दक्षिण के कांग्रेस नेता राहुल गाँधी से नाखुश

लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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कांग्रेस पार्टी में ऐसे नेताओं के संख्या लगातार बढ़ रही है जो राहुल गाँधी के नेतृत्व से खुश नहीं है, बीच बीच में कांग्रेस के दिग्गज नेता तथा मध्य प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री , जो कांग्रेस की सेंट्रल वर्किंग कमेटी के सदस्य भी है, अपनी नाराजी जाहिर करते रहते है . लेकिन उनके मुखर विरोध लेकर अब पार्टी के दक्षिणी राज्यों के नेता इस मुद्दे पर आगे है . उनमें से कुछ का कहना है कि अब राहुल गाँधी को खुद ही पार्टी नेतृत्व से हट जाना चाहिए . कुछ ने तो यहाँ तक कह डाला है कि गाँधी को विपक्ष के गठबंधन के संयोजक का पद भी छोड़ देना चाहिए तथा गठबंधन के किसी छोटे दल के नेता को यह पद दे देना चाहिए।
अभी तक राहुल गाँधी का विरोध करने वालों में केरल से चार बार लोकसभा के सदस्य शशि थरूर ही आगे थे . वे कांग्रेस की शीर्ष वाली कार्य समिति के सदस्य है . उनका विरोध राहुल गाँधी के खिलाफ व्यक्तिगत न हो कर उनके दवारा उठाये जाने वाले मुद्दों को लेकर था . उनका कहना था कि राहुल गाँधी ने इंडिया गठबंधन के नेता के रूप में जो भी चुनावी अथवा संसद में उठाये वे गठबंधन के कई घटकों को भी ठीक नहीं लगे . बीच में तो स्थिति यहाँ तक पहुँच गई थी कि केरल में पार्टी ने स्थानीय निकायों तथा पंचायतों के चुनावों में मिली भारी जीत के बाद वहां एक महापंचायत आयोजित की गई थी . इसे राहुल गाँधी से पूर्व शशि थरूर ने संबोधित करना था लेकिन उन्हें बोलने के लिए बुलाया तक नहीं गया . जिस ढंग से थरूर बीजेपी के नेतृत्व वाली एन. डी. ए . की कार्य शैली और नीतियों का समर्थन कर रहे थे उससे ये धारणा बनती जा रही थी कि वे देर सवेर बीजेपी में चले जायेंगे . लेकिन कुछ दिन पूर्व उन्होंने कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा राहुल गाँधी से मिलकर साफ कर दिया कि वे कांग्रेस से दूर नहीं जा रहे बल्कि कांग्रेस में ही रहेंगे . उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे कांग्रेस की निर्धारित नीतियों पर चलेंगे लेकिन अगर केंद्र की सरकार कोई अच्छा काम करती है तो उसकी सराहना भी करेंगे . थरूर संसद की विदेशी मामलों के समिति के अध्यक्ष हैं तथा वे अकसर सरकार की विदेश नीति की प्रशंसा करते रहते हैं।
शशि थरूर का मामला अभी ठंडा पड़ ही रहा था कि दक्षिण में कभी बड़े नेता रहे मणि शंकर अय्यर ने केरल में वाम सरकार के एक आयोजन में कहा कि राज्य की वाम सरकार कई राज्यों से अच्छा काम कर रही है . कांग्रेस पार्टी की सरकारों को इससे कुछ सीखना चाहिए।
बाद में उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा ही कि राहुल गाँधी कोई योग्य नेता नहीं है . उन्हें तुरंत इंडिया गठबंधन के संयोजक पद से हट जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि वे गांधीवादी , नेहरुवादी तथा राजीववादी है और कभी भी राहुलवादी नहीं बन सकते .उनके इस साक्षात्कार के बाद कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा कि अय्यर अब कांग्रेस में नहीं है . उधर अय्यर ने कहा कि वे अभी भी कांग्रेस में है. वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य हैं . लेकिन यह अलग बात है कि पिछले बीस साल से उन्हें किसी भी मंच से बोलने नहीं दिया गया . अय्यर, जो 4 बार सांसद रहे है , एक समय भारतीय विदेश सेवा थे . जब राजीव् गांधी देश के प्रधान मंत्री बने तो वे उनके बहुत नज़दीक हो गए . बाद में उनको प्रधानमंत्री कार्यालय में ऊँचे पद पर नियुक्त किया . 1989 में उन्होंने सरकारी सेवा से त्यागपत्र दे दिया तथा राजनीति कूद पड़े . वे तीन बार तमिलनाडु से लोकसभा का चुनाव जी कर आये . वे केंद्र में मंत्री भी रहे. बाद में उनको राज्य सभा का सदस्य भी मनोनीत किया गया . वे इस समय 84 साल के है तथा दिल्ली के एक महंगे इलाके में रहते है . उनको लगता है कि उन्हें एक बार फिर राज्य सभा का सदस्य बनाया जाये . उनका दावा है कम से दो बार उनको राज्य सभा का सदस्य बनाये जाने का वायदा किया गया लेकिन बाद में बिना कोई कारण बताये उनका नाम आगे नहीं बढाया गया . वे अकसर अपने विवादस्पद बयानों तथा टिप्पणियों के कारण सुर्खियों में आते रहे है . उन्होंने ही 2014 ,में नरेन्द्र मोदी का नाम लेते हुए कहा था कि “चाय बेचने वाला कभी देश का प्रधान मंत्री नहीं बन सकता” . बाद उन्होंने पिछड़ा वर्ग की जातियों के लिए “नीच जाति” शब्द का उपयोग किया था . इन दोनों टिप्पणियों के लिए उनकी बड़ी आलोचना हुई थी . लेकिन अय्यर का कहना है कि उनका आशय ऐसा नहीं था उन्हें गलत ढंग से उद्धरित किया गया था। (लेखक का अपना अध्ययन एवं अपने विचार हैं)

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