महक उठी जिंदगी : लता अग्रवाल

लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)
www.daylifenews.in
सुधा जीवन के 50 वर्ष गुजार चुकी थी। संघर्ष में जीवन का समय कब निकल गया पता ही नहीं चला। जब अतीत का हिसाब लगाती तो सिवाय खालीपन के और कुछ नजर नहीं आता था।
आज घर में कोई नहीं था। बच्चे पिकनिक पर गए थे। पति सरकारी विद्यालय में तृतीय श्रेणी शिक्षक थे। सो वे तय समय पर घर से निकल गए। सुधा ने चाय बनाई और लेकर बैठ गई चाय पीते पीते उसे अपने पुराने दिन याद आने लगे। मायके में ज्यादा पैसा नहीं था पिता मामूली किराना व्यापारी थे। इसलिए कम उम्र में ही अपने से कम पढ़े लिखे व्यक्ति से उसका ब्याह रचा दिया ताकि उन्हें कुछ राहत मिल जाए पीछे दो छोटी बहनें भी थी उनकी भी शादी करनी थी सो सुधा ने भी ज्यादा सोच विचार नहीं किया और समझौता कर लिया। शादी तो एक जुआ है और सुधा के जीवन में पासा उल्टा हो गया था। सुधा अनपढ़ लोगों के बीच मजाक का विषय बनकर रह गई थी। सुधा सुंदर और शिक्षित सुधा को अनपढ़ नंनदे और सास हर वक्त प्रताड़ित करते रहते थे पर उसमें प्रतिकार करने का साहस नहीं था। पति की आय भी ज्यादा नहीं थी। भरा पूरा परिवार था और पति कमाने वाले अकेले इंसान थे तो परिवार को छोड़कर जा भी नहीं सकते थे। सुधा अपने ससुराल के प्रति हर कर्तव्य को बखूबी निभाती थी। कहते हैं यश और अपयश ईश्वर के हाथ में होता है। यश सुधा के नसीब में था ही नहीं लेकिन हर वक्त ताने जरूर सुनती रहती थी। वह जी जान से घर के कामों में लगी रहती थी लेकिन प्यार के दो बोल सुनने को तरस गई थी। धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास कमजोर होने लगा, मानसिक तनाव ने उसे इस तरह झकझोर कर रख दिया था वह याद करके ही उसके रोंगटे खड़े हो जाते थे। बीमार रहने लगी थी। पर अब दवाइयां भी असर नहीं करती थी। बे असर होने लगी थी जिंदगी मानो थम सी गई थी। उसे लगता था जैसे वह कभी बिस्तर से उठ नहीं पाएगी और उसकी जिंदगी यूं ही गुजर जाएगी पर शायद भगवान को उस पर दया आ गई थी।
सोचते सोचते उसे वह दिन याद आया जब उसके पति सुधीर के परम मित्र धीरज उसका हाल-चाल पूछने आए थे। बातचीत करते-करते जब सारी स्थिति सामने आई तो वह बोले आप इस तनाव से तभी मुक्त हो सकेगी जब आप प्राणायाम करेगी तो आपका मानसिक मनोबल मजबूत होगा। उस दिन से अपने को स्वस्थ करने के लिए नियमित रूप से प्राणायाम करने लगी तन स्वस्थ होता गया पर मन का क्या करती, वह तो अभी भी उस अपमान और पीड़ा को नहीं भूला पा रहा था जो ससुराल वालों से मिला था।
एक दिन सुधा रसोई घर में खाना बना रही थी कि अचानक उसकी बचपन की सहेली कुसुम का फोन आया। वह चहकते हुए बोली – “हेलो सुधा क्या हाल है? मैं तुम्हारे शहर में आई हुई हूं। मिलना चाहती हूं तुम्हारा पता बता दो मैं आ जाऊंगी। सुधा ने घर का पता व्हाट्सएप कर दिया। तय समय पर कुसुम सुधा के घर पहुंच गई काफी बरसों बाद मिली थी चाय नाश्ता करते हुए दोनों अपना-अपना हाल एक दूसरे को बताने लगी। सुधा की हालत के बारे में सुनकर कुसुम बोली – सुधा ऐसे तो तुम घुट घुट कर कब तक जीयोगी कुछ ऐसा करो कि तुम्हारा मन बहल जाए। उस दिन कुसुम की सलाह पर उसने अपने पति से विचार विमर्श कर के छोटे बच्चों के लिए घर के ही एक हाल में क्रेश खोल दिया। कुछ समय बाद धीरे धीरे कामकाजी महिलाएं अपने बच्चों को छोड़ कर जाने लगी। उन छोटे छोटे बच्चों में सुधा ऐसी उलझी रहती की सब दु:ख भूल जाती। सोचते सोचते कब आंख लग गई पता ही नहीं चला।
दरवाजे की डोर बेल बजी तो काम वाली बाई थी। सुधा का उदास चेहरा देख कर बोली -आज आप फिर पुरानी कड़वी बातों के बारे में सोचने लगी।
सुधा के घर से थोड़ी ही दूर पर एक वृद्ध आश्रम था सुधा कभी कभी वहां पर कुछ दान पुण्य करने के लिए जाती रहती थी और जब उन बुजुर्ग महिलाओं और पुरुषों की पीड़ा सुनती तो उसका मन व्यथित हो उठता था। उसने सोचा क्यों ना एक छोटा सा वृद्ध आश्रम मैं भी खोल दूं ताकि और ज्यादा व्यस्त हो जाऊंगी। एक मकान उसने किराए पर ले लिया और वहां पर वृद्ध आश्रम खोल दिया छोटे बच्चों की क्रेश से जो आय होती थी वह उसे वृद्ध आश्रम पर खर्च कर देती थी इससे उसको काफी सुकून मिलता था और बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद भी मिलता था। छोटे बच्चो की तुतलाती बोली और बुजुर्गों के आशीर्वाद के बीच उसका जीवन सार्थक हो गया था। समय की ऐसी व्यवस्था की घर का सारा काम होने के बाद ही वह बच्चों को और वृद्धो को संभालती थी कुछ कर्मचारी भी नियुक्त किए थे जो उसकी मदद करते थे। उसका काम देखकर समाज के कुछ लोगों ने आर्थिक मदद भी देना शुरू कर दी।
अब सुधा काफी खुश रहने लगी और उसे लगा वाकई उसकी जिंदगी महक उठी है। बदरंग ज़िंदगी में अब रंग भरने लगे हैं। इस काम ने उसको समाज में पहचान दी होली का त्योहार पहली बार उसके जीवन खुशी लेकर आया था। उसने जम कर रंग बिरंगी गुलाल से होली खेली। अब परिवार ससुराल वालों का भी उसके साथ अच्छा व्यवहार हो गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *