90 करोड़ ‘आभा‘ खातों का बना ऐतिहासिक रिकॉर्ड

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जयपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में गांव-ढाणी से लेकर कस्बों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं एवं सुविधाओं में निरंतर विस्तार हो रहा है। इसी क्रम में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन जैसे तकनीकी नवाचार का सफल क्रियान्वयन करते हुए मरीजों का डेटा यूनिक हेल्थ आभा आईडी के माध्यम से संधारित किया जा रहा है, जिससे प्रदेश के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करना आसान हुआ है और लोगों को अपना हेल्थ रिकॉर्ड मोबाइल पर उपलब्ध भी हो रहा है।
यूनिक आभा (आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खातों) बनाने में राजस्थान ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 7 करोड़ 19 लाख से अधिक आभा आईडी बनाते हुए प्रदेश ने देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। वहीं, देशभर में वर्ष 2026 में इन खातों की संख्या ने 90 करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर लिया है, जिससे नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य सेवा सशक्त हो रही है। गत 5 वर्षों से अधिक के कालखंड में आभा खाते बनाने में लगातार बढ़ोतरी हुई है। कुल आभा खातों की संख्या 2021 में 14.7 करोड़ से बढ़कर 2022 में 30.4 करोड़, 2023 में 50.6 करोड़, 2024 में 72.2 करोड़ और 2025 में 84.5 करोड़ दर्ज हुई थी।
आभा एक विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान है, जो नागरिकों को उनकी सहमति से उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रूप से जोड़ने, देखने और साझा करने में सक्षम बनाती है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के प्रमुख आधार स्तंभों में से एक के रूप में, ‘आभा’ विभिन्न स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, केंद्रों और डिजिटल स्वास्थ्य ऐप्स के बीच लंबे समय तक चलने वाले स्वास्थ्य रिकॉर्ड बनाने में मदद करती है, जिससे नागरिकों को उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पर अधिक पारदर्शिता के साथ नियंत्रण और अधिकार मिलता है।
आभा से मेडिकल हिस्ट्री डिजिटाइज्ड, रोगी को मिलता सुगम उपचार
उल्लेखनीय है कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां मरीज, डॉक्टर और अस्पताल एक-दूसरे से डिजिटल रूप से जुड़े होते हैं। योजना के तहत पंजीकृत नागरिक की एक 14 अंकों की यूनिक आभा हेल्थ आईडी बनती है, जो रोगी की पहचान और मेडिकल रेकार्ड का आधार होती है। सभी लैब रिपोर्ट्स दवाइयों के पर्चे और पुरानी बीमारियों का डेटा इस आईडी में सुरक्षित रहता है, जिससे कागजों को साथ रखने की जरूरत खत्म हो जाती है। रोगी का पूरा डेटा सुरक्षित होता है और उसकी अनुमति के बिना कोई भी डॉक्टर या अस्पताल इसे नहीं देख सकता। इससे डॉक्टरों को मरीज की पुरानी मेडिकल हिस्ट्री समझने में आसानी होती है, जिससे सही समय पर सही इलाज मिल पाता है। इस तकनीकी नवाचार में आईएचएमएस की महत्वपूर्ण भूमिका है। आईएचएमएस एक एबीडीएएम कम्प्लायंट सॉफ्टवेयर है, जिसके द्वारा मरीज की आभा आईडी के साथ इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रेकार्ड लिंक किए जाते हैं।

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