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जयपुर। अपने एक्स हैंडल पर जालौर में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मीडियाकर्मियों से जो बातचीत की एवं उनके सवालों के जवाब दिए वे हूबहू पढ़िए :
सवाल: सर, जोधपुर के पावटा में अभी संक्रमण के कारण प्रसूताओं की मौत की गंभीर घटना हुई है, इस पर आपका क्या कहना है?
जवाब: क्या आज सुबह आपने मेरा ट्वीट देखा? अगर नहीं, तो ज़रूर देखिए। मैंने ट्वीट किया है कि मैं अभी कोटा का दौरा करके आया हूँ। यह जो घटना आप बता रहे हैं, यह बेहद गंभीर है। पहले यह कोटा में हुई, जहाँ पाँच महिलाओं की मौत हो गई। मैं वहाँ खुद पीड़ित महिलाओं से मिलकर आया हूँ, उन सबकी किडनियाँ फेल हो चुकी हैं। किसी का हफ्ते में तीन बार, तो किसी का दो बार डायलिसिस हो रहा है। ईश्वर करे कि किसी की किडनी ठीक हो जाए, ताकि उन्हें डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की नौबत न आए।
बीकानेर में भी ऐसी घटना हुई, जो एक अलग मामला था। अब आज सुनने में आया है कि जोधपुर में भी आठ महिलाओं को गंभीर रूप से इन्फेक्शन (संक्रमण) हो गया है। इतनी बड़ी घटनाओं के बाद भी सरकार पूरी तरह सोई हुई है!
मैंने कोटा में भी कहा था कि सरकार को एक गारंटी लेनी चाहिए। हमारा सरकारी अस्पताल है, जहाँ हमने दवाइयाँ, जाँचें और सारे ऑपरेशन मुफ़्त कर दिए थे। मैं सिर्फ हिंदुस्तान की बात नहीं कर रहा, दुनिया के किसी भी देश में ₹25 लाख का इलाज इस तरह मुफ़्त नहीं होता, जैसा हमने करके दिखाया। अमेरिका में बराक ओबामा के नाम पर ‘ओबामाकेयर’ योजना शुरू हुई थी, लेकिन उन्हें भी उसे बंद करना पड़ा। हमारी योजना पूरी तरह कामयाब रही।
लेकिन इसके बाद भी ये घटनाएँ हो रही हैं। सरकार की तरफ से वहाँ सिर्फ औपचारिकता के लिए इलाज चल रहा है, पर इससे क्या होगा? आप गारंटी लीजिए कि जिन महिलाओं की मौत हुई है, उनके परिवारों को क्या मुआवज़ा देंगे? जो महिलाएँ अभी अस्पताल में तड़प रही हैं, उनके पूरे परिवार चिंतित हैं। मैं उन सभी परिवारों से मिला हूँ। उनके पति और भाई कह रहे थे, ‘अभी तो सब देख रहे हैं, लेकिन जब हम डिस्चार्ज होकर घर चले जाएँगे, तब इन डॉक्टरों को कहाँ ढूँढ़ते फिरेंगे? तब हमारी सुध कौन लेगा?’ मैंने डॉक्टरों की मौजूदगी में उनसे कहा कि चिंता मत कीजिए, ये डॉक्टर आपकी प्राथमिकता पर देखभाल करेंगे।
तीसरी बात मैं यह कहता हूँ: अगर इन पीड़ित महिलाओं की किडनी ट्रांसप्लांट की नौबत आती है, तो सरकार ज़िम्मेदारी ले कि पूरा ट्रांसप्लांट सरकारी देखरेख और खर्च पर होगा। तब मैं मानूँगा कि इस सरकार में शासन करने की ईमानदारी और न्याय देने की नीयत है।
अब आप बताइए, आठ महिलाओं को एक जैसी समस्या हो रही है, जो इतिहास में यहाँ पहले कभी नहीं हुई। इसका सीधा मतलब है कि कहीं न कहीं कोई गंभीर संक्रमण है, जिसे ये लोग पकड़ नहीं पा रहे हैं। अगर एफएसएल (FSL) की रिपोर्ट आने में देरी हो रही है, तो इन्हें सैंपल तुरंत दिल्ली, बॉम्बे या कोलकाता जैसी जगहों पर भेजने चाहिए, जहाँ इसके एक्सपर्ट्स हों। इस काम को प्राथमिकता पर करना होगा, वरना और भी महिलाएँ इसी तरह पीड़ित होती रहेंगी।
चौथी बात यह है: जो महिलाएँ अस्पतालों में प्रसव (delivery) के लिए जा रही हैं, वे अब इस बात को लेकर बेहद चिंतित और डरी हुई हैं कि कहीं उनकी स्थिति भी ऐसी ही न हो जाए। यह कितनी बड़ी विडंबना है! पूरे राजस्थान में हज़ारों महिलाओं को प्रसव के लिए मजबूरन अस्पतालों में जाना पड़ता है। वे जाएँ भी तो कहाँ? प्राइवेट अस्पतालों में बहुत ज़्यादा खर्च होता है। ये तमाम बातें मैं लगातार उठा रहा हूँ।
सवाल: सर, इस संवेदनशील मुद्दे पर चिकित्सा मंत्री का जो बयान आया है, उस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
जवाब: देखिए, चाहे चिकित्सा मंत्री जी हों, शिक्षा मंत्री जी हों, वन मंत्री जी हों या दक साहब हों, स्थिति बड़ी अजीब है। कोई थाने में जाकर गाली-गलौज कर रहा है, कोई कलेक्टर को दुत्कार रहा है, तो कोई रोज़ बेतुकी बयानबाज़ी कर रहा है। सरकार में इस वक्त बेहद अजीब और चिंताजनक स्थिति बनी हुई है।
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