
लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के पास स्थित नालसार विधि विश्वविद्यालय अपने वार्षिक दीक्षांत समारोह को लेकर इन दिनों सुर्ख़ियों में है . यह विश्वविद्यालय देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक है . रैंकिंग के हिसाब से यह तीसरे नंबर पर आता है . इस माह के आरंभ यहाँ निकट भविष्य में होने दीक्षांत समारोह के मुख्य अथिति के रूप में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकान्त शर्मा को आमंत्रित करने का निर्णय किया गया था . जस्टिस शर्मा ने अभी तक इस पर सहमति नहीं दी है . अभी तक समारोह की तिथियाँ तय नहीं हुई हैं . ज्यों ही यह खबर छात्रों को लगी तो एक तरह का हंगामा शरु हो. गया . लगभग 450 छात्रों ने उप कुलपति को एक ज्ञापन देकर कहा कि अगर जस्टिस शर्मा को इसमें मुख्य अतिथि के रूप मे बुलाया गया तो वे समारोह का वहिष्कार करेंगे तथा उनके हाथों से डिग्रियां नहीं लेंगे . उन्होंने यह भी जता दिया कि अगर जस्टिस शर्मा का आना हुआ तो वे उनके खिलाफ प्रदर्शन भी करेंगे।
उप कुलपति की ओर से कहा गया कि अभी न तो दीक्षांत समारोह की तिथियाँ तय हुई हैं और न ही मुख्य अथिति का का नामतय किया गया है . लेकिन छात्र इससे से संतुष्ट नहीं हुए तथा अपने निर्णय पर अडिग रहे . यह सब तब हुआ जब दिल्ली के जंतर मन्त्र पर कोकरोच जनता पार्टी नीट परीक्षायों के पेपर लीक होने के खिलाफ आन्दोलन अभी खत्म ही हुआ था . तथा इस आन्दोलन के सफल होने से छात्रों और युवा वर्ग में बहुत जोश था . इस विश्वविद्यालय के छात्रों के इस वर्ग का कहना था का कहना था वे ऐसे किसी व्यक्ति के हाथ से डिग्री नहीं लेंगे जिसने छात्रों और युवकों को कोकरोच और परजीवी बताया था . उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट क चीफ जस्टिस सूर्यकान्त शर्मा ने एक टिप्पणी में छात्रों और बेरोजगार युअवकों को कोकरोच और परजीवी बताया था . हालाँकि बाद में उन्होंने स्पष्टीकरण कर दिया कि यह बात उन्होंने किसी और सन्दर्भ में कही थी . समाचार पत्रों ने इसी गलत ढंग से पेश किया था . फ़िलहाल चीफ जस्टिस शर्मा के कहने पर सरे मामले की जाँच की जा रही है।
जल्दी ही इस विवाद ने बड़ा रूप ले लिया . बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया , जो वकीलों की सबसे बड़ी संस्था है , के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्र ने अपनी ओर से राज्यों की बार कौंसिलों को निदेश दिया कि वे इस विश्व् विद्यालय से अंतिम वर्ष पास करने वाले छात्रों के नाम अपने यह पंजीकृत नहीं करे . इसको लेकर इस मामले ने एक बड़ा रूप ले लिया .सुप्रीम कोर्ट कौंसिल ने कहा कि बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है के वह राज्यों की बार कौंसिलों को ऐसा निदेश दे सके. मिश्र 2014 से बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष पद पर है . वे बीजेपी के नेता के रूप में राज्य सभा सदस्य भी है . बार कौंसिल के कई सदस्यों ने यह आरोप लगाया कि मिश्र ने यह निदेश बिना सदस्यों के साथ विचार विमर्श के दिया था . मिश्र ने अपनी गलती को स्वीकार किया तथा न केवल इस निदेश को वापिस ले लिया बल्कि माफी भी मांग ली।
इस बीच विश्वविद्यालय ने मामले की जाँच के लिए एक कमेटी का गठन कर कर दिया .लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार यहीं के कुछ प्राध्यापको ने छात्रों को इस काम के लिए उकसाया था . जिन छात्रों इस में बड़ी भूमिका निभाई वे सब वाम पंथी दलों से जुड़े हुए हैं . उल्लेखनीय है कि दिल्ली में कोकरोच जनता पार्टी के जंतर मंतर अद्नोलन में वाम दलों से जुड़े छात्र संघो के कार्यकर्तायों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया था।
इसी बीच चीफ जस्टिस सूर्यकांत शर्मा ने साफ कर दिया कि यह सारा मामला उन के और छात्रों के बीच है . अन्य किसी को इसमें दखल नहीं करना चहिये . उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अगर वे वहाँ जाते है तथा वहां के छात्रों का एक वर्ग उनके खिलाफ प्रदर्शन करता ऐसा करना उनका अधिकार है . उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि उन्हें मुख्य अतिथि के रूप आमंत्रित किया गया है लेकिन अभी इस वहां जाना तय नहीं किया है।
जहाँ तक मनन कुमार मिश्र का सवाल वे पहले भी कई तरह के विवादों में रहे है . बताया जाता कि बीजेपी शीर्ष नेता मिश्र दवारा राज्य की बार कौंसिलों को लिखे पत्र से नाराज थे इसलिए उन्हें इस तुरंत वापिस लेने को कहा गया . बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया के एक वर्ग का कहना है को कौंसिल के नियमों में संशोधन किया जाये . वर्तमान नियमों के अनुसार अध्यक्ष का चुनाव दो वर्ष के लिए होता है . लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि कोई भी सदस्य कितनी बार अध्यक्ष का चुनाव लड़ सकता है। (लेखक के अपने विचार हैं)