
लेखिका : ममता सिंह राठौर
कानपुर (उत्तर प्रदेश)
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बात सच से सच तक होगी
बेफ्रिक रहो सब निष्पक्ष होगी
मेरे हाथ में गीता और रामायण होगी
तुम यह बताओ तुम्हें कहां पे तसल्ली होगी
आज बुनियाद पे बात होगी
तुम्हारी हर बात पे बात होगी
वर्षों के अंधेरे है आज उजालो की बात होगी
तुम यह बताओ तुम्हारी हद क्या होगी
आज बात रिश्तों की होगी
तुम दिल ले आना दिमाग की जरूरत न होगी
तुम बहुत थके हो आज विश्राम की बात होगी
तुम यह तो बताओ तुम्हें खुशी किस बात पे होगी