
मेरे लिए यह वास्तव में एक बहुत बड़ा दिन था और हमारे राष्ट्र के ऐसे महान व्यक्तित्व से मिलना मेरे लिए एक आशीर्वाद और सौभाग्य की बात है। हमारी अच्छी चर्चा और विचार-विमर्श हुआ और मैंने विश्व संवाद केंद्र, जयपुर और कॉलेज से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं। आदरणीय भाई साहब परम श्रद्धेय श्री प्रणवेंद्र शर्मा जी के पास सनातन धर्म की महान विरासत है, लेकिन स्वभाव से वे बहुत विनम्र, सरल और गहन ज्ञानवान व्यक्तित्व हैं और मेरे लिए यह मुलाकात वास्तव में एक आशीर्वाद, मार्गदर्शन, सलाह और एक ध्रुव तारे के प्रकाश के समान है। इस शिष्टाचार भेंट से मिली मेरी खुशी, आनंद और प्रसन्नता को मैं शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता।
राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष, छात्र नेता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विचारक आदरणीय भाई साहब परम श्रद्धेय श्री प्रणवेंद्र शर्मा जी न केवल सनातन धर्म में बल्कि सामाजिक सेवा, पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन के क्षेत्र में भी एक विशाल विरासत छोड़ी है। उनकी पत्नी वरिष्ठ पूर्व पत्रकार और भारत के शीर्ष पत्रकारिता एवं जनसंचार संस्थान, भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) (आईआईएमसी) की प्रोफेसर संगीता प्रणवेंद्र जी हैं। उनके छोटे भाई सोमेंद्र शर्मा भी राजस्थान छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं।
मैं यहाँ कहना चाहूँगा कि परम श्रद्धेय प्रणवेंद्र शर्मा एक ऐसे परिवार के प्रतिनिधि हैं जिन्होंने राष्ट्र की पहचान के लिए विभिन्न स्तरों पर अपार योगदान दिया है।
विराट नगर शक्तिपीठ, जिसे अंबिका शक्तिपीठ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, राजस्थान के जयपुर के पास विराट नगर में एक पहाड़ी पर स्थित देवी सती (अंबिका) को समर्पित एक पूजनीय हिंदू तीर्थस्थल है। इसे उन 51 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है, जहां पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी सती के दाहिने पैर की चारों उंगलियां गिरी थीं।
आचार्य गुरु परम श्रद्धेय धर्मेंद्र एक प्रख्यात, जोशीले हिंदू संत, वक्ता और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के वरिष्ठ नेता थे। वे राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख व्यक्ति थे और वीएचपी के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल में कार्यरत थे। आचार्य गुरु धर्मेंद्र जी को एक वीएचपी और हिंदुत्व का प्रबल समर्थक माना जाता था, जिन्होंने अपना जीवन “हिंदी, हिंदुत्व और हिंदुस्तान” के प्रचार-प्रसार पर केंद्रित किया। आचार्य गुरु धर्मेंद्र जी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के आंदोलन में एक प्रमुख आवाज थे और अशोक सिंघल और लाल कृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए थे। बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय पर आचार्य धर्मेंद्र बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान उपस्थित थे और उन्होंने खुद को “आरोपी नंबर एक” कहकर कानूनी परिणामों के प्रति कोई भय नहीं दिखाया। आचार्य गुरु धर्मेंद्र जी गौ संरक्षण आंदोलन में गौहत्या रोकने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया, जिसमें 52 दिनों का उपवास भी शामिल था।
आचार्य गुरु परम श्रद्धेय श्री धर्मेंद्र जी एक विचारधारा, अपने आक्रामक शैली और निर्भीक भाषणों के लिए जाने जाने वाले, उन्हें अक्सर “सनातन धर्म के अद्वितीय वक्ता” के रूप में जाना जाता था। जब उन्हें लगता था कि विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के हितों की रक्षा नहीं हो रही है, तो वे अक्सर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सहित राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाते थे। आचार्य गुरु धर्मेंद्र जी जयपुर के विराट नगर स्थित श्रीमद् पंचखंड पीठ के प्रमुख थे। लंबी बीमारी के बाद 19 सितंबर, 2022 को जयपुर में 80 वर्ष की आयु में आचार्य गुरु धर्मेंद्र जी का निधन हो गया।
प्रणवेंद्र शर्मा जी के छोटे भाई सोमेंद्र शर्मा भी राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र अध्यक्ष रह चुके हैं और जयपुर में स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए जाने जाते हैं।
इस शिष्टाचार भेंट के दौरान मैंने राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष, नेता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक आदरणीय भाई साहब परम श्रद्धेय श्री प्रणवेंद्र शर्मा जी को अपनी लिखित पुस्तक “समावेशी विचार: नए भारत को समझने का एक प्रयास” की एक प्रति भेंट की और इस शिष्टाचार मुलाकात के दौरान अपने आगे के जीवन के लिए उनका आशीर्वाद, मार्गदर्शन और शुभकामनाएं मांगीं। आज की शिष्टाचार भेंट के लिए इग्नू के क्षेत्रीय केंद्र, जयपुर कार्यालय में आने के लिए मैंने हार्दिक धन्यवाद और आभार व्यक्त किया।
इस तरह की शिष्टाचार भेंट और चर्चा, विचार-विमर्श हमेशा मुझे एक नया दृष्टिकोण, नई अंतर्दृष्टि और नए सीखने के विचार प्रदान करते हैं और मैं हमेशा इस तरह की चर्चा और विचार-विमर्श से सीखता हूं और अपने व्यक्तित्व में नए गुण, विशेषताएं और प्रेरणा जोड़ता हूं। यहां मैं कहना चाहूंगा कि यह दिन राष्ट्र के लिए एक महान दूरदर्शी और समाज के समावेशी विकास के लिए समर्पित है। इस रचनात्मक चर्चा और विचार-विमर्श के दौरान मुझे वे दिन याद आ गए जो मैंने दो दशक पहले विश्व संवाद केंद्र, जयपुर और ग्रासरूट मीडिया फाउंडेशन के साथ बिताए थे। प्रमोद शर्मा भाई साहब द्वारा विश्व संवाद केंद्र, जयपुर के माध्यम से प्रदान किए गए मंच से मेरे जैसे हजारों युवाओं को अपने करियर के लिए सही राह और मार्गदर्शन मिला। मैं उनके निःस्वार्थ समर्थन और बहुमूल्य मार्गदर्शन के लिए हमेशा आभारी रहूंगा।
भाई साहब, इस दिन को इतना खूबसूरत, प्यारा, ऐतिहासिक और अद्भुत बनाने के लिए मैं तहे दिल से अपना आभार और धन्यवाद व्यक्त करता हूं।
“कर्म ही हैं जिनसे मानव जग में ख्याति पाते हैं
कर्मयोगी ही इस जग में सदा ही पूजे जाते हैं…”
(लेखक के अपने विचार हैं)

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