
लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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केरलम के दो बार मुख्यमंत्री रहे पिनाराई विजयन अपने कार्यकाल में हुए कुछ घोटालों तथा मनी लौंड्री के मामलों को लेकर संकट में फंस गए है. मुख्यमंत्री बनने से पहले वे अपनी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट के लम्बे समय तक राज्य महासचिव रहे हैं . इस समय वे विधानसभा में विपक्ष के नेता है. पिछले मई माह उनके , उनकी वीणा बेटी तथा दामाद मोहम्मद रियासके घरों पर प्रवर्तन निदेशालय ने छापे मारे थे . निदेशालय के अधिकारियों का कहना है कि यहाँ मिले कुछ दस्तावेजों के बाद इन मामलों के जाँच शुरू हुई. चूँकि कानूनी प्रावधानों के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय के पास पुलिस जैसे ऍफ़ आई आर दर्ज करने जैसे अधिकार नहीं है इसलिए निदेशालय ने एक विस्तृत रिपोर्ट इस महीने के शरू में राज्य के पुलिस महानिदेशक को सौंपी तथा इन मामलों की रिपोर्ट दर्ज करने तथा आगे की जाँच करने के लिए कहा।
पुलिस महानिदेशक ने यह रिपोर्ट गृह विभाग को भेज दी तथा आग्रह किया कि इस मामले में उनको निदेश दिए जाएँ . उन्होंने संभवतः ऐसा इसलिए किया कि क्योंकि इस सारे मामलों के कई राजनीतिक पहलू भी है . विजयन एक से अधिक बार कह चुके है कि सारे मामले राजनीतिक विरोधियों को फ़साने के लिए शरू किये गए है . उनका और उनके परिवार का इन मामलों से कुछ लेना देना नहीं है।
सारे मामले वीणा की आई टी . कंपनियों से जुड़े है . इनमें से अधिकांश का मुख्यालय कर्नाटक की राजधानी बंगलुरु में है .वीणा की पहली शादी सफल नहीं रही . उनका अपने पति से जल्दी ही तलाक हो गया . कुछ वर्ष पूर्व उनकी शादी रियास से हुई. रियास ने अपनी राजनीतिक यात्रा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से शरू की तथा छात्र नेता के रूप में उभरे . बाद में वे विधान सभा के सदस्य चुने गए . विजयन ने अपनेदुसरे कार्यकाल में उनको अपने मंत्रिमडल में शामिल कर लिया. इस प्रकार वे विजयन परिवार के सदस्य बन गए. इस समय वे विधान सभा के सदस्य हैं।
प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जाँच विजयन के पहले कार्यकाल से शुरू की . वीणा को आई टी कंपनी को कोच्ची की कंपनी सी एम आर एल ने 2.78 करोड़ का भुगतान किया . यह भुगतान वीणा की कंपनी द्वारा दी गई कथित सेवायों के लिए किया गया . लेकिन प्रवर्तन ने अपनी जाँच में पाया कि वीणा की कम्पनी वास्तव में इस कंपनी को कोई सेवाएं नहीं दी. ऐसा माना जाता है कि सरकार में फंसे अपने कुछ कामों को जल्दी करवाने के लिए रिश्वत के रूप में यह राशि वीणा के खाते जमा करवाई गई . इसी प्रकार एक अन्य कंपनी ने वीणा की एक अन्य कंपनी को 3.28 करोड़ रूपये का भुगतान किया . निदेशालय के जाँच के अनुसार वीणा की कंपनियों को 20 करोड़ से अधिक राशि का भुगतान किया गया . इनमें से कुछ भुगतान दुबई स्थित भारतीय कंपनियों ने किया . निदेशालय के अनुसार इन भुगतानों में रियास ने बड़ी भूमिका निभाई थी .विजयन का दूसरा कार्यकाल आते तक वीणा ने अपनी कई कंपनियां बंद कर दीं।
2021 के विधानसभा चुनावों से कुछ पहले जनवरी 2020 में सोने के तस्करी के मामले के तार मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़ने आरोप सामने थे .उसमें विजयन काफी हद तक बाख गए लेकिन उनके प्रमुख सचिव रहे एम शिवशंकर को पहले निलम्बित किया गया तथा बाद में उनको गिरफ्तार भी कर लिया गया .यह तस्करी कूटनीतिक जरिये से हो रही थी . अन्तराष्ट्रीय समझौतों के अनुसार देश में स्थित अन्य देशों केदूतावासों तथा महावाणिज्य दूतावासों को अपने देश से भेजी डाक तथा अन्य सामानों के बैगों की जाँच नहीं की जा सकती . उस समय केंद्र की खफिया ऐजसियों को यह जानकारी मिली के केरलम की राजधानी स्थित संयुक्त अरब अमीरात से वाले वाले बैगों में सोना छिपा हुआ . विदेश मन्त्रालय की अनुमति के बाद ये बैग खोले जाने पर इसमें 30 किलो सोना पाया गया . जाँच में पता लगा कि मुख्यमत्री कार्यालय से प्रमुख सचिव ने हवाई अड्डे पर स्थित कई अधिकारियों पर यह दवाब बनाया कि इन बैगों को बिना खोले जाने दिया जाये. बताया जाता है इस मामले में शिवशंकर की एक महिला मित्र सपना सुरेश और कुछ सोने तस्कर शामिल थे .. बाद में जाँच में यह समाने आया कि इससे पहले इस तरह से 160 किलो सोने 12 बार केरलम में तस्करी से लाया जा चुका है . सपना कभी संयुक्त अरब अमीरात के यहाँ स्थित महावाणिज्य दूतावास में काम कर चुकी थी . बाद में शिवशंकर ने उसे आई टी विभाग में एक उच्च पद नियुक्त कर दिया . उस समय शिवशंकर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव होने के साथ साथ आई टी विभाग के भी प्रमुख महासचिव भी थे . कूटनीतिक स्तर पर तो मामला रफा दफा हो गया लेकिन इससे जुड़े लोगों के खिलाफ जाँच जारी रही . उस समय कांग्रेस्स्स तथा विपक्षी दलों के नेताओं ने आरोप लगाया कि इस मामले में पिनाराई खुद लिप्त है तथा उनके खिलाफ भी जाँच होनी चाहिए। (लेखक के अपने विचार हैं)