
जनरल सीट किसी की बपौती नहीं सुप्रीम कोर्ट की मुहर से आरक्षित वर्ग को ऐतिहासिक न्याय
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जयपुर। आज हम सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक निर्णय पर चर्चा कर रहे हैं, जिसमें आरक्षण से जुड़े राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को शीर्ष अदालत ने भी बरकरार रखा है। यह मामला उन अभ्यर्थियों से जुड़ा है, जो आरक्षित वर्ग से होने के बावजूद सामान्य श्रेणी से अधिक अंक लाकर भी जनरल सूची में शामिल नहीं किए जा रहे थे। इस लड़ाई को राजस्थान हाई कोर्ट तक पहुंचाने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता कुलदीप असवाल से विशेष बातचीत।
प्रश्न: आपको बहुत-बहुत बधाई कि अनुसूचित जाति जनजाति व अन्य आरक्षित वर्ग के लिए जो केस आपने राजस्थान हाई कोर्ट में लड़ा, वह सुप्रीम कोर्ट में भी बरकरार रहा। इस जीत को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर: मैं सदैव से ही इस प्रयास में रहा हूं कि अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य आरक्षित वर्ग के बच्चों के साथ न्याय हो। इसी उद्देश्य से हमने राजस्थान हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत की थी। माननीय हाई कोर्ट ने हमारे तर्कों को स्वीकार किया और अब माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी उसी निर्णय को बरकरार रखते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि ओपन कैटेगरी सभी के लिए खुली है। यह केवल एक केस की जीत नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा हुआ न्याय है।
प्रश्न: इस मामले की मूल समस्या क्या थी?
उत्तर: समस्या यह थी कि कई प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुसूचित जाति जनजाति के अभ्यर्थी सामान्य श्रेणी से अधिक अंक ला रहे थे, फिर भी उन्हें जनरल सूची में शामिल नहीं किया जा रहा था। हमने अदालत के समक्ष यह रखा कि ओपन कैटेगरी सभी के लिए होती है। यदि कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार बिना किसी रियायत के अधिक अंक लाता है, तो उसे सामान्य श्रेणी में ही चयनित किया जाना चाहिए।
प्रश्न: हाई कोर्ट प्रशासन की ओर से क्या तर्क दिए गए थे?
उत्तर: यह कहा गया कि यदि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को जनरल सूची में लिया गया तो उन्हें दोहरा लाभ मिलेगा। लेकिन माननीय हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए स्पष्ट कहा ओपन कैटेगरी सभी के लिए खुली है और आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार बिना किसी रियायत के इसमें शामिल हो सकता है।
प्रश्न: जब यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, तब शीर्ष अदालत ने क्या कहा?
उत्तर: राजस्थान हाई कोर्ट बनाम रजत यादव मामले में माननीय जस्टिस दीपांकर दत्त और जस्टिस ए.जी. मसीह की खंडपीठ ने अपील को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 16(4) तथा पूर्व न्यायिक निर्णयों के आधार पर राजस्थान हाई कोर्ट का फैसला पूरी तरह सही है। इससे यह स्थापित हो गया कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी सामान्य श्रेणी से अधिक अंक लाता है, तो उसे जनरल कैटेगरी में ही स्थान मिलेगा।
प्रश्न: इस फैसले का देशभर के छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: यह फैसला पूरे देश के लिए मार्गदर्शक है। अब कोई भी संस्था या आयोग यह नहीं कह सकता कि आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार, अधिक अंक लाने के बावजूद, जनरल सूची में नहीं आएगा। यह निर्णय मेधा का सम्मान करता है और संविधान की मूल भावना को मजबूत करता है। यह फैसला केवल कानूनी जीत नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है। अधिवक्ता कुलदीप असवाल की यह लड़ाई अब लाखों छात्रों के लिए आशा की किरण बन चुकी है। अब साफ है जनरल कैटेगरी किसी की बपौती नहीं यह हर योग्य उम्मीदवार के लिए खुली है।