तमिलनाडु में पूर्व पुलिस अधिकारी नई पार्टी बनाने की तैयारी में

लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसफ विजय, जो फिल्म अभिनेता से राजनेता बने है, से प्रेरित होकर एक पूर्व पुलिस अधिकारी भी एक नई पार्टी बनाने की तैयारी में हैं। उनको लगता है कि अगर विजय दो साल पहले एक नई पार्टी टी वी के बनाकर सत्ता में आ सकते हैं तो वे भी ऐसा करने में सक्षम हैं। यह नेता अन्नामलाई हैं जो कुछ समय पहले तक राज्य में बीजेपी के एक बड़े नेता थे। अब बिना कोई गुट बंदी अथवा झगडा करके बीजेपी से अलग नहीं हुए हैं बस पार्टी के साथ विचारों में मतभेद के चलते वे बीजेपी से दूर हुए है।
अन्नामलाई, कर्नाटक कैडर केआईपीएस अधिकारी थे, वे मूलरूप से तमिलनाडु के है। लगभग 6 साल पूर्व उन्होंने पुलिस अधिकारी के नौकरी छोड़कर राजनीति में आने का निर्णय किया। उस समय वे बंगलुरु में पुलिस उपायुक्त वे पहले से ही बीजेपी संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष के संपर्क में थे इसके चलते वे बीजेपी में शामिल हो गए तथा अपने मूल राज्य तमिलनाडु में लौट आय वे न केवल अच्छे संगठक है, बहुत अच्छे वक्ता तथा तेज तरार व्यक्ति की पहचान के मालिक हैं . जल्दी ही पार्टी ने उन्हें राज्य ईकाई का अध्यक्ष बना दिया। 2021 में बीजेपी , जिसने अन्नाद्रमुक के साथ मिलकर विधान सभा का चुनाव लड़ा था , को पहली बार 4 सीटें मिली तथा इसे 3 प्रतिशत मिले . इसका अधिक श्रेय अन्नामलाई को ही दिया गया . तब से उन्होंने पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व को यह कहना शुरू किया कि अब समय आ गया है कि पार्टी अगले सभी चुनाव किसी पार्टी के साथ मिलकर नहीं बल्कि स्वतन्त्र रूप से लड़ने तैयार होना चाहिए . लेकिन पार्टी का नेतृत्व इस मत का था कि अन्नाद्रमुक एन डी .ए का सहयोगी दल है तथा उसकी राज्य में बड़ी गहरी पैठ है इसलिए पार्टी को राज्य में यह गठबंधन बनाये रखना चाहिए।
उधर अन्नाद्रमुक के अधिकतर नेता अन्नामलाई के इस रुख से नाराज़ थे। हाल में हुए राज्य विधान सभा चुनावों से कुछ महीने पहले अन्न्मलाई को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। ऐसे कहा जाता है पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने अन्नाद्रमुक के नेताओं के दवाब में आकर ऐसा किया। पार्टी के केंद्रीय नेताओं ने उनको आश्वासन दिया उनको पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जायेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन के चलते बीजेपी को विधान सभा चुनावों में कुल 28 सीटें दी। उम्मीदवारों के चयन में भी अन्नामलाई को अधिक वजन नहीं दिया गया। चुनाव प्रचार से भी उनको दूर रखा गया।
ऐसा माना जाता है कि उन्होंने पिछले साल दिसम्बर में ही पार्टी आला कमान को यह कह दिया था उन्हें पार्टी छोड़ने के अनुमति दी जाये। पार्टी नेताओं ने उनसे आग्रह किया कि वे विधान सभा चुनावों तक पार्टी में बने रहे तथा इसके बाद ही कोई निर्णय ले। मई महीने के अंत में उन्होंने घोषणा कि की वे बीजेपी छोड़ कर कोई अन्य संगठन बनांएगे। पार्टी नेताओं ने उन्हें दिल्ली बुलाया तथा दवाब बनाया कि वे फ़िलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं करें। उन्हें राज्य सभा का सदस्य बनाये जाने की पेशकश भी की गई। लेकिन वे अपने निर्णय पर अडिग रहे। लेकिन उन्होंने एक से अधिक बार कहा कि वह किसी प्रकार का झगडा करके पार्टी से अलग नहीं हुए हैं तथा वे और उनका नया दल बीजेपी के साथ ही रहेगा . 5 जून को उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट दल कर साफ़ कर दिया कि वे अब बीजेपी के साथ नहीं है। न किसी प्रकार के प्रेस वार्ता की और न ही कोई औपचारिक प्रेस नोट जारी किया। उन्होंने एक्स पर लम्बी पोस्ट में बीजेपी से अलग होने तथा नया राजनीतिक संगठन बनाने के कारण बताये। उन्होंने कहा वे फ़िलहाल कोई राजनीतिक दल नहीं बना रहे है। “वी द लीडर्स” के बैनर टेल वे एक राजनीतिक आन्दोलन शुरू करेंगे। यह आन्दोलन लम्बे समय तक चलेगा तथा इसके जरिये कार्यकर्त्तायों पर आधारित सभी स्तर पर टीमें बनाई जायेंगे। जब इस तरह के संगठन का पूरा ढांचा तैयार हो जायेगा तब इसे राजनीतिक दल के रूप में बदल दिया जायेगा। यह दल पूरी तरह क्षेत्रीय होगा लेकिन इसका नजरिया राष्ट्रीय होगा। यह पूरी तरह लोकतान्त्रिक तथा धर्म निरपेक्ष होगा। अन्नामलाई ने साफ़ किया उनका प्रस्तावित दल आने वाला लोकसभा चुनाव नहीं लडेगा। यह दल केवल 2031 के विधान सभा लड़ने की तैयारी के लिए काम करता रहेगा। (लेखक के अपने विचार हैं)

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