
लेखक: डॉ. पी.डी. गुप्ता
पूर्व निदेशक ग्रेड वैज्ञानिक, कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र, हैदराबाद, भारत
अनुवाद : फातिमा जौहर (अहमदाबाद)
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दुनिया का पहला पूरी तरह से सिंथेटिक प्लास्टिक ‘बैकेलाइट’ था, जिसका आविष्कार 1907 में न्यूयॉर्क में लियो बैकलैंड ने किया था; उन्होंने ही “प्लास्टिक” शब्द गढ़ा था। जब इंसान खाना खाते हैं, पानी पीते हैं या सांस लेते हैं, तो प्लास्टिक उनके शरीर के अंदर चला जाता है। हवा, पानी या खाना माइक्रोप्लास्टिक से दूषित होते हैं। कुछ अनुमानों के अनुसार, अमेरिका में लोग हर साल 74,000 से 121,000 माइक्रोप्लास्टिक के टुकड़े खा जाते हैं या सांस के ज़रिए अपने शरीर में ले लेते हैं। अब तक की हालिया रिसर्च से यह साफ़ हो गया है कि माइक्रोप्लास्टिक हर जगह मौजूद हैं; ये कण सांस लेने के दौरान या खाने-पीने की चीज़ों के ज़रिए नियमित रूप से लोगों के शरीर में प्रवेश करते हैं, और शरीर के ज़रूरी अंगों तक पहुँच जाते हैं।
हमारे खाने में माइक्रोप्लास्टिक्स के बारे में इतनी परेशान करने वाली खबरों के बीच, हमारा मन एक अच्छी सी चाय पीकर खुद को तसल्ली दे सकते हो। लेकिन, इतनी जल्दी भी नहीं। एक नई स्टडी से पता चला है कि “सिल्क जैसे” टी बैग्स में बनी चाय के एक कप में अरबों प्लास्टिक के कण हो सकते हैं। रिसर्च करने वालों ने प्लास्टिक के टी बैग्स को गर्म पानी में डुबोया, और पाया कि एक कप में निकलने वाले कणों की संख्या, दूसरे खाने और ड्रिंक्स में पाए जाने वाले कणों से कई गुना ज़्यादा थी; उन्होंने इस हफ़्ते ‘एनवायरनमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ में यह रिपोर्ट दी है। वैज्ञानिकों को अभी पक्का नहीं पता कि ये कण चाय पीने वालों के लिए कोई खतरा पैदा करते हैं या नहीं, क्योंकि माइक्रोप्लास्टिक्स के इंसानी सेहत पर पड़ने वाले असर पर बहुत कम स्टडीज़ हुई हैं। हालाँकि, जब उन्होंने पानी के कीड़ों (water fleas) को माइक्रोप्लास्टिक्स के संपर्क में लाया, तो उन्होंने बताया कि वे छोटे जीव “पागलों की तरह” तैरने लगे। ज़ाहिर है, वे कण छोटे जीव के लिए बिल्कुल भी सही नहीं थे।
क्या प्लास्टिक कभी शरीर से बाहर निकलता है?
प्लास्टिक के बड़े टुकड़े मल-त्याग के ज़रिए आपके शरीर से बाहर निकल सकते हैं, लेकिन ऐसे भी मामले सामने आए हैं जहाँ यह शरीर में ही सोख लिया जाता है या पेट में ही पड़ा रहता है। रासायनिक रूप से, प्लास्टिक के छोटे-छोटे टुकड़े हमारे शरीर में सोख लिए जा सकते हैं और हमें ज़हरीला बना सकते हैं। लेकिन हम प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करके अपने शरीर को एक ऐसी संतुलित अवस्था (homeostasis) में रख सकते हैं, जो हर समय खुद को विष-मुक्त (detoxify) करती रहती है। और अच्छी बात यह है कि सही खान-पान और एक स्वस्थ शरीर की मदद से, BPA और BPS जैसे रसायन हमारे शरीर से तेज़ी से बाहर निकाले जा सकते हैं—आमतौर पर 24 घंटों के भीतर ही।
किन खाद्य पदार्थों में माइक्रोप्लास्टिक्स की मात्रा ज़्यादा होती है?
सेब और गाजर में माइक्रोप्लास्टिक के कणों का स्तर सबसे ज़्यादा होता है। हालाँकि, माइक्रोप्लास्टिक्स नाशपाती, ब्रोकली, लेट्यूस, आलू, मूली और शलजम जैसी दूसरी फ़सलों में भी पाए गए हैं। माना जाता है कि फलों और सब्जियों में यह मिलावट तब होती है, जब पौधे अपनी जड़ों के ज़रिए ऐसा पानी सोखते हैं जिसमें माइक्रोप्लास्टिक्स मौजूद होते हैं।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में माइक्रोप्लास्टिक्स से बचने के आसान तरीके
खाने को कभी भी प्लास्टिक के डिब्बों में माइक्रोवेव न करें और न ही टेकअवे कप का इस्तेमाल करें। सीफ़ूड ज़्यादा न खाएं, क्योंकि समुद्री जीव प्लास्टिक से दूषित होते हैं। (फ़िल्टर किया हुआ) नल का पानी पिएं और पीने के पानी को कभी भी प्लास्टिक की टंकियों में जमा करके न रखें। सिर्फ़ प्लास्टिक-मुक्त कॉस्मेटिक्स और माइक्रोबीड-मुक्त ब्यूटी प्रोडक्ट्स का ही इस्तेमाल करें। (लेखक का अपना अध्ययन एवंअपने विचार हैं)