
जाफर लोहानी
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मनोहरपुर(जयपुर)। ताला की ऊँची डूंगरी पर विराजमान हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक हजरत बुर्रहानुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह अपनी चमत्कारिक मान्यताओं और गंगा-जमुनी तहजीब के कारण पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। यहां जादू-टोना और प्रेत आत्मा से पीड़ित लोगों का निःशुल्क इलाज किया जाता है।
दरगाह की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदाय के जायरीन बराबर श्रद्धा के साथ आते हैं। कई श्रद्धालु अपनी मनौती पूरी होने पर पैदल चलकर भी दरगाह पहुंचते हैं।
इतिहास में इस दरगाह की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां राजा-महाराजा, मुख्यमंत्री और बड़े राजनेता भी शिरकत कर चुके हैं। सभी ने यहां आकर देश की खुशहाली और अमन-चैन के लिए दुआ की है।
हाल ही में अमरसर कस्बे मेँ स्थित हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक हजरत सैय्यद अहमद चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के सज्जादा नशीन व सूफ़ी खानकाह एसोसिएशन राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष सैय्यद आबिद अली चिश्ती फरीदी व पीर के चिले के खिदमतगार इमरान खान के नेतृत्व में दरगाह पर चादर पेश की गई। दुआ के बाद बाबा की कव्वाली और लंगर का आयोजन हुआ जिसमें सैकड़ों जायरीनों ने प्रसाद ग्रहण किया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “ताला के पीर सिर्फ एक दरगाह नहीं, बल्कि भाईचारे और आस्था का प्रतीक हैं। यहां आने वाला कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता।”
दरगाह कमेटी दूर-दराज से आने वाले जायरीनों के ठहरने और भोजन की निःशुल्क व्यवस्था भी करती है।