
लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।
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आज के समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता बहुत तेजी से हमारे जीवन का हिस्सा बनती जा रही है। एआई काम को तेजी से आसान और तेज बना रही है। कम्प्यूटर और मशीनों को इंसान की तरह सोचने समझने सीखने और निर्णय लेने की क्षमता भी दी जाती है। कठिन कार्य को सटीकता और तेजी से पूरा करती है। समय की बचत व बेहतर परिणाम देने में सहायता करते हैं।
इसलिए भारत ने (India Ai Mission), देश में एआई के विकास और उपयोग को बढ़ाने के लिए शुरू किया। इसका उद्देश्य भारत को एआई के क्षेत्र में आत्म निर्भर बनाना, शोध को प्रोत्साहित करना और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर तैयार करना है।
इस मिशन के तहत उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग संसाधन, स्टार्टअप सहायता, एआई कोशल प्रशिक्षण तथा भारतीय भाषाओ के लिए एआई माडल विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
हालांकि की इसके नुकसान भी हैं डेटा गोपनीयता, साईबर सुरक्षा, और नेतिक उपयोग जेसी चुनौती भी है। एआई पर अधिक निर्भरता और नौकरियों पर भी प्रभाव होते हैं। भविष्य में एआई का उपयोग और बढ़ेगा। इसका इस्तेमाल सुरक्षित व जिम्मेदारी और नेतिक तरीके से हो। भारत इस मिशन में एआई के विकास पर समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है। (लेखिका के अपने विचार है)