प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ता आमजनता के बीच जाकर जनजागरण करेंगे : डोटासरा

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जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रदेश में संगठन बढ़ाओ-लोकतंत्र अभियान प्रारम्भ किया जा रहा है, अभियान के तहत प्रदेश के सभी नगर निकायों के वार्डों और ग्राम पंचायतों पर वार्ड कांग्रेस कमेटी तथा ग्राम पंचायत कांग्रेस कमेटियों को गठन किया जायेगा। इस अभियान के अन्तर्गत कांग्रेस के 5 लाख नये पदाधिकारियों को जोडऩे का कार्य होगा। 30 दिवस तक चलने वाले इस अभियान के तहत प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ता आमजनता के बीच जाकर जनजागरण करेंगे कि नगर निकाय व पंचायती राज चुनाव ना करवाकर भाजपा की राजस्थान सरकार ने लोकतंत्र को समाप्त करने का कार्य किया है व प्रजातंत्र के सिद्धांतों के विपरीत कार्य किया है। लोकतंत्र पर प्रहार और प्रजातंत्र का अपमान तो उसी दिन हो गया था जब प्रदेश में दिल्ली से पर्ची भेजकर सरकार थोपी गई थी। उक्त विचार राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, जयपुर पर मीडिया को सम्बोधित करते हुये व्यक्त किये।
श्री डोटासरा ने कहा कि सरकार गठन के ढाई वर्ष पूर्ण होने को है, लेकिन बताने के लिये सरकार के पास कोई उपलब्धि नहीं है। प्रदेश में सभी नगर निकायों के कार्यकाल समाप्त हो चुके हैं, पंचायत राज संस्थाओं में 112 पंचायत समितियों को छोडक़र सभी पंचायत समितियों व समस्त ग्राम पंचायतों को कार्यकाल समाप्त हो चुका है, कुछ स्थानों पर तो एक वर्ष से अधिक समय से चुनाव नहीं हुये हैं, प्रशासक लगा दिये गये हैं। सरकार जानबूझकर चुनाव नहीं करवा रही है, विभिन्न प्रकार के बहाने बनाकर समय-समय पर चुनाव आगे सरकाये गये, अब ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट नहीं मिलने का बहाना बनाकर चुनाव टाले जा रहे हैं, सरकार कानून को नहीं मान रही है, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की पालना नहीं कर रही है, अपनी मनमर्जी से सरकार भाजपा चला रही है। भाजपा शासन में सभी नगर निकायों और पंचायतों की जो स्थानीय सरकार है का कार्य प्रशासक बिठाकर ठप्प कर दिया है जिससे स्थानीय स्तर पर होने वाला विकास भी पूर्णतया ठप्प हो गया है। राजस्थान उच्च न्यायालय की खण्डपीठ ने नगर निकाय एवं पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव 15 अप्रेल से पूर्व कराने का आदेश दिया है, यह आदेश 14 नवम्बर, 2025 को पारित हो गया, 15 अप्रेल तक यदि सरकार चुनाव नहीं करवाये तो न्यायालय आदेश की अवमानना की कार्यवाही होगी। ओबीसी आयोग को प्रतिनिधित्व के लिये तीन माह में रिपार्ट देने के लिये गठन किया गया था, ताकि जनाधार आदि देखकर एक समरी इनक्वाईरी सरकार से मौजूदा डेटा लेकर रिपोर्ट देनी थी और इसी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ओबीसी प्रतिनिधत्व देकर सरकार को चुनाव करवाने थे, किन्तु जानबूझकर भाजपा सरकार ने ओबीसी आयोग का कार्यकाल बार-बार बढ़ाया, अब सितम्बर तक बढ़ा दिया है, जिसका तात्पर्य यह है कि ओबीसी आयोग का कार्यकाल 12 महिने का हो गया है, लेकिन फिर भी रिपोर्ट नहीं ली जा रही है। आयोग गठन के शुरूआती 6 महिने में तो संसाधन ही सरकार ने आयोग को नहीं दिये और अब जब रिपोर्ट तैयार है तो सरकार जानबूझकर रिपोर्ट नहीं ले रही है कि अगर रिपोर्ट आ गई तो चुनाव करवाने पड़ेगें, लेकिन भाजपा आज की परिस्थिति में जनता का सामना करने की स्थिति में नहीं है। भाजपा को नगर निकाय और पंचायत राज चुनावों में बड़ी हार का सामना करना पड़ेगा और भाजपा सरकार की पोल खुल जायेगी, क्योंकि ढाई वर्ष में कुशासन से जनता त्रस्त है। माननीय उच्चतम न्यायालय का 04/12/2021 का निर्णय है जिसके तहत् ओबीसी आयोग का गठन कर प्रतिनिधित्व कर रिपोर्ट लेना आवश्यक है, उस फैसले में भी यह वर्णित है कि यदि सरकार ओबीसी प्रतिनिधित्व की रिपोर्ट नहीं लेती है तो केवल इस आधार पर भी चुनाव नहीं रोके जा सकते हैं। ओबीसी आयोग की प्रतिनिधित्व के लिये रिपोर्ट नहीं आना सरकार की विफलता है, इसकी जवाबदेही सरकार की है, किन्तु सत्ता में बैठे हुये भाजपा नेता बेतुके तर्कों के आधार पर कांग्रेस नेताओं पर तंज कस रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अब यह स्पष्ट है कि सरकार नगर निकाय एवं पंचायत राज के चुनाव नहीं करवा रही है तो अब राज्य सरकार को यह बताना चाहिये कि जब एसआईआर के पश्चात् शुद्ध वोटर लिस्ट सरकार को मिल चुकी है तो राज्य सरकार जनवरी, 2025 की वो दूषित वोटर लिस्ट में एसआईआर के तहत् एबसेंट, शिफ्टेड और डेथ के आधार पर जिन लोगों के नाम काटे थे, उन्हें शामिल रखते हुये चुनाव इसी सूची से क्यों करवाना चाहती है। दूषित मतदाता सूची में 5 करोड़ 46 लाख 56,215 मतदाता थे, इन्हीं के आधार पर वार्डों का गठन कर इन्हें ही मतदाता मान सरकार ने चुनाव कार्यक्रम बनाया है, जबकि उक्त समय जल्दी चुनाव कराने के लिये सरकार ने इस निर्णय को सहीं ठहराया था। एसआईआर के पश्चात् एएसडी के तहत् 41 लाख 84,891 तथा ड्राफ्ट सूची प्रकाशन के बाद 2 लाख 42,760 मतदाता गलत मानकर सूची से हटाये गये और 12 लाख 91,365 नये जोड़े गये। वर्तमान में शुद्ध वोटर लिस्ट के अनुसार 5 करोड़ 15,19,929 मतदाता प्रदेश में है, किन्तु विडम्बना है कि राज्य सरकार ने चुनाव भी आगे सरका दिये लेकिन नगर निकाय एवं पंचायतों के चुनाव शुद्ध वोटर लिस्ट से कराने की बजाए पुरानी जनवरी, 2025 की वोटर लिस्ट से ही चुनाव कराने पर सरकार आमदा है जिसके विरोध में आगामी दो-तीन दिन में प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा चुनाव आयोग को ज्ञापन देकर नगर निकाय और पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव एसआईआर के पश्चात् जारी वोटर लिस्ट से कराने की मांग की जायेगी। अगर मांग स्वीकार नहीं हुई तो कांग्रेस पार्टी राजस्थान उच्च न्यायालय में शुद्ध वोटर लिस्ट से चुनाव कराने हेतु याचिका पेश करेगी।
डोटासरा ने कहा कि अभियान के तहत् 01 अप्रेल, 2026 से 07 अप्रेल तक सभी विधानसभा समन्वयक तथा ब्लॉक अध्यक्ष मण्डल कांग्रेस कमेटियों की बैठक लेकर ग्राम पंचायत व वार्ड और मण्डल स्तर पर जनजागरण कार्यक्रम आयोजित करेंगे, विरोध-प्रदर्शन करेंगे, साथ ही ग्राम पंचायत व वार्ड कांग्रेस कमेटियों के गठन का कार्य करेंगे। 08 अप्रेल से 14 अप्रेल तक सभी जिलाध्यक्ष एवं विधानसभा समन्वयक तथा जिला प्रभारी ब्लॉक स्तरीय जनजागरण अभियान व विरोध-प्रदर्शन आयोजित करेंगे। दिनांक 15 अप्रेल से 30 अप्रेल तक संगठन बढ़ाओ-लोकतंत्र बचाओ अभियान के तहत् सभी जिला कांग्रेस कमेटियां अपने जिले में बैठक आयोजित कर जिला स्तरीय जनजागरण अभियान के तहत् विरोध-प्रदर्शन तथा जनसभा आयोजित करेंगे। (Pressnote)

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