
दीपावली पर विशेष गीत
लेखक : वेदव्यास

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सुनहरे-सुनहरे जले दीप जगमग
धरा पर नई रोशनी मुस्कराई।
सलोने-सलोने बहुत मन लुभाते
सितारों ने खुशियों की दुनिया सजाई।
पवन धीमे-धीमे उजाले लुटाता
नई जिंदगी की कहानी सुनाता
अंधेरे में भटके हुए प्राणियों को
उमंगों की रंगीन राहें बताता।
सुनहरे-सुनहरे जले दीप जगमग
धरा पर नई रोशनी मुस्कराई।
खुशी भर के मन में विजय बन के आया
जो जीवन हैं प्यासे घटा बन के छाया
दिशाओं ने हंसकर नई भावना से
नई चांदनी का नया गीत गाया।
सुनहरे-सुनहरे जले दीप जगमग
धरा पर नई रोशनी मुस्कराई।
आंगन में आभा नया प्यार लाई
निराशा में आशा की किरणें जगाईं
हमारे हैं हमसे नहीं मिल सके जो
गले से लगाने की बेला ये आई।
सुनहरे-सुनहरे जले दीप जगमग
धरा पर नई रोशनी मुस्कराई।
सलोने-सलोने बहुत मन लुभाते
सितारों ने खुशियों की दुनिया सजाई।
(दीपावली की पारिवारिक शुभकामनाओं के साथ)