बहुजन चेतना, सत्ता के पुनर्वितरण का ऐतिहासिक एवं शोधपरक विश्लेषण

लेखक : श्रीप्रकाश सिंह निमराजे
अध्यक्ष, गोपाल किरन समाजसेवी संस्था (GKSSS)
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विशेष शोध-लेख | 9 अक्टूबर 2026 | मान्यवर कांशीराम साहब का 20वाँ महापरिनिर्वाण दिवस
प्रस्तावना : सामाजिक परिवर्तन के लिए संगठन, प्रतिनिधित्व और सत्ता का प्रश्न
मान्यवर कांशीराम साहब का जीवन और आंदोलन आधुनिक भारत में सामाजिक न्याय, दलित-बहुजन राजनीतिक चेतना और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। 9 अक्टूबर 2026 को उनके 20वें महापरिनिर्वाण दिवस पर उनका स्मरण केवल श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं होना चाहिए; यह अवसर उनके विचारों, संगठनात्मक प्रयोगों, राजनीतिक उपलब्धियों और आंदोलन की चुनौतियों का गंभीर मूल्यांकन करने का भी है।
भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और राजनीतिक भागीदारी का अधिकार प्रदान करता है। लेकिन औपचारिक अधिकारों और वास्तविक सामाजिक समानता के बीच अंतर बना रह सकता है। जातिगत भेदभाव, आर्थिक असमानता, शिक्षा तक असमान पहुँच और संस्थागत निर्णयों में सीमित भागीदारी जैसे प्रश्न लोकतंत्र की वास्तविक गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। कांशीराम साहब की राजनीति इसी अंतर को संबोधित करने के प्रयास के रूप में समझी जा सकती है।

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