

www.daylifenews.in
जयपुर। कलानेरी आर्ट सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय बहुविषयी कला रेज़िडेंसी “ट्रेडीशंस इन ट्रांजिशन” के अंतर्गत चल रही कार्यशालाओं की श्रृंखला में प्रिंटमेकिंग और टेक्सटाइल आर्ट वर्कशॉप्स सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी हैं। इन कार्यशालाओं में प्रतिभागियों ने कलाकारों के साथ मिलकर विभिन्न कला प्रक्रियाओं का अनुभव प्राप्त किया और अपने स्वयं के आर्टवर्क तैयार किए।
टेक्सटाइल वर्कशॉप में आर्टिस्ट निशिगंधा खलदकर ने बताया की जो छात्र व छात्राएं हैं इस वक्त इस विधा को सीख रहे हैं उनका एक बहुत अच्छा इंटरेस्ट डेवलप हो रहा है क्योंकि इसमें पुराने फैब्रिक को अपने विचारधारा के साथ जोड़कर कैनवास पर एक नया स्वरूप प्रदान कर रहे हैं।
अब इस श्रृंखला की अगली और विशेष प्रस्तुति के रूप में माता-नी-पाछेड़ी वर्कशॉप का आयोजन 18 और 19 मार्च को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक किया जाएगा। यह दो दिवसीय वर्कशॉप प्रसिद्ध लोक कलाकार दिलीप चितारा द्वारा संचालित की जाएगी।
माता-नी-पाछेड़ी गुजरात की लगभग 700 वर्ष पुरानी पारंपरिक लोक कला है, जो देवी-पूजा से जुड़ी एक विशिष्ट चित्रण परंपरा है। इन चित्रों को कपड़े पर प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक तकनीकों के माध्यम से बनाया जाता है। दिलीप चितारा इस कला के प्रतिष्ठित कलाकार हैं, जो एक समृद्ध पारिवारिक परंपरा से जुड़े हैं। उनके पिता को राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है, वहीं दिलीप जी स्वयं भी कम उम्र में ही राज्य पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं और पिछले कई दशकों से इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। यह वर्कशॉप प्रतिभागियों को इस दुर्लभ और जीवंत कला परंपरा को करीब से समझने और स्वयं अनुभव करने का अवसर प्रदान करेगी।