जिले की नदियां वेंटिलेटर पर, बहते देखना नामुमकिन

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थानागाजी। निकटवर्ती गांव गोवडी के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में एल पी एस विकास संस्थान द्वारा जीवन जतन यात्रा के तहत नदी पाठशाला कार्यक्रम में बच्चों को सम्बोधित करते हुए संस्थान के प्रकृति प्रेमी राम भरोस मीणा ने कहा की नदियों का अब बहना नामुमकिन है, नदियों को वाटर हार्वेस्टिंग के नाम पर छोटे बड़े बांध बनाकर लुटा जा रहा है। अलवर जिले की सभी नदियां वेंटिलेटर पर सांसें गिन रही है, एक मात्र रूपारेल जो बहती हुई दिखाई देती इसके उद्गम स्थल पर ही दर्जनों छोटे बड़े बांध बनने से वह भी बहती नहीं दिखाई देंगी। नदियों के खत्म होने से जलिय जीव नष्ट होने के साथ वन्यजीवों के पेयजल का संकट पैदा होता दिख रहा है।
नदी पाठशाला में विधार्थियों के साथ आपसी संवाद प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम रखा गया, जिसमें पाया कि आज युवा पीढ़ी जोहड़ तथा नदी की महत्ता को भुल ही नहीं गए बल्कि अपने स्थानीय नदियों नालों को पहचान भी नहीं पा रहे हैं, गोवडी के नजदीक बहनें वाली गुमनाम नदी के अस्तित्व को खत्म होते देख नाला बताया, गोचछया का नाला जो विद्यालय से महज़ सो मीटर दुर से बहता था, युवाओं ने पहचान से मना कर दिया। कार्यक्रम में सहयोगी रहे व्याख्याता कुलदीप चन्द बुनकर, वरिष्ठ अध्यापक हरिश कुमार वर्मा के सहयोग से छात्रों से निकल कर सामने आया की हमारी नदियों को प्रशासनिक उदासीनता तथा लोगों की हठधर्मिता के साथ मारा जा रहा है, वर्षा की अनिश्चितता, बदलते पारिस्थितिकी तंत्र और खत्म होती पहाड़ियां तथा वनस्पतियां मुख्य रहें, युवाओं ने बताया की धुणीनाथ जी के पास नदी में खेत बना दिए गये, नदी आगे नहीं बहती है।
पाठशाला में सभी छात्र छात्राओं के साथ वरिष्ठ अध्यापक मुकेश कुमार, नंदकिशोर सैनी, अध्यापक सुरेन्द्र कुमार व बबली यादव उपस्थित रहे तथा विद्यालय परिवार का पुर्ण सहयोग रहा।

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