कर्नाटक में अब बैलट पेपर के जरिये मतदान होगा

लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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आधुनिक तथा तकनीक के इस युग में हर कोई आगे की ओर देख रहा है तथा अपने कदम बढा रहा है। पर हाल ही में कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने एक ऐसा फैसला किया जो कदम आगे बढाने की बजाये पीछे ले जाने वाला है। राज्य में इस बार ई.वी.एम.की बजाये पुराने तरीके कागज़ के मतपत्रों के जरिये स्थानीय निकायों और पंचायत राज संस्थायों के चुनाव होंगे।
देश में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ई वी एम ) से मतदान करवाए जाने की तकनीक दशकों पूर्व अपनाई गई थी। इसके लिए चुनाव सम्बन्धी कानून में संशोधन तक किया गया था. क्योंकि चुनावों से संबधित कानून में मतदान बैलट पेपर से करवाये जाने का उल्लेख था . देश के पहले कई लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव कागज़ के मतपत्रों से करवाए गए थे। यह प्रक्रिया लम्बे समय तक चली. इन चुनावों में फर्जी मतदान की शिकायतें आम थी.कोई किसी का भी वोट डाल कर चला आता था .मतदान केन्द्रों पर कब्ज़ा करके मतपत्रों पर ठप्पा लगा कर वोट डाल दिया जाता था। जब. टी.एन शेषण चुनाव आयोग के मुखिया थे तो उन्होंने पहली बार मतदाताओं को मतदाता पहचान पत्र दिए गए। यह एक बड़ा बदलाव था जो सब को पसंद आया। कुछ समय बाद देश में ई.वी.एम्. मशीनें आ गई जिसके जरिये केवल बटन दबा कर वोट दिया जा सकता था . हालाँकि बीच बीच में यह शिकायतें आती रहीं कि इन मशीनो को टेम्पर करके फर्जी वोट डाले जा सकते है लेकिन इस तरह के कथित फर्जी मतदान को लेकर किसी ने कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इसको लेकर एक कमिटी का गठन किया . कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इन मशीनों के साथ छेड़छाड़ संभव नहीं. वैसे भी आम तौर पर यह माना जाता है कि इन मशीनों के जरिये फर्जी मतदान संभव नहीं. इसके बावजूद जब कोई दल चुनाव हारता है तो उसका पहला हमला इन मशीनों पर ही होता था . उनका आरोप होता था कि इन मशीनों के साथ सत्तारूढ़ दल ने छेड़छाड़ कर फर्जी मतदान करवाया है।
पिछले तीन लोकसभा तथा कई विधान सभा चुनावों में हारने के बाद कांग्रेस पार्टी और इसके बड़े नेता राहुल गाँधी ने बार बार बार आरोप लगाया कि बीजेपी इन मशीनों के जरिये ही सत्ता में आई. उन्होंने कहा कि बीजेपी चुनाव आयोग के साथ मिलकर वोटों की चोरी करती आ रही है . उन्होंने वायदा किया कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो वह फिर से कागज़ के मतपत्रों से चुनाव करवाने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
चुनाव संबंधी कानून के अनुसार ई वी .एम् का उपयोग केवल लोकसभा तथा विधान सभा चुनावों में ही होता है .क्योंकि चुनाव संबधी कानून के अनुसार ये दोनों चुनाव इस आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
स्थानीय निकायों तथा पंचायत राज संस्थायों के चुनाव राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते है . इसके लिए राज्य सरकारों ने अपने अपने चुनाव आयोग बनाये है . इनके चुनावों में कौन सी मतदान प्रक्रिया अपनाई जाये यह निर्णय करने का अधिकार राज्य सरकारों तथा उनके चुनाव पास है . क्योंकि ई. वी .एम् के जरिये मतदान बेहतर माना जाता है इसलिए लगभग सभी राज्य सरकारों ने इस प्रकिया को ही अपनाना तय किया . पर कुछ दिन पहले कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने तय किया कि राज्य के स्थानीय निकायों तथा पंचायत राज संस्थायों के चुनाव भविष्य में कागज़ के मतपत्रों से ही होंगे . इसके लिए इनके चुनाव संबधी कानून में संशोधन किया जायेगा।
ऐसा माना जाता है कि कांग्रेस आला कमान, विशेषकर राहुल गाँधी ने, राज्य के मुख्यमत्री सिद्धारामिया को यह निदेश दिया कि वे इस बात को पुख्ता करें कि राज्य में स्थानीय निकायों और पंचायत राज संस्थायों के चुनाव केवल मतपत्रों के जरिये ही हों। यहाँ इस बात का उल्लेख करना जरूरी है कि राहुल गाँधी ने वोट चोरी का पहला आरोप बंगलुरु शहर के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में ई वी एम के साथ छेड़ छाड़ करने लगाया था।
राज्य की राजधानी बंगलुरु में महा नगर निगम के चुनाव सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जून महीने पूर्व करवाए जाने है . नगर निगम के पिछले चुनाव 2015 हुए थे , लेकिन वार्डों के पुनर्सीमन के विवाद के चलते इसके चुनावों में विलम्ब हुआ . पहले वार्डों की संख्या 200 के आस पास थी जो अब बढ़ कर 369 हो गई है। राज्य सरकार तय किया है कि इन चुनावों से पूर्व राज्य के स्थानीय निकायों तथा पंचायत राज संस्थायों संबधी कानून में संशोधन कर दिया जायेगा. इस संशोधित कानून के जरिये पहला चुनाव बंगलुरु महा नगर निगम का ही होगा. लेकिन इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि ऐसे संशोधित कानून को अदालत में चुनौती दी सकती है। (लेखक का अपना अध्ययन एवं अपने विचार है)

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