
www.daylifenews.in
भीलवाड़ा। जब समाज अपनी माताओं और बुजुर्ग महिलाओं का सम्मान करना भूल जाता है, तब केवल परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के संस्कार कमजोर होने लगते हैं। इसी विचार को साकार करते हुए लाडो सेवा फाउंडेशन द्वारा महिला सुरक्षा एवं सम्मान समारोह का भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन बापूनगर ए सेक्टर स्थित पिपलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में किया गया।
इस गरिमामयी समारोह में समाज के निर्माण, परिवारों के संस्कारों के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों को नैतिक मूल्यों से जोड़ने में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाली बुजुर्ग मातृशक्ति का सार्वजनिक सम्मान किया गया। समारोह का उद्देश्य केवल सम्मान करना नहीं था, बल्कि समाज को यह संदेश देना था कि जिस राष्ट्र में माताओं और महिलाओं का सम्मान होता है, वही राष्ट्र समृद्ध, सुरक्षित और संस्कारित बनता है।
कार्यक्रम में महंत मोहन शरण शास्त्री जी महाराज (निंबार्क आश्रम) एवं संत दास जी महाराज (हाथी भाटा आश्रम) की गरिमामयी उपस्थिति रही। संतों ने अपने पावन कर-कमलों से मातृशक्ति को उपारणा ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। सम्मान के इस भावुक क्षण ने उपस्थित लोगों को भारतीय संस्कृति की उस महान परंपरा का स्मरण कराया, जिसमें माता को ईश्वर के समान स्थान दिया गया है।
अपने आशीर्वचन में संत समाज ने कहा कि नारी केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि पूरे समाज की आधारशिला है। एक माँ ही बच्चों को संस्कार देती है, उन्हें सही-गलत का ज्ञान कराती है और समाज को श्रेष्ठ नागरिक प्रदान करती है। यदि मातृशक्ति सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त होगी, तभी समाज अपराधमुक्त, संस्कारित और प्रगतिशील बन सकेगा।
संत समाज ने लाडो सेवा फाउंडेशन के कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि संस्था केवल कार्यक्रम आयोजित नहीं कर रही, बल्कि समाज में सेवा, संस्कार, महिला सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता की अलख जगा रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऐसे प्रयासों की अत्यंत आवश्यकता है, जो समाज को जोड़ने, महिलाओं के सम्मान की भावना को मजबूत करने और नई पीढ़ी में सकारात्मक संस्कार विकसित करने का कार्य करें। संतों ने लाडो सेवा फाउंडेशन को आशीर्वाद देते हुए कहा कि संस्था भविष्य में भी इसी निष्ठा और समर्पण के साथ समाजहित में निरंतर कार्य करती रहे।
लाडो सेवा फाउंडेशन के संस्थापक अधिवक्ता लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक पहचान उसकी ऊँची इमारतों या आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि उस समाज में महिलाओं और बुजुर्गों को मिलने वाले सम्मान से होती है। संस्था का संकल्प है कि महिला सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और मानवीय मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाकर ऐसा वातावरण बनाया जाए, जहाँ प्रत्येक बेटी, बहन और माँ स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और गौरवान्वित महसूस करे।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि आज के समय में ऐसे आयोजन समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं। बुजुर्ग मातृशक्ति का सम्मान केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और भारतीय जीवन मूल्यों के प्रति सच्ची श्रद्धा का प्रतीक है।
समारोह का समापन संत समाज के मंगल आशीर्वाद एवं इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि “हर बेटी सुरक्षित हो, हर महिला सम्मानित हो और हर माँ का गौरव समाज की सर्वोच्च प्राथमिकता बने।”
संदेश
माँ का सम्मान केवल एक संस्कार नहीं, बल्कि सभ्य समाज की पहचान है। जो समाज अपनी मातृशक्ति को सम्मान देता है, वही समाज आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, संस्कारित और उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करता है।