भामाशाह बजाज बोले – इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म

गुप्त दान करने वाले महेश बजाज पर जमाना नाज करता हैं
जाफर लोहानी
www.daylifenews.in
मनोहरपुर (जयपुर)। कहते हैं कि दान ऐसा हो कि दाएं हाथ दे तो बाएं हाथ को पता भी ना चले। शाहपुरा के भामाशाह महेश बजाज इसी कहावत की जीती – जागती मिसाल हैं।
कर्तव्यनिष्ठ, परिश्रमी, ईमानदार और दयालु बजाज जी सालों से गरीबों की तन-मन-धन से मदद कर रहे हैं, पर दिखावा इन्हें बिल्कुल पसंद नहीं।

  1. लॉकडाउन में बने गरीबों का सहारा
    जब कोरोना की महामारी में पूरी दुनिया घरों में कैद थी, तब महेश बजाज जी सड़कों पर थे। मजदूर, बेसहारा, दिहाड़ीदारों के घर-घर जाकर निःशुल्क खाद्य सामग्री के पैकेट पहुंचाए। आटा, दाल, चावल, तेल, सब्जी, सब कुछ। किसी को भूखा नहीं सोने दिया। साथ में हजारों मास्क और सैनिटाइजर भी मुफ्त बांटे। वो भी बिना फोटो, बिना बैनर के।
  2. गुप्त दान के बेताज बादशाह
    महेश बजाज जी का दान करने का अंदाज ही निराला है। जब ये सीधे हाथ से बंद मुट्ठी से दान देते हैं, तो बाएं हाथ को भी पता नहीं चलता कि क्या दान किया गया। ना अखबार में नाम छपवाते हैं, ना मंच से ऐलान करते हैं। कहते हैं कि ऊपर वाला देख रहा है, वही काफी है। किसी की इज्जत का पर्दा नहीं हटाते।
  3. गरीब की झोपड़ी से लेकर अस्पताल तक मदद
    किसी गरीब की बेटी की शादी हो तो बजाज जी चुपचाप मदद कर देते हैं। किसी का इलाज पैसे के अभाव में रुका हो तो अस्पताल का बिल भर देते हैं। सर्दी में कंबल, गर्मी में प्याऊ, बच्चों के लिए कॉपी-किताब। हर मौके पर सबसे आगे, पर सबसे पीछे खड़े रहते हैं।
  4. दौलत नहीं, दिल बड़ा है
    लोग कहते हैं कि बजाज जी के पास दौलत है इसलिए दान करते हैं। पर असली बात ये है कि इनके पास दिल बड़ा है। पैसा तो बहुतों के पास है, पर खर्च करने का जिगरा महेश बजाज जैसा चाहिए। ये मानते हैं कि धन लक्ष्मी है, अगर जरूरतमंद के काम ना आए तो मिट्टी है।
    बजाज जी का संदेश
  5. इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं
  6. भूखे को रोटी देना सबसे बड़ा पुण्य
  7. मदद करके भूल जाओ, जताओ मत
  8. गरीब की दुआ सबसे बड़ी दौलत है

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