
लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।
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भारत आज डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देश में गिना जाता है। इसके केंद्र में है यूनिफाइड पेमेंट्स इंटर जिसने पैसे भेजने और प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरा तेज सुरक्षित और सरल बना दिया है।
यूपीआई की शुरुआत वर्ष 2016 में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम एनपीसीआई द्वारा की गई इसका उद्देश्य बैंक खातों के बीच तत्काल धन हस्तांतरण को आसान बनाना था। मोबाइल पर केवल क्यूआर कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में भुगतान किया जा सकता है। डिजिटल लंदन लोगों की आदत बन चुका है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी यूपीआई में वित्तीय समावेशन को बढ़ाया है। छोटे व्यापारी सब्जी विक्रेता रिक्शा चालक और स्वरोजगार से जुड़े लोग भी डिजिटल भुगतान स्वीकार रहे हैं। पारदर्शिता बड़ी है। समय की बचत और ग्राहकों को सुविधा मिली है
वैसे देखा जाए तो डिजिटल भुगतान के साथ साइबर सुरक्षा की चुनौतियां भी बड़ी है यूपीआई पिन को गुप्त रखा जाए, अंजान लिंक पर क्लिक न करें और केवल विश्वसनीय ऐप का उपयोग करें।
केवल जागरूकता ही सुरक्षित डिजिटल लेने देने की सबसे बड़ी कुंजी है। यूपीआई केवल मास्टर एक भुगतान प्रणाली नहीं है बल्कि भारत की डिजिटल क्रांति का प्रतीक है। उसने देश को कैशलेस और व्यवस्था की और तेजी से बढ़ाया है। आने वाले समय में इसका महत्व और बढ़ेगा। (लेखिका का अपना अध्ययन एवं अपने विचार है।)