
जाफर लोहानी
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मनोहरपुर (जयपुर)। बुजुर्गानेद्दीन के खिदमतगार अब्दुल अज़ीज़ लोहानी ने कहा की वली के दीवाने रंज ओ गम से मुरझाया नहीं करते हैं यह शब्द लोहानी ने अमरसर में स्थित हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक हजरत ख्वाजा शेख़ सैय्यद शाह अहमद चिश्ती रहमतुल्ला आलेह का 787 वां उर्स विधिवत शुरू होने पर जियारत करने के बाद में उपस्तिथ जायरीनों को संबोधित करते हुए कहे।
लोहानी ने कहा कि वली एक ट्रांसफार्मर रूपी होता है जो इनसे जुड़ता है वह रोशन हो जाता है और जो ईनसे टकराता है वह चकनाचूर हो जाता है।
लोहानी ने शायराना अंदाज़ में कहा की “हद तपे सो औलिया, बेहद तपे सो पीर, हद बेहद दोनों तपे, ताको नाम फकीर”! जाफ़र लोहानी ने कहा कि इरादे रोज बनकर टूट जाते हैं अमरसर में बाबा के वही आते हैं जिन्हें बाबा बुलाते हैं। दरगाह के सज्जादानशीन सैय्यद आबिद अली ने कहा कि निगाहें वली में वो तासीर देखी बदलती हुई रोज हजारों की तकदीर देखी।
इसके बाद में अब्दुल अजीज लोहानी व जाफ़र लोहानी की दस्तारबंदी की गई। उल्लेखनीय हैं कि बाबा का उर्स आज से शुरू हो गया हैं चिराग रोशन व झंडे की रस्म के साथ मे उर्स की शुरुआत हो चुकी हैं। आज खादिमो द्वारा बाबा के ग़ुस्ल की रस्म अदा की गई व भारत देश की खुशहाली की दुआएं की गई। रात को मिलाद शरीफ की गई जिसमें ख़ुदा के हुकम व मुहम्मद साहब के बताए हुए रास्ते पर चलने की बात कही गई।