पृथ्वी दिवस पर थार की चेतावनी : वेद, कुरान, साइंस तीनों एक सुर

लेखक : राम गोपाल विश्नोई
लेखक पर्यावरण संघर्ष समिति, बीकानेर के संयोजक हैं।
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आज विश्व पृथ्वी दिवस है। दुनिया “Planet vs. Plastics” पर बहस कर रही है। थार में बहस इससे आगे निकल गई है – “Planet vs. JCB”। धर्म, विज्ञान और कानून तीनों एक ही बात कह रहे हैं, पर सुनने वाला कोई नहीं।
अथर्ववेद का पृथ्वी सूक्त कहता है – “माता भूमि: पुत्रो अहं पृथिव्या:”। धरती मां है, हम उसके पुत्र। मां को काटोगे तो पुत्र कैसे जिएगा? ऋग्वेद ने पेड़ को देवता माना है। देव-हत्या पाप है। कुरान सूरह अनआम में कहता है – “बाग अल्लाह ने उगाए, फिजूलखर्ची मत करो।” हदीस बुखारी में पैगंबर ﷺ का फरमान है – “कयामत आ रही हो और हाथ में पौधा हो तो लगा दो।” पेड़ लगाना सदका-ए-जारिया है, काटना धरती पर फसाद फैलाना है। गुरु जाम्भोजी ने 1485 में 29 नियम दिए। नियम 23 साफ कहता है – “रूंख हरा न काटण”। 540 साल पहले ही उन्होंने कार्बन, ऑक्सीजन और पानी तीनों का कानून दे दिया था। 1730 में खेजड़ली में अमृता देवी के साथ 363 लोगों ने एक खेजड़ी के लिए सिर दे दिया, पेड़ नहीं। दुनिया का पहला चिपको आंदोलन वहीं हुआ।

विज्ञान भी वही बात दोहरा रहा है। CAZRI जोधपुर के अनुसार एक परिपक्व खेजड़ी सालभर में 1.2 लाख लीटर पानी जमीन में रिचार्ज करती है, 60 टन कार्बन लॉक करती है, 30 किलो धूल सोखती है और 5 किलो PM2.5 फिल्टर करती है। यानी एक खेजड़ी 100 RO प्लांट, एक AC और एक एयर प्यूरीफायर के बराबर है। IMD बीकानेर की 2024 की रिपोर्ट बताती है कि 40% ट्री-कवर वाले गांव में लू के दिन 12 कम होते हैं और हीट-स्ट्रोक के केस तीन गुना कम। ETH Zurich की स्टडी कहती है कि पेड़ वाली जमीन का तापमान 8 से 12 डिग्री कम रहता है। NASA का Landsat 8 डेटा दिखाता है कि शहर में हरियाली 2.5 से 3.6 डिग्री ठंडक लाती है। IPCC की 2018 की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि धरती का पारा 1.5 डिग्री से नीचे रखना है तो 2030 तक 45% उत्सर्जन घटाना होगा। सिर्फ 4 साल बचे हैं। धर्म ने जिसे जीवन कहा, विज्ञान उसे कार्बन सिंक और वाटर रिचार्ज यूनिट कह रहा है। नाम अलग हैं, काम एक है।

दुनिया ने करके दिखाया है। UNEP की 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक बीजिंग ने 2013 से 2017 के बीच 3000 से ज्यादा फैक्ट्री बंद की, 1 करोड़ पेड़ लगाए। नतीजा – PM2.5 का स्तर 89.5 से घटकर 58 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गया। AQI 90 से 58 पर आ गया। पांच साल में हवा बदल गई, क्योंकि वहां मेयर की नौकरी AQI से बंधी थी। इसके उलट बीकानेर में 2022 से 2025 के बीच 1.22 लाख से ज्यादा खेजड़ी और रोहिड़ा काटे गए। वजह – सोलर प्लांट। नतीजा – इस अप्रैल में तापमान 48.2 डिग्री पहुंच गया, AQI 400 पार चला गया। 1.22 लाख पेड़ कटने का मतलब है 1220 हेक्टेयर जमीन 12 डिग्री ज्यादा गरम हो गई और 6.1 लाख किलो PM2.5 सीधा लोगों के फेफड़े में गया। फर्क नीयत का है। बीजिंग ने जहर हटाया और ऑक्सीजन जोड़ी। हम ऑक्सीजन हटा रहे हैं और गर्मी जोड़ रहे हैं।
कानून की कमी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 1996 के T.N. Godavarman केस में कहा कि ओरण-गोचर ‘डीम्ड फॉरेस्ट’ है। वहां गैर-वन गतिविधि बैन है। राजस्थान हाईकोर्ट ने 2018 में आदेश दिया कि ओरण की एक इंच जमीन भी आवंटित नहीं होगी। NGT ने 26 जुलाई 2021 को ओरण-गोचर पर सोलर और कमर्शियल गतिविधि बैन कर दी। सरकार ने फरवरी 2025 में लिखित आदेश दिया कि अब एक भी पेड़ नहीं कटेगा और इसी सत्र में कानून लाया जाएगा। हकीकत यह है कि RRECL ने 49,000 हेक्टेयर ओरण सोलर कंपनियों को दे दिया है। पिछले 15 दिन में ही बीकानेर में 400-500 खेजड़ी काट दी गई। एक ओरण के कटने से 20 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड एक झटके में हवा में घुल जाती है।

रास्ता भी मौजूद है। जर्मनी ‘एग्रीवोल्टेइक्स’ मॉडल पर काम कर रहा है – सोलर पैनल 4 मीटर ऊंचे लगाओ, नीचे खेजड़ी और सेवण घास जिंदा रहें। पैनल ठंडे रहेंगे तो 6% ज्यादा बिजली बनेगी। हरियाली भी बचेगी, रोजगार भी। दूसरी तरफ एक खेजड़ी की कार्बन और पानी की कीमत ग्राम पंचायत के खाते में डाल दो। पेड़ काटना घाटे का सौदा बन जाएगा। बीजिंग ने ‘एयर मेयर’ बनाया था। बीकानेर को ‘हीट ऑफिसर’ बनाना चाहिए। DM की ACR तापमान से लिंक हो। 48 डिग्री पार होते ही जवाबदेही तय हो।
22 अप्रैल पृथ्वी दिवस का प्रण यही होना चाहिए – वेद का मंत्र “माता भूमि:” याद रखो, कुरान का हुक्म “फसाद मत फैलाओ” मानो, जाम्भोजी का नियम “रूंख हरा न काटण” निभाओ, और साइंस का फॉर्मूला “1 पेड़ = लाइफ सपोर्ट सिस्टम” समझो। NASA 1 अरब साल बाद की ऑक्सीजन की चिंता कर रहा है। IPCC अगले 4 साल की। थार में हम अगले 4 दिन की सांस के लिए लड़ रहे हैं।
पर्यावरण बचाने का आंदोलन 18 जुलाई 2024 से लगातार जारी है। मांग एक ही है – खेजड़ी की सुरक्षा कानून की किताब में लिखो। जब तक कानून नहीं बनता, धरना उठेगा नहीं। पृथ्वी दिवस पर सिर्फ पोस्टर नहीं, प्रण चाहिए। JCB बंद हो, कानून चालू हो। खेजड़ी बचेगी तो धरती बचेगी, धरती बचेगी तो मजहब बचेगा, साइंस बचेगा, और सांस बचेगी। (लेखक का अपना अध्ययन एवं अपने विचार हैं)