

संविधान और नशामुक्ति का संदेश
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ग्वालियर। शिक्षा के माध्यम से सामाजिक बदलाव की दिशा में एक और मजबूत पहल के रूप में ग्वालियर के निबुआपूरा में संचालित कोचिंग संस्थान का वार्षिक स्थापना दिवस समारोह उत्साह और गरिमापूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. बी. आर. आंबेडकर, छत्रपति शाहू महाराज एवं महात्मा ज्योतिबा फुले के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। माल्यार्पण श्रीप्रकाश सिंह निमराजे, अध्यक्ष, गोपाल किरन समाजसेवी संस्था द्वारा किया गया।
इस अवसर पर श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने कहा कि समाज में शिक्षा के माध्यम से वास्तविक परिवर्तन लाने के लिए निःशुल्क शिक्षा के प्रयासों को और अधिक प्रभावी, व्यापक एवं अंतिम पायदान तक पहुँचाने की आवश्यकता है। हमारा उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उनमें सीखने की जिज्ञासा, आत्मविश्वास और बड़े सपने देखने का साहस पैदा करना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, रोचक और प्रेरणादायक शिक्षा किस प्रकार उपलब्ध कराई जाए, इस पर निरंतर प्रयास आवश्यक हैं, ताकि बच्चे नियमित रूप से अध्ययन के लिए आएँ और अपने उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार कर सकें। शिक्षा तभी सार्थक होगी, जब वह उन बच्चों तक भी पहुँचे, जहाँ आज भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुँच सीमित है।
उन्होंने कहा कि “हर बच्चा पढ़े, हर परिवार आगे बढ़े और हर व्यक्ति शिक्षित बने”—यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे अपने आसपास के जरूरतमंद बच्चों तक शिक्षा की इस पहल को पहुँचाएँ और शिक्षा की अलख को और मजबूत करें।
शिक्षा ही सबसे बड़ा परिवर्तन
श्री निमराजे ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के जीवन में आत्मनिर्भरता, सम्मान और बेहतर भविष्य के द्वार खोलती है। इसलिए समाज के प्रत्येक सक्षम व्यक्ति को शिक्षा से वंचित बच्चों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि “शिक्षा ही सबसे बड़ा परिवर्तन है” और इसी सोच के साथ एक शिक्षित एवं जागरूक भारत के निर्माण में सभी को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
जंक फूड और नशे से बचने की अपील
कार्यक्रम के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य और बेहतर जीवनशैली पर भी विशेष जोर दिया गया। श्री निमराजे ने बच्चों से मेगी, कुरकुरे, चाउमीन जैसे जंक फूड के अत्यधिक सेवन से बचने तथा नशे से पूरी तरह दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही शिक्षा एवं व्यक्तित्व विकास की मजबूत आधारशिला हैं।
बच्चों ने दी मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
समारोह में बच्चों ने विभिन्न मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों द्वारा भारतीय संविधान पर आधारित नाटक की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। नाटक के माध्यम से बच्चों ने संविधान के मूल्यों, समानता, अधिकारों और जिम्मेदारियों का संदेश प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर कुलदीप, प्रियांश, काव्या त्रिपाठी, दिव्याना मिश्रा सहित अन्य विद्यार्थियों एवं उपस्थितजनों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। बच्चों ने शिक्षा, अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और अपने भविष्य के लक्ष्यों को लेकर उत्साहपूर्वक अपनी बात रखी।
बच्चों को वितरित की गई स्टेशनरी
कार्यक्रम के अंत में बच्चों को स्टेशनरी सामग्री का वितरण किया गया। स्टेशनरी प्राप्त कर बच्चों के चेहरे पर खुशी और उत्साह दिखाई दिया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे प्रयास बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उनके भीतर आगे बढ़ने का विश्वास भी पैदा करते हैं।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यदि समाज के प्रत्येक वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने का सामूहिक प्रयास किया जाए, तो शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है। हर बच्चे तक शिक्षा पहुँचाने का संकल्प ही एक मजबूत, समान और शिक्षित समाज की आधारशिला है।
मनोज सिंह जाटव ,हिमानी वर्मा, रुद्र जाटव, राहुल सरल आदि की सक्रिय भूमिका रही।