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ए सुब्रमनि, जनरल सेक्रेटरी, वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया ने आज आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में S.I.R. (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया और मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है। किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटना केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि उसके मतदान के संवैधानिक अधिकार पर सीधा प्रभाव डाल सकता है। इसलिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और पुनः जोड़ने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह होनी चाहिए।
ए सुब्रमनि ने कहा कि S.I.R. के दौरान आम नागरिकों से पुराने दस्तावेज़ और रिकॉर्ड जुटाने की प्रक्रिया ने अनेक सवाल खड़े किए हैं। विशेष रूप से 2002 की मतदाता सूची को खंगालने और नागरिकों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए अतिरिक्त प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता पर चुनाव आयोग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पात्र नागरिक को बाद में अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में जुड़वाने का अवसर दिया जा सकता है, तो पहले उसका नाम हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कितने नाम हटाए गए, किन आधारों पर हटाए गए और कितने लोगों ने आपत्ति या आवेदन के बाद अपने नाम पुनः जुड़वाए।
वक़ार अहमद, प्रदेश अध्यक्ष, वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया, राजस्थान ने कहा कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और “वोट चोरी” से जुड़े आरोपों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इन आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच होनी चाहिए, ताकि जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकारें बदलती रहती हैं, राजनीतिक दल आते-जाते रहते हैं, लेकिन मतदाता का अधिकार और चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता स्थायी लोकतांत्रिक मूल्यों का हिस्सा है।
हमारी मांग किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि निष्पक्ष चुनाव, पारदर्शी मतदाता सूची और प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा के लिए है। इस अवसर पर संस्था पदाधिकारी फीरोज़ुद्दीन भी मौजूद थे।
ए सुब्रमनि ने कहा कि चुनाव आयोग को जनता के सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए और यदि उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मुख्य मांगें
- S.I.R. की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
- किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना उचित सूचना और सुनवाई के न हटाया जाए।
- हटाए गए नामों और उनके कारणों का पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाए।
- पात्र नागरिकों के नाम पुनः जोड़ने की प्रक्रिया सरल और सुलभ बनाई जाए।
- मतदाता सूची में हुए व्यापक बदलावों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। 6.
नागरिकों को अपनी आपत्ति दर्ज कराने और अपील करने का पर्याप्त अवसर दिया जाए। - मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें, ताकि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर उठ रहे सवालों की स्वतंत्र जांच का रास्ता साफ हो सके।
- “Vote Chori” के आरोपों पर निष्पक्ष जांच की मांग की जाए।